…………….तो सिर्फ ध्यान भटकाने को सक्रिय हुए हैं श्री श्री !

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लखनऊ । अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद को अदालत से बाहर सुलझाने निकले आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविषंकर अपने मकसद मंे सफल होंगे, इसे लेकर अभी से सवाल उठने लगे हैं। श्री श्री की मध्यस्थता पर मंदिर आन्दोलन से जुड़े लोग तो सवाल उठा ही रहे हैं। इसके साथ ही अब मस्जिद की पैरोकारी में लगे लोग भी मुखर हो चले हैं। ऐेसे में अभी से यह लगने लगा है कि वर्षों से चले आ रहे इस विवाद को बातचीत से सुलझाने का एक और प्रयास व्यर्थ जाने वाला है। माना जा रहा है कि यह पूरी कवायद दो राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्य मुद्दे से आमजन का ध्यान भटकाने और राम मंदिर मुद्दे को हवा देने से इतर और कुछ भी नहीं है।
दरअसल अयोध्या विवाद की सुनवाई कर रहे सर्वोच्च न्यायालय ने यह सलाह दी थी कि इस प्रकरण में वह सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुनायेगा। लेकिन यदि अदालत के बाहर आपसी बातचीत में इस विवाद का कोई सर्वमान्य हल निकलेगा तो इस पर उसे कोई आपत्ति नहीं होगी। सर्वोच्च न्यायालय को अपनी यह बात कहे काफी समय हो गया है। अब तो आगामी दिसम्बर के पहले सप्ताह से सर्वोच्च न्यायालय में हर दिन सुनवाई करने जा रहा है। इसी बीच अचानक आध्यात्मिक गुरू श्रीश्री रविषंकर प्रकट होते हैं और कहते हैं उनसेे अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए दोनों ही पक्षों ने सम्पर्क किया है, इसलिए वह अब इस दिषा में आगे बढ़ने जा रहे हैं। उन्होंने षिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी से मुलाकात की। यह वही वसीम रिजवी हैं जो पहले ही अयोध्या में राम मंदिर बनाये जाने की वकालत करते रहे हैं। वसीम रिजवी के षिया मुसलमान होने के कारण सुन्नी मुसलमान उनसे असहमत हैं। सुन्नी मुसलमानों के नेताओं और बाबरी मस्जिद के पक्षकारों का कहना है कि यह मस्जिद सुन्नियों की थी। ऐसे में षिया मुसलमानों या फिर षिया वक्फ बोर्ड का इससे कोई लेना देना नहीं है। उधर, मंदिर बने इस पक्ष में खड़े हुए चंद षिया मुसलमानों व नेताओं का कहना है कि बेषक बाबर सुन्नी था लेकिन उसका सेनापति मीर बाकी षिया मुसलमान था। मीर बाकी ने ही अयोध्या में हमला किया था और मस्जिद का निर्माण किया था। श्री श्री से मिलने के बाद शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा कि विवादित भूमि पर ही मंदिर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत आगे बढ़ चुकी है और 2018 में मंदिर कर निर्माण शुरू हो जाएगा।
रिजवी ने कहना कि राम मंदिर अयोध्या में राम जन्मभूमि पर ही बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोर्ट में इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड भी पार्टी है क्योंकि बाबरी मस्जिद शिया मस्जिद थी। जब रिजवी से पूछा गया कि वह इतने सालों तक चुप क्यों थे तो उन्होंने कहा कि हम इतने दिन खामोश रहे तो इसका मतलब ये नहीं कि हमारा कोई अधिकार नहीं है। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि श्री श्री रविशंकर के साथ समझौते के क्या-क्या बिंदु होने चाहिए इस पर बातचीत चल रही है ताकि दोनों समाज को अपनी हार महसूस न हो। उन्होंने कहा कि श्री श्री के आने से उम्मीद है कि ये मसला हल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ मुसलमानों को छोड़कर सभी विवादित स्थल पर मंदिर बनाने को लेकर सहमत हैं। देश के पूरे मुसलमान हिंसा नहीं चाहते है। इस मुद्दे को बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए।
