23 जनवरी- जयंती विशेष: भाजपा सरकार सुभाष चंद्र बोस की जयंती को मनाएगी पराक्रम दिवस के रूप में
“तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आज़ादी दूंगा” जैसे एक मात्र नारा देने वाले भारत माँ के वीर सपूत अमरत्व प्राप्त सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी सन 1897 में देश के उड़ीसा राज्य के कटक शहर में हुआ था और आज के दिन उनका 124 वीं जयंती है।
यह तो हम सभी पता ही है लेकिन सुभाष चन्द्र बोस एक मात्र ऐसे स्वत्रंतता संग्राम सेनानी हुये जिनका मृत्यु दिवस कभी भी नही मनाया जाता है, अर्थात भारत माँ के ये वीर सपूत सदैव सदैव के लिये हमारे आपके मध्य अमर हो गये।

भारत माँ की आजादी के लिये शहीद हुये वे एकमात्र ऐसे व्यक्तित्व थे जिनका अंग्रेजो ने भारत को स्वत्रंत करने बाद भी 20 वर्षों तक उनके मिल जाने पर स्वत्रंत भारत की सरकार को सुभाष चंद्र बोस को अंग्रेजो के हाथ सौपे जाने की बात लिखित रूप में उस समय के तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत ने भारतीयों को सत्ता हस्तातरण करते समय लिखित दस्तावेज में एक शर्त के रूप में उल्लेख किया था। शायद इसका कारण उनके द्वारा दूसरे देश की सेना को भारत की आजादी के लिये अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध करने के लिये खुद उन्ही के भारत भूमि में उतारने जैसे कृत्यों से उन्होंने अंग्रेजों के नाक में दम कर दिया था।
उन्होंने आजाद हिंद फौज जैसे सैनिक टुकड़ी को वह भी दूसरे देश के लोगों को सम्मिलित कर और उन्ही देशवासियों से माली सहायता प्राप्त कर दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने सोवियत संघ, नाजी जर्मनी, जापान जैसे देशों की यात्रा कर उनसे ब्रिटिश सरकार के खिलाफ खड़े होने के लिये तैयार किया था। इसके बाद जापान में उन्होंने आजाद हिंद फौज की स्थापना कर अंग्रेज़ों को चौका दिया था। ब्रिटिश शासन काल में इस कार्य को अंजाम देना शायद पत्थर काटने से भी कठिन काम था। उनके ऐसे अनेको दुःसाहसिक कृत्यों से अंग्रेजों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
अनेको कोशिशों के बावजूद आज तक उनकी मृत्यु एक रहस्य बना हुआ है। यह हमारे देश और देशवासियों की बड़ा दुर्भाग्य है कि देश के लिये सच्चे अर्थों में अपना सब कुछ निछावर करने देने वाले एक नीव के ईंटों के समान व्यक्तित्व हमेशा हमेशा के लिये गुमनामी के अंधेरे में कहीं खो गये जिनके जीवित रहने पर आज हमारे देश का मस्तक और भी गर्व से अधिक ऊंचा हो जाता और आज जैसी देश की हालत है निश्चित ही उससे कहीं भिन्न होती। देश की स्वत्रंतता आजादी के अपने प्राणों की आहुति देने वाले इतिहास में दर्ज अनेको नामो में से एक प्रखर ओजोस्ववि नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस का है। – जी के चक्रवर्ती








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