बेबी की केयरिंग में पेरेंट्स को लगना ही पड़ेगा, तभी बच्चे प्यार बरसाएंगें आप पर

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फोटो: सोशल मीडिया से साभार

पहली बार माता-पिता बनने वाले जोड़ों के लिए अपने नवजात शिशु के साथ शुरूआती कुछ महीने काफी अस्त-व्यस्त हो सकते हैं। आपको नवजात शिशु की देखभाल के बारे में हर तरह की सलाह मिलेगी और उनमें से कुछ एक दूसरे के विपरीत भी होंगी। नवजात शिशु की देखभाल के संबंध में किस सलाह को मानना चाहिए यह तय करना दुविधापूर्ण हो सकता है। नवजात शिशु की देखभाल करना थका देने वाला और चुनौतीपूर्ण अनुभव होता है।

लेकिन यह आपके जीवन के सबसे अद्भुत और अतुलनीय अनुभवों में से एक भी होता है। नवजात शिशु की देखभाल के लिए सुझाव नवजात शिशु की देखभाल करना साफ तौर पर एक चुनौती है खास तौर पर जब यह आपके साथ पहली बार होता है। अतः यहाँ दस तरीके दिए गए हैं जो आपको नवजात शिशु की देखभाल करने में सहायता करेंगे।

साभार: गूगल

महत्वपूर्ण सुझाव –

  • स्तनपान बच्चे को समय पर स्तनपान करवाना बहुत जरूरी है। एक नवजात शिशु को हर 2 से 3 घंटे में स्तनपान करवाया जाना चाहिए। जिसका मतलब है कि आपको 24 घंटों में उसे 8.12 बार स्तनपान कराने की आवश्यकता होती है।
  • शिशु को जन्म के बाद पहले 6 महीनों तक केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए। माँ के दूध में महत्वपूर्ण पोषक तत्व और एंटीबॉडी होते हैं जो बच्चे के स्वस्थ रहने और विकास के लिए आवश्यक होते हैं। शिशु को कम से कम 10 मिनट के लिए स्तनपान कराएं। अपने बच्चे के होठों के पास स्तन को तब तक रखें जब तक वह मजबूती से पकड़ कर चूसने न लगे। यदि शिशु सही ढंग से स्तन को मुँह में लेता है। तो माँ को उसके निपल्स में कोई दर्द नहीं होगा। शिशु को दूध पिलाने के बाद स्तन कम भरा हुआ महसूस होना चाहिए। यह एक संकेत है कि शिशु को पर्याप्त दूध मिल रहा है। यदि स्तन का दूध शिशु को नहीं दिया जा सकता। तो शिशु को डॉक्टर द्वारा सुझाया गया फर्मूला दूध दें। बच्चे को हर बार दूध पिलाए जाते समय 60 से 90 मिण्ली फर्मूला दूध मिलना चाहिए।
  • डकार दिलाना शिशु को दूध पिलाने के बाद उसे डकार दिलाना जरूरी होता है। शिशु दध पीते समय हवा निगल लेते हैं। जिससे उनके पेट में गैस हो जाती है और यह पेट के दर्द का कारण बनता है। डकार दिलाने से यह अतिरिक्त हवा को बाहर निकालता है। इस प्रकार पाचन में सहायता करता है और दूध उलटने और पेट के दर्द को भी रोकता है। शिशु को धीरे से एक हाथ से अपने सीने से लगा लें। उसकी ठोड़ी आपके कंधे पर टिकी होनी चाहिए। अपने दूसरे हाथ से उसकी पीठ को बहुत धीरे से थपथपाएं जब तक वह डकार ना ले।
  • अपने नवजात शिशु को कैसे पकड़े यह सुनिश्चित करना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे के सिर और गर्दन को एक हाथ से सहारा देते हुए उसे पकड़ रहे हैं। इसका कारण यह है कि उसकी गर्दन की मांसपेशियां अभी तक स्वतंत्र रूप से सिर को संभालने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं हैं। रीढ़ की हड्डी अभी भी बढ़ रही है और मजबूत हो रही है। शिशु की गर्दन केवल 3 महीने की उम्र के बाद अपने दम पर सिर का संभालने में सक्षम होगी। इसलिए नवजात शिशु की देखभाल करते समय उसके सिर और गर्दन को सहारा देने पर ध्यान दें।

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