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    बांधवगढ़ के जंगल में शेर का सामना -part-1

    ShagunBy ShagunSeptember 1, 2025Updated:September 1, 2025 फेसबुक वॉल से No Comments5 Mins Read
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    बांधवगढ़ का रोमांच: अनुराग प्रकाश

    साल 2002 या शायद 2003 की बात है। उन दिनों मेरी दुनिया डिस्कवरी और नेशनल ज्योग्राफिक चैनल तक सिमटी थी। बांधवगढ़ की मशहूर बाघिन सीता और उसके जोड़ीदार चार्जर की कहानियाँ बार-बार टीवी पर आतीं, और हर बार मेरे मन में एक ही सपना जागता, बांधवगढ़ के जंगल में उन बाघों को अपनी आँखों से देखना। उस वक्त न फेसबुक था, न इंस्टाग्राम, फिर भी मैंने किताबों, दोस्तों की बातों, और अपने जुनून के दम पर जानकारी जुटाई और लखनऊ से कटनी का रेल टिकट बुक कर लिया।

    कटनी से बांधवगढ़: अनजान राहों का रोमांच

    कटनी से बांधवगढ़ तक 80 किलोमीटर का रास्ता बस से तय करना था। टूटी-फूटी सड़कें, चारों ओर सन्नाटा, और जंगल की रहस्यमयी हवा ने मन में रोमांच के साथ-साथ हल्का डर भी जगा दिया। बस में बैठे एक स्थानीय से मैंने पूछा, “बांधवगढ़ में कुछ खाने-पीने की जगह मिलेगी न?” उसने हँसते हुए जवाब दिया, “चिंता मत करो, सब मिलेगा। बस जंगल का मजा लेने को तैयार रहो!”

    बाघों की दुनिया में एक अनोखी सैर

    बांधवगढ़ पहुँचते ही छोटा-सा कस्बा जीवंत लगा। दुकानें, छोटे होटल, और जंगल की सैर के लिए उत्साहित पर्यटकों की भीड़। मैंने एक कैंप में दो दिन के लिए कमरा लिया और दो जंगल सफारी बुक कर लीं। अब बस इंतजार था उस पल का, जब मैं जंगल की दुनिया में कदम रखूंगा।

    पहली सफारी: बाघों का जादू

    जंगल के गेट पर जिप्सियों की कतार और विदेशी पर्यटकों की चहल-पहल ने मेरे उत्साह को दोगुना कर दिया। जंगल में घुसते ही हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट, और मिट्टी की सौंधी खुशबू ने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया। दस मिनट बाद ही गाइड ने जिप्सी रोक दी।

    बांस के झुरमुट में दो बाघ के बच्चे बैठे थे, उनकी आँखें सूरज की रोशनी में चमक रही थीं। मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गईं। गाइड ने कहा, “ये पानी पीने आएंगे, रुकते हैं।” लेकिन मेरा मन तो जंगल के हर कोने को देखने को बेताब था। मैंने कहा, “मैं सिर्फ बाघ ही नहीं, बांधवगढ़ का हर नजारा जीना चाहता हूँ!” गाइड ने मुस्कुराकर जिप्सी आगे बढ़ा दी। थोड़ा आगे एक बाघिन हमारी जिप्सी के साथ-साथ चली। उसकी शाही चाल और आत्मविश्वास भरी नजरें देख मेरी साँसें थम गईं। वो करीब एक किलोमीटर तक हमारे साथ चली, फिर रास्ता क्रॉस कर जंगल में गायब हो गई। उस दिन हमें तीन बाघ दिखे, और जंगल की खूबसूरती ने मेरे मन को पूरी तरह जीत लिया। शाम को कैंप लौटकर मैंने डिनर किया और जल्दी सो गया, ताकि सुबह की सफारी के लिए तरोताजा रहूँ।

    सुबह की सफारी: कोहरे में बाघों का राज

    सुबह की ठंडी हवा और कोहरे की चादर ने जंगल को और रहस्यमयी बना दिया था। सूरज की पहली किरणें पेड़ों से छनकर जमीन पर बिखर रही थीं। जिप्सी जंगल में दाखिल हुई, और मैं हर आवाज, हर हलचल पर नजर रखे हुए था। अचानक गाइड ने जिप्सी रोक दी। एक तालाब के किनारे, कोहरे के बीच, एक बाघ पानी पी रहा था। गाइड ने फुसफुसाते हुए बताया, “ये मोहन है, सीता का बेटा।” उसकी पीली-काली धारियाँ और शांत मुद्रा ने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया। मोहन ने एक नजर हमारी ओर देखा, फिर धीरे-धीरे जंगल में गायब हो गया। थोड़ा आगे बढ़े, तो एक और बाघ, बंसी, सामने आया। उसकी चाल में एक अलग ही रौब था। गाइड ने बताया कि बंसी और मोहन भाई हैं, और दोनों जंगल के उभरते सितारे हैं। बंसी ने हमें एक ठंडी नजर दी और अपनी राह पर चल दिया। उस पल में जंगल की असली ताकत का अहसास हुआ—यहाँ बाघ ही राजा है।

    बांधवगढ़ का नया किस्सा: गुप्त तालाब की कहानी

    सफारी के बीच गाइड ने एक और रोमांचक कहानी सुनाई। बांधवगढ़ में एक गुप्त तालाब है, जिसे सिर्फ कुछ पुराने गाइड और स्थानीय लोग जानते हैं। कहा जाता है कि ये तालाब जंगल के सबसे शांत कोने में है, और वहाँ रात में बाघों की सभा होती है। एक बार एक गाइड ने रात की गश्त के दौरान तालाब के पास कई बाघों को एक साथ देखा। उनकी आँखें अंधेरे में चमक रही थीं, और वो बिना किसी शोर के तालाब के चारों ओर बैठे थे, मानो कोई गुप्त बैठक हो। स्थानीय लोग इसे “बाघों की पंचायत” कहते हैं और मानते हैं कि तालाब के पास कोई प्राचीन शक्ति है, जो बाघों को वहाँ खींचती है।

    गाइड ने हँसते हुए कहा, “हम तो इसे जंगल का जादू मानते हैं, लेकिन सैलानी इसे सुनकर रात में जंगल की सैर करने की जिद करने लगते हैं!” इस कहानी ने बांधवगढ़ के रहस्य को और गहरा कर दिया।यादें जो अमर हैं

    दोनों सफारियों ने मेरे मन में बांधवगढ़ की एक ऐसी तस्वीर उकेर दी, जो आज भी ताजा है। बाघों की शान, जंगल की हरियाली, और रहस्यमयी कहानियाँ, ये सब मेरे जीवन का हिस्सा बन गए। बांधवगढ़ सिर्फ एक जंगल नहीं, बल्कि प्रकृति का एक ऐसा मंदिर है, जहाँ हर कदम पर रोमांच और सुकून एक साथ मिलते हैं।

    Shagun

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