वहीं, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी का कहना है कि बातचीत या फिर मध्यस्थता से अब यह मसला हल नहीं हो सका है। आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि बोर्ड के सदस्य मध्यस्थता को तैयार नहीं हैं। श्री श्री रविशंकर को अपनी मंशा बोर्ड को लिखनी चाहिए। जिलानी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद के लिए ‘सरेंडर’ को तैयार नहीं है। इस बीच, दूसरे पक्ष यानी रामलला विराजमान की वकील रंजना अग्निहोत्री ने श्री श्री रविशंकर पर आरोप लगाया कि उन्हें मामले में तथ्यों की जानकारी नहीं है। वह इसकी आड़ में नोबेल पुरस्कार की दौड़ में आना चाहते हैं। रंजना अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि श्री श्री रविशंकर इस्लामिक देशों के संपर्क में हैं। वह तो नोबेल पुरस्कार की दौड़ मे आना चाहते हैं। उन्हें इस मामले में तथ्यों की जानकारी नहीं है। रंजना ने कहा कि श्री श्री रविशंकर के बयान से हिंदुओं की आस्था आहत हुई है हम किसी मध्यस्थता को तैयार नहीं हैं।
उधर, श्री श्री रविशंकर के ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने दावा किया है कि राम मंदिर विवाद को अदालत से बाहर सुलझाने में मदद के लिए इसके संस्थापक श्री श्री रविशंकर निर्मोही अखाड़ा के आचार्य रामदास सहित कई इमामों और स्वामियों के साथ संपर्क में हैं। फाउंडेशन ने कहा कि अभी किसी नतीजे पर पहुंचना बहुत जल्दबाजी होगी और बातचीत सरकार की ओर से नहीं की जा रही है। ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने एक बयान में कहा कि रविशंकर निर्मोही अखाड़ा के आचार्य रामदास सहित कई इमामों और स्वामियों के साथ संपर्क में हैं। इसमें बताया गया है, गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर का मानना है कि राम मंदिर मुद्दे पर मौजूदा माहौल, दोनों पक्षों के लोगों को एक अवसर मुहैया कराता है ताकि वो एक साथ आएं, अपनी उदारता दिखाएं और अदालत से बाहर मामले को निपटाएं। फाउंडेशन ने कहा कि बातचीत किसी भी सरकार या संगठन की ओर से नहीं है। हालांकि, अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने रविशंकर के साथ किसी तरह के बैठक की खबरों से इंकार किया है। बोर्ड ने कहा था कि अगर रविशंकर चाहते हैं तो वो उनसे बातचीत के लिए तैयार है क्योंकि उन्हें बातचीत करने और समाधान खोजने में मदद करने में कोई समस्या नहीं है।
इन सब गतिविधियों के बीच श्रीराम जन्म भूमि आन्दोलन से लम्बे समय से जुड़े एवं भाजपा सांसद रहे डा. रामविलास वेदान्ती का साफ कहना है कि श्री श्री की राम मंदिर आन्दोलन में कोई भूमिका नहीं रही। यहां तक कि वह आज तक रामलला के दर्षन के लिए भी नहीं गए। ऐसे में वे क्या मध्यस्थ की भूमिका निभायेंगे क्योंकि उन्हें इस बारे में कोई भी जानकारी ही नहीं है। श्री श्री अपना एनजीओ (स्वयं सेवी संस्था) चलायें और वहीं तक सीमित रहें। उन्हें इस मामले में दखल देने का अधिकार नहीं है। उधर, बाबरी मस्जिद के मुख्य पैरोकार रहे मरहूम हाषिम अंसारी के पुत्र जो वर्तमान में मुख्य पैरोकार की भूमिका में हैं, वे भी किसी ‘बाहरी’ के बीचबचाव पर आपत्ति करने से नहीं चूक रहे हैं। बीते दिनों श्री श्री अपने एक दिनी दौरे पर अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने दोनों पक्षों के मुख्य लोगों से वार्ता भी की। उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि उनके पास कोई फार्मूला नहीं है लेकिन फिर भी वह चाहते हैं आपसी सहमति से मंदिर निर्माण का मार्ग प्रषस्त हो। श्री श्री ने लखनऊ में सुन्नी धर्मगुरू खालिद रषीद फरंगी महली से भी मुलाकात की। परन्तु देष की सर्वोच्च इस्लामिक संस्था दारूल उलूम ने श्री श्री सेे किसी भी तरह की वार्ता करने से साफ इनकार कर दिया है। उधर, उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक ने कह दिया है कि अयोध्या प्रकरण को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए अब वार्ता करने से कोई लाभ नहीं होने वाला है। ऐसे में साफ है कि श्री श्री रविषंकर अपनी मुहिम में सफल तो नहीं हो पायेंगे लेकिन गुजरात प्रदेष के विधानसभा चुनाव के दौरान राम मंदिर मुद्दे को फिर से चर्चा में जिन्दा रखने में सफल होंगे।

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