अंशुमाली रस्तोगी
हालांकि मैंने कई दफा अंतरराष्ट्रीय व्यंग्यकार होने की कोशिश की पर सफल न हो सका। इसे आप मेरे लेखन का दोष कह लीजिए या किस्मत का; खुदा जाने। लेकिन मुझे इस बात की तसल्ली है कि मेरे शहर में एक अंतरराष्ट्रीय शायर हैं। उनका अंतरराष्ट्रीय होना बताता है कि मेरा शहर प्रसिद्धि की किस पांत में खड़ा है।
यह सच है कि मेरी उनसे कभी मुलाकात नहीं हुई पर मैं चाहता अवश्य हूं एक दफा उनसे मिलकर उनके अंतरराष्ट्रीय हाथों को चूमना। ताकि उसका कुछ असर मेरे लेखकीय कद पर भी पड़ सके।
इन दिनों उन पर एक डॉक्यूमेंट्री बन रही है। मगर मुझे अभी इस बात का पता नहीं चल पाया कि डॉक्यूमेंट्री उन पर बन रही है या उनके रचना-कर्म पर! क्योंकि अखबारों में छपने वाली तस्वीरों में फोकस उन पर ही अधिक रहता है।
जो हो पर यह न केवल मेरे शहर बल्कि समूचे विश्व का सौभाग्य ही होगा कि उसे एक अंतरराष्ट्रीय शायर की डॉक्यूमेंट्री से रूबरू होने का मौका मिलेगा। बहरहाल, मुझे अभी बहुत मेहनत करनी होगी खुद को अंतरराष्ट्रीय व्यंग्यकार बनाने में।







