लखनऊ, 05 जनवरी 21: ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को विधान भवन के तिलक हाल में बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु हुई समीक्षा बैठक की गयी। इसमें प्रमुख सचिव(ऊर्जा), ऊर्जा निगमों के एमडी और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारी सम्मिलित हुए। इस बैठक में संघर्ष समिति द्वारा विगत 22 अक्टूबर 2020 को दिये गये सुधार प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा हुई। इसमें ऊर्जा मंत्री ने बैठक के समापन पर कहा कि सुधारों पर संघर्ष समिति ने बहुत सकारात्मक चर्चा की है और बदलाव स्पष्टतया सही दिशा में दिख रहा है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि समीक्षा की अगली बैठक में भी संघर्ष समिति के प्रस्तावों पर चर्चा जारी रहेगी और संघर्ष समिति की चर्चा पूरी हो जाने के बाद पावर कारपोरेशन प्रबन्धन अपनी बात रखेगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि संघर्ष समिति और प्रबन्धन की चर्चा हो जाने के बाद सुधार की कार्य योजना तैयार कर सुधार के कार्यक्रम चलाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि आज सार्थक संवाद हुआ है और संवाद से ही समाधान निकलता है। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है कि आज की चर्चा में संघर्ष समिति की ओर से रखे गये सभी प्र्रस्ताव उपभोक्ता उन्मुखी हैं ओर उपभोक्ता का हित ही हमारे लिये सर्वोपरि है।
संघर्ष समिति की ओर से प्रथम चरण की वार्ता में ऊर्जा मंत्री समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा विगत 06 अक्टूबर 2020 के उप्र सरकार/शासन एवं संघर्ष समिति के मध्य सम्पन्न वार्ता बैठक में बनी सहमतियों के क्रम में संघर्ष समिति ने प्रदेश भर में विभिन्न व्यवस्था सुधार गोष्ठियाँ सम्पन्न कराये। संघर्ष समिति के संयोजक इं0 शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि उपभोक्ता देवो भवः एवं ऊर्जा क्षेत्र में सुधार संघर्ष समिति का प्रथम ध्येय है। ऊर्जा हानियों को घटाये जाने हेतु पटियाला मॉडल को लागू किया जाना निगम हित में बेहतर होगा। इस क्रम में अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि बेहतर उपभोक्ता सेवा एवं लाइन हानियों को घटाकर अपेक्षित राजस्व वसूली का लक्ष्य प्राप्त किये जाने हेतु विभाग में मानव संसाधन नीतियों में व्यापक चिन्तन कर कार्य आवश्यकता है। इसके लिए दक्ष कर्मियों को तेेलंगाना की भांति नियमित किये जाने की मांग की गयी।
समिति ने यह भी कहा कि बिलिंग एवं कलेक्शन व्यवस्था दुरूस्त किये बिना, उपभोक्ताओं के बेहतर विद्युत आपूर्ति व्यवस्था किये बिना ऊर्जा क्षेत्र को सुदृढ़ किये जाने की परिकल्पना व्यवहारिक रूप से सम्भव नहीं है। संघर्ष समिति ने कहा कि इन दुर्व्यवस्थाओं को दूर किये जाने एवं भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाये जाने एवं सस्ती बिजली हर घर बिजली का लक्ष्य प्राप्ति हेतु मितव्ययी व्यवस्था मार्ग पर चलकर ऊर्जा निगमों का एकीकरण कर उप्र राज्य विद्युत परिषद लि का गठन किया जाये।
बैठक में सरकार, शासन एवं ऊर्जा प्रबन्धन की ओर से क्रमशः. श्रीकान्त शर्मा, ऊर्जा मंत्री, उप्र सरकार, अपर मुख्य सचिव(ऊर्जा) अरविन्द कुमार, प्रबन्ध निदेशक, उप्र पाकालि एम. देवराज, प्रबन्ध निदेशक, उत्पादन निगम सेन्थिल पांडियन सी, डी.के. सिंह आदि उपस्थित रहे, जबकि संघर्ष समिति की ओर से वी.पी. सिंह, पल्लब मुखर्जी, प्रभात सिंह, जी वी पटेल, जय प्रकाश, गिरीश पांडेय, सदरुद्दीन राना, सुहेल आबिद आदि पदाधिकारी उपस्थित रहे।







