पश्चिमी शास्त्रीय संगीत समारोह 20 अप्रैल को सीएमएस में

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  • ऑस्ट्रिया, डोमिनिकन गणराज्य एवं भारतीय वादकों व गायकों की होगी सामूहिक प्रस्तुति
  • विधानसभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित समारोह के मुख्य अतिथि होंगे

लखनऊ, 15 अप्रैल 2019: विश्व का सबसे बड़ा ‘पश्चिमी शास्त्रीय संगीत समारोह’ आगामी 20 अप्रैल 2019, शनिवार को सायं 6.00 बजे से सी.एम.एस. गोमती नगर (द्वितीय कैम्पस) ऑडिटोरियम में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें वियना यूनिवर्सिटी फिलहारमोनिक ऑर्केस्टा और कोरस के साथ-साथ 116 ऑस्ट्रियाई संगीतकार और गायक, डोमिनिकन गणराज्य के 11 संगीतकार एवं 41 से अधिक भारतीय संगीतकार व गायक सामूहिक प्रस्तुति देंगे।

प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित इस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी ने बताया कि सिटी मोन्टेसरी स्कूल अपनी स्थापना दिवस के 60 वर्ष (1959-2019) पूरे होने पर इस वर्ष ‘डायमण्ड जुबली समारोह’ मना रहा है एवं इस उपलक्ष्य में सी.एम.एस. द्वारा पूरे वर्ष विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। विशाल ‘पश्चिमी शास्त्रीय संगीत समारोह’ का यह आयोजन भी इसी की एक कड़ी है।

श्री शर्मा ने बताया कि देश इस वर्ष महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती भी मना रहा है। इस अवसर पर पश्चिमी शास्त्रीय संगीत समारोह में शामिल कलाकार महात्मा गाँधी के दो सुप्रसिद्ध भजनों – ‘रघुपति राघव राजाराम’ और ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये’ पर आधारित एक विशेष संगीत रचना ‘सन्मित’ के माध्यम से अपनी प्रस्तुति को यादगार बनायेंगे। इस कार्यक्रम में ऑस्ट्रियन और यूरोपीय संगीत कलाकारों के द्वारा विश्वप्रसिद्ध शूबर्ट, चायस्कोस्की और ग्रीग की कृतियों पर कार्यक्रम प्रस्तुत किया जायेगा। इस भव्य पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का संचालन वियना विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध कलाकार विजय उपाध्याय द्वारा किया जायेगा। इस आयोजन को जसुभाई फाउंडेशन, रॉयल स्कूल्स ऑफ म्यूजिक, लन्दन, फर्टाडोस म्यूजिक और ऑस्टेलियन कल्चरल फोरम के एसोसिएशन बोर्ड का भी समर्थन प्राप्त है।

सीएमएस ऑडिटोरियम में विश्व एकता सत्संग

धर्म के पतन पर भगवान को धरती पर आना पड़ता है: भारती गाँधी

लखनऊ, 15 अप्रैल 2019: विश्व एकता सत्संग में बोलते हुए सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. (श्रीमती) भारती गाँधी ने कहा कि जब जब धरती पर धर्म का नाश होता है और दुष्ट बढ़ जाते हैं, तब तब भगवान इस धरती पर अवतिरत होते हैं। हमें इन्हीं अवतारों की खोज करना चाहिए। युद्ध पर जो धन खर्च होता है, उसे रोककर लोगों की भलाई में लगाना चाहिए।

श्रीमती गाँधी ने कहा कि यदि हम बच्चों को प्रारम्भ से ही शान्ति, एकता, सद्भाव आदि जीवन मूल्यों की शिक्षा देंगे तो उनके मन-मस्तिष्क में युद्ध की बात आयेगी ही नहीं और बड़े होकर वे सदैव शान्ति व एकता की राह पर चलेंगे, जिससे सारी विश्व मानवता का कल्याण होगा। इससे पहले, सी.एम.एस. के संगीत शिक्षकों ने सुमधुर भजनों की श्रृंखला प्रस्तुत कर सम्पूर्ण आडिटोरियम को आध्यात्मिक आलोक से प्रकाशित कर दिया तथापि उपस्थित सत्संग प्रेमियों को सुखद अनुभूति करायी।

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