लखनऊ, 20 नवंबर 2025: शहर के प्रतिष्ठित एक्सीलिया पब्लिक स्कूल में आज महान धावक पद्मश्री मिल्खा सिंह, जिन्हें दुनिया ‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से जानती है, का 96वां जन्मदिवस बड़े उत्साह, सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया गया। 20 नवंबर 1929 को तत्कालीन पंजाब के गोविंदपुरा (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे मिल्खा सिंह भारतीय खेल जगत के एक चमकते सितारे रहे, जिनकी जिंदगी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कार्यक्रम की शुरुआत विशेष प्रार्थना सभा से हुई। छात्रों ने मिल्खा सिंह के संघर्षपूर्ण जीवन, विभाजन की त्रासदी से उबरकर विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करने और ओलंपिक में 0.01 सेकंड से चूके पदक की कहानी को भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। कक्षा 9अ के छात्र हरजोत सिंह नंदा ने खुद को ‘मिल्खा सिंह’ के रूप में प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मीनू श्रीवास्तव ने मिल्खा सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा अपने संबोधन में कहा, “मिल्खा जी सिर्फ एक धावक नहीं थे, वे अनुशासन, देशभक्ति और कभी हार न मानने की जीती-जागती मिसाल थे। उनकी जिंदगी हमें सिखाती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है।” उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे मिल्खा सिंह के दिखाए मार्ग पर चलें और अपने सपनों को पंख दें।
एक्सीलिया स्कूल के लिए मिल्खा सिंह का जुड़ाव बेहद खास है। 16 दिसंबर 2018 को स्वयं ‘फ्लाइंग सिख’ यहां प dhरे थे। उनके पद-चिह्न आज भी विद्यालय परिसर में गर्व के साथ संरक्षित हैं। दीवारों पर लगी उनकी तस्वीरें और उस दिन की यादें हर किसी को प्रेरित करती हैं। खेल विभाग द्वारा तैयार की गई विशेष प्रस्तुति में मिल्खा सिंह के बचपन के संघर्ष, सेना में चयन, 1960 रोम ओलंपिक की ऐतिहासिक दौड़ और जीवन के अंतिम क्षणों तक देशसेवा की भावना को जीवंत रूप दिया गया।
कार्यक्रम का सबसे रोमांचक हिस्सा रहा ‘मिनी मिल्खा रन’। विभिन्न आयु वर्ग के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने ट्रैक पर दौड़ लगाकर मिल्खा सिंह के जज्बे को सलाम किया। खेल शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि “जैसा मिल्खा जी कहा करते थे – ‘दौड़ो, सिर्फ दौड़ो, पीछे मत देखो’, वही जीवन का मंत्र है।”
विद्यालय के निदेशक श्री अनंत श्रीवास्तव ने कहा, “हम हर साल मिल्खा जी का जन्मदिवस मनाते हैं ताकि नई पीढ़ी उनके त्याग और समर्पण को कभी न भूले। उनके पदचिह्न यहां हैं, उनकी प्रेरणा यहां है और उनका जोश हमारे बच्चों के दिलों में हमेशा दौड़ता रहेगा।”






