Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, December 13
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    ज्यादा बारिश डराती है कहीं फिर न हो धराली जैसी त्रासदी!

    ShagunBy ShagunAugust 25, 2025 Current Issues No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    वायरल वीडियो में कैद हुयी भारी तबाही
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 160

    सुशील कुमार

    उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में धराली गांव के बहने की घटना ने एक बार फिर प्रकृति के साथ खिलवाड़ के गंभीर परिणामों को उजागर किया है। खीरगंगा नदी में बादल फटने या हैंगिंग ग्लेशियर के टूटने से आई अचानक बाढ़ ने पूरा कस्बा तबाह कर दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग चिंतित हैं और जलवायु परिवर्तन व पर्यावरणीय क्षति पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, यह प्रतिक्रिया तात्कालिक लगती है, क्योंकि 2013 के केदारनाथ हादसे जैसी भयावह त्रासदी के बाद भी कोई ठोस सबक नहीं लिया गया। उस हादसे में आधिकारिक तौर पर 6,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और लगभग 4,000 लोग लापता हो गए थे, फिर भी पहाड़ों में पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ जारी रही।

    पारिस्थितिकी पर मंडराता खतरा

    धराली की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं कि क्या अब प्रकृति के साथ खिलवाड़ रुकेगा? उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालयी क्षेत्रों में अनियंत्रित मानवीय गतिविधियां, जैसे पनबिजली परियोजनाएं, नदियों का रास्ता मोड़ना, बड़े बांधों का निर्माण, पर्यटन के नाम पर रिसॉर्ट्स और होटलों का विकास, अंधाधुंध खनन और पेड़ों की कटाई, पारिस्थितिकी संतुलन को बिगाड़ रही हैं।

    वायरल वीडियो में कैद हुयी भारी तबाही

    विशेषज्ञों का मानना है कि टिहरी बांध जैसे बड़े ढांचों ने नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किया है, जिससे बादल फटने की घटनाएं बढ़ी हैं। टिहरी बांध का जलग्रहण क्षेत्र 50 वर्ग किलोमीटर से अधिक हो गया है, जो बादल बनने की प्रक्रिया को तेज करता है। साथ ही, मैदानी इलाकों में जंगलों की कमी के कारण मानसून के बादल पहाड़ों पर ज्यादा बरसते या फटते हैं, जिससे अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाएं बढ़ रही हैं।

    जलवायु परिवर्तन भी इस संकट को गहरा रहा है। पहले चार महीने का मानसून अब दो महीने में सिमट गया है, जिससे बारिश की तीव्रता बढ़ी है। वैज्ञानिक चेतावनियां बताती हैं कि औद्योगिक क्रांति के बाद से पृथ्वी का तापमान 2.5% बढ़ चुका है और अगले 25 वर्षों में यह 2% और बढ़ सकता है। यह धरती के लिए बढ़ता हुआ “बुखार” है, जो पर्यावरणीय संतुलन को और बिगाड़ेगा।

    मानवीय लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना निर्माण

    धराली जैसे हादसों के पीछे मानवीय लापरवाही भी कम जिम्मेदार नहीं है। नदियों के किनारे और इको-सेंसिटिव जोन में नियमों को ताक पर रखकर निर्माण हो रहा है। धराली में बाढ़ से बहने वाले होटल और होमस्टे ऐसे ही क्षेत्रों में बने थे, जहां निर्माण प्रतिबंधित है। पहले पहाड़ी गांव नदियों से दूर बनाए जाते थे, लेकिन पर्यटन के बढ़ते दबाव में नदियों के किनारे होटल और रिसॉर्ट्स बन रहे हैं। यह न केवल जोखिम भरा है, बल्कि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन भी है।

    विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की जरूरत

    हालांकि, इस समस्या को केवल एक पक्ष से देखना उचित नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में विकास की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, बुनियादी सुविधाएं और आर्थिक विकास जरूरी हैं। पनबिजली परियोजनाएं बिजली उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। पर्यटन भी स्थानीय अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है। लेकिन यह विकास पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए। सुझाव और समाधान:इको-सेंसिटिव जोन में सख्ती: निर्माण पर प्रतिबंध को कड़ाई से लागू किया जाए। धराली जैसे क्षेत्रों में अवैध निर्माण की जांच हो और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।

    वनीकरण और संरक्षण: मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और जंगल संरक्षण की योजनाएं लागू की जाएं।
    सतत विकास मॉडल: पनबिजली परियोजनाओं और पर्यटन विकास को पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के साथ लागू किया जाए। छोटी और मध्यम आकार की परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए।
    जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई: मानसून के बदलते पैटर्न और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए दीर्घकालिक नीतियां बनें।
    स्थानीय भागीदारी: स्थानीय समुदायों को पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन में शामिल किया जाए। उनकी पारंपरिक जानकारी का उपयोग टिकाऊ विकास में किया जा सकता है।
    जागरूकता और शिक्षा: नागरिकों और नीति-निर्माताओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाएं।

    वास्तव में धराली की त्रासदी प्रकृति का चेतावनी संदेश है। यह न तो पहली ऐसी घटना है और न ही आखिरी होगी, अगर हम अभी नहीं चेते। सरकार, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों को मिलकर पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। अंधाधुंध निर्माण, जंगलों की कटाई और नियमों के उल्लंघन को रोकना समय की मांग है। साथ ही, विकास की योजनाओं को पर्यावरण-अनुकूल बनाकर पहाड़ों की नाजुक पारिस्थितिकी को बचाया जा सकता है। यदि अब भी सबक नहीं लिया गया, तो भविष्य में ऐसी त्रासदियां और भयावह रूप ले सकती हैं।

    Shagun

    Keep Reading

    Silence of laborers on the border roads of Arunachal Pradesh

    सीमांत की सड़कों पर मजदूरों का सन्नाटा

    Examples of humanity that challenge both borders and destiny.

    इंसानियत की वो मिसालें जो सरहदें और तकदीर दोनों को चुनौती देती हैं

    The cold grip of winter: Hidden dangers in the pollution haze, be vigilant now.

    सर्दी की ठंडी लपेट: प्रदूषण की धुंध में छिपे खतरे, अभी से सतर्क हो जाइए

    Mukundara hills Tiger Reserve Rajasthan

    मुकुंदरा की जंगली धड़कन: जहां बाघों की गर्जना और इंसानों की चिंता एक साथ गूंजती है

    दीपावली अब विश्व धरोहर की अमूल्य निधि

    वंदे मातरम : 150 वर्ष बाद भी जीवंत, पर अभी पूरी तरह जीया नहीं गया

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    BBAU: Basant Kanaujia's expulsion revoked on 25th day, agitation ends, thanks expressed to supporters

    बीबीएयू: 25वें दिन बसंत कनौजिया का निष्कासन वापस, आंदोलन समाप्त, समर्थकों के प्रति जताया आभार

    December 12, 2025
    Silence of laborers on the border roads of Arunachal Pradesh

    सीमांत की सड़कों पर मजदूरों का सन्नाटा

    December 12, 2025

    शोले का 50 साल बाद ओरिजिनल क्लाइमेक्स के साथ थिएटर्स पर धमाका

    December 12, 2025
    Chaos at BBAU: Security guard points gun at professor, Dalit student's hunger strike continues for 24th day!

    BBAU में प्रोफेसर पर सुरक्षा गार्ड ने तान दी बंदूक, दलित छात्र का अनशन जारी !

    December 12, 2025
    A wave of faith surged during Sai Baba's Charan Paduka Yatra, devotees were immersed in devotion with drums and cymbals.

    साई बाबा की चरण पादुका यात्रा में आस्था का उमड़ा सैलाब, ढोल-नगाड़ों के साथ भक्तिभाव में सराभोर हुए भक्त

    December 12, 2025

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2025 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading