युवा बदल सकते हैं देश की तकदीर

0
433
farming

सूरज सिंह

वर्तमान समय में चल रहे कुछ ज्वलंत मुद्दों जैसे कि कश्मीर विवाद, किसान आंदोलन, आरक्षण, महंगाई तथा भ्रष्टाचार आदि पर अब संवेदनशील वार्ताओं का होना जरूरी है। कुछ वर्षों से किसानों को मानसून धोखा देता आया है, जिससे उत्पादन गिरा है । अगर विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट पर नजर डालें तो हम उसमें भी निचले पायदान पर पहुंच चुके हैं। हाल ही में मन्दसौर, तमिलनाडु, बुन्देलखंड और महाराष्ट्र आदि जगहों पर किसान आंदोलन चल रहे हैं। जो लोग देश का पेट भरते हैं उन्ही के हाथ खाली हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि सरकार ने कुछ नहीं किया सरकार बहुत सारे काम किये हैं, लेकिन वो अभी प्रभावी नहीं हुए है । कृषि घाटे का सौदा तभी से बनी जब भारत में इंदिरा जी के कार्यकाल में हरित क्रांति लागू हुई। इससे त्वरित फायदे तो हुए, लेकिन दूरगामी परिणाम बहुत भयानक साबित हुए। चूँकि हरित क्रांति में केवल गेहूं और चावल शामिल था, इसी वजह से मक्का, बाजरा, दलहन ये सब छूट गया और हम सब जानते है कि ग्रामीण आबादी में इन तीनों का कितना महत्व है।

हरित क्रांति के दूरगामी नकारात्मक परिणाम

हरित क्रांति से देश में फ़र्टिलाइज़र और कीटनाशकों का बहुत उपयोग हुआ, हाइब्रिड बीजों के दाम महंगे हुए और इन बीजों को अधिक पानी की जरूरत थी । अब अगर विचार करें तो कृषि कैसे घाटे का सौदा हुआ हमें ज्ञात हो जाता है । मिट्टी की नमी खत्म होने लगी, उर्वरक क्षमता नष्ट होने लगी। कृषि उपकरण महंगे हुए क्योंकि इनकी मांग ज्यादा हो गई। इन सबके बाद वर्तमान सरकार ने फसल बीमा, मिट्टी का परीक्षण आदि कामों को शुरू किया है, जिनके परिणाम अभी बाकी हैं। ये सारे प्रयास वर्तमान स्थिति को देखते हुए अपर्याप्त है। सभी किसान सब्सिडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग कर रहे हैं जो कि जायज हैं। क्योंकि किसान जब मन से फसल उगाता है और उसे मनमुताबिक दाम नहीं मिलते तो वह परेशान होता है।

युवाओं से बदलेगा देश

हमें वर्तमान समय में अब जिमेदारी का केंद्र बदलना होगा । युवाओं को आगे आकर कुछ करना पड़ेगा । हम कुछ पैसे के लालच में यूकेलिप्टस लगा रहे हैं,  इसे बंद करना पड़ेगा । घरों में बेवजह पानी के दुरुपयोग को रोकना होगा। सरकार को उनके किये वादे याद दिलाने होंगे। हमें जातिवाद, सम्प्रदायवाद को अलग रखकर चुनाव करना होगा, जो सरकार किसानों से किए गए वादे पूरा करे उसे लाना होगा । हमें खुद से जागरूक होना पड़ेगा । इस देश का युवा आज प्रण कर लें कि लचर व्यवस्था को बदलना है तो सरकारें कल अपना काम करने लगेंगी। हम स्वयं जिम्मेदार हैं इन परेशानियों के लिए। हमें दृढ़संकल्प लेना होगा कि हमें जब तक रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, सुरक्षा नहीं मिलेगी हम शांत नहीं होंगे, लेकिन इन सबके लिए हमें एक और महत्वपूर्ण संकल्प लेना होगा कि एक जिम्मेदार नागरिक के सारे कर्तव्य निभाएंगे। हम देश के लिए वो सब करेंगे जितना हमारी सामर्थ्य होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here