Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, April 17
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»धर्म»Spirituality

    देवि पूज पद कमल तुम्हारे

    ShagunBy ShagunApril 5, 2022 Spirituality No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 833

    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    भारत के ऋषियों ने प्रकृति में भव्यता का प्रत्यक्ष अनुभव किया। उसे भव्य मानते हुए प्रणाम किया। चरक संहिता में कहा गया
    यथा ब्रह्माण्डे तथा पिण्डे’ अर्थात जो इस ब्रह्माण्ड में है वही सब हमारे शरीर में भी है। भौतिक संसार पंचमहाभूतों से बना है-आकाश, वायु, अग्नि,जल और पृथ्वी। उसी प्रकार हमारा हमारा यह शरीर भी इन्हीं पाँचों महाभूतों से बना हुआ है। इस प्रकार ब्रह्माण्ड और शरीर में समानता है। स्थूल व सूक्ष्म की दृष्टि से ही अंतर है। प्रकृति तथा पुरुष में समानता है। चरक संहिता में यह भी कहा गया कि-

    यावन्तो  हि  लोके  मूर्तिमन्तो  भावविशेषा:।
    तावन्त: पुरुषे यावन्त: पुरुषे तावन्तो लोके॥

    अर्थात ब्रह्माण्ड में चेतनता है। मनुष्य भी चेतन है। पंचमहाभूतों के सभी गुण मनुष्य में हैं। प्रकृति में सन्धिकाल का विशेष महत्व है। वर्ष और दिवस में दो संधिकाल महत्वपूर्ण होते है। दिवस में सूर्योदय व सूर्यास्त के समय संधिकाल कहा जाता है। सूर्योदय के समय अंधकार विलीन होने लगता है,उसