भाजपा ने सिद्दारमैया पर लगाया अंधविश्वास फैलाने का आरोप
बेंगलुरू,16 अप्रैल। कर्नाटक के चुनावी समर में अब नींबू को लेकर राजनीति तेज़ हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के हाथ में नींबू दिखने पर बीजेपी ने उन्हें अंधविश्वासी बताने में देर नहीं लगाई, तो दूसरी तरफ उन्होंने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई। उन्होंने इसे कन्नड़ संस्कृति से जोड़ दिया है। लेकिन बीजेपी ने कहा है कि एक तरफ तो वह ऐसी चीजों को बढ़ावा देते हैं, तो दूसरी तरफ हिन्दू परंपराओं का अनादर करने और उन्हें आपराधिक बनाने के लिए अंधविश्वास विरोधी कानून ला रहे हैं।
कर्नाटक बीजेपी ने एक ट्वीट करके कहा, हाथ में नींबू लेकर प्रचार करना और दूसरी ओर हिन्दू परंपराओं का अनादर करने और उन्हें आपराधिक बनाने के लिए अंधविश्वास विरोधी कानून लाना, यह सिद्दारमैया का पाखंड है। बीजेपी ने एक फोटो भी पोस्ट किया है, जिसमें वह हाथ में नींबू लेकर प्रचार कर रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता एस. प्रकाश ने कहा कि जिस आदमी ने अंधविश्वास निरोधक कानून बनाया, वही अगर नींबू लेकर अंधविश्वास फैलाएगा, तो मज़ाक तो बनेगा ही। सिद्दारमैया भी कहां पीछे रहने वाले थे।
उन्होंने ट्वीट किया कि फेक न्यूज़ अगर बीजेपी फैलाएगी, तो क्या स्मृति ईरानी गलत खबर फैलाने के आरोप में कार्रवाई करेंगी? मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी ने मुझे नींबू दिया और मैंने हाथ में ले लिया। ये कर्नाटक का ट्रेडिशन है। इसमें क्या गलत है? इसके जवाब में बीजेपी ने तीन अलग-अलग सालों और जगहों का एक और ट्वीट जारी कर पूछा कि क्या सभी नींबू एक ही आदमी ने दिए। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नींबू को लेकर इतना सियासी बवाल क्यों मचता है। हिन्दू मान्यता है कि नींबू नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है। लेकिन अगर कोई हाथ में नींबू लेकर घूमे तो यह अंधविश्वास के इलावा कुछ भी नहीं। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नही है।







