कुत्तों के रात में रोने को क्यों अशुभ माना जाता है?

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अंधविश्वास एक ऐसी पहेली है जिस पर यकीन करो तो ठीक यदि न करो न करो तो दिल में संशय बना रहा है की कही हम गलत तो नहीं कर रहे जैसे कि दूध गिर जाए तो अशुभ होता है। कांच का गिलास टूट जाए तो शुभ माना जाता है। बिल्ली ने रास्ता काट लिया तो कुछ गलत होगा। ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो आजतक लोग मानते हैं और उनका पालन भी करते हैं।

इंटरनेट पर वायरल इस तस्वीर में कुत्ता हवा में तैरते भूत को देखकर भौक रहा है और दूसरी तस्वीर में किसी अनजाने शख्श या अशुभ संकेत के चलते कुत्ते भौक रहे है!

ऐसी अंधविश्वासों ने कई सारे लोगों की जिदंगियों को भी खराब किया है लेकिन लोगों का मानना है कि यह बातें अधंविशवास कि नहीं है और यह बल्कि सच है। ऐसी ही अधंविश्वास की एक बात के बारे में हम बात करेंगे जो लोग आज के वक्त में भी उसे मानते हैं। हम बात कर रहे हैं

कुत्तों के रोने की की आवाज के बारे में अक्सर देखा गया है कि रात को कुत्ते रोते हैं और उनके इस रोने को अशुभ मानना जाता है।

ऐसी कई अधंविश्वास की बातें हैं और कई सारी बेतुकी धारणाएं बना रखी है कि कुत्तों के रात को रोने से किसी की भी मौत हो जोती है। ऐसी और भी कई बातें हैं जो की लोगों ने बना रखी हैं। यह भी कहा जाता है कि जहां पर भी कुत्ता रो रहा होता है तो वहां से जो भी कोई व्यक्ति होता है उसे वहां से चले जाना चाहिए। ऐसा करने से जो भी बला उस पर या उसके परिवार पर आने वाली होती है वह लौट जाती है।

अब यह बातें सच हैं या फिर ऐसे ही किसी ने लोगों के मन में अधंविश्वास के नाम पर डर पैदा किया हुआ है। यह सच्चाई वास्तव में एक वास्तविकता है या फिर अधंविश्वास है। क्या यह एक जीवंत दोस्त और साथी लून है।

बता दें कि ऐसी कोई वास्तव में अशुभ वाली बातें नहीं होती है। यह सारी धारणाएं लोगों ने बना रखी हैं। आपको बता दें की रात को कुत्तों के रोने के पीछे भी एक वैज्ञानिका कारण होता है। कुत्ते जब भी अकेले होते हैं या फिर वह अकेला महसूस करते हैं तो वह अक्सर रोना शुरू कर देते हैं। वह ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वह रोते समय अपने आस-पास के दोस्तों को अपने स्थान पर बोला रही होती है।

ऐसे करने से कुत्तों के दोस्तों को पता चल जाता है कि उनका साथी कहां पर है। जब भी कुत्तों को अपने साथियों को कोई भी संदेश पहुंचना होता है तो वह इस तकनीक को इस्तेमाल करते हैं और इस तकनीक को काफी ही उन्नत तकनीक माना जाता है। अगर इसे हम टेलीपथी कहें तो गलत नहीं है।

दरअसल टेलीपथी में एक ऐसी प्रणाली आती है जो संदेश मानसिक तरंगों के माध्यम से निकलता है। यह काफी ही अच्छा संचार माना जाता है। यह भी माना जाता है कि विज्ञान इस तरह से एक सही दिशा में संदेश का आदान-प्रदान करता है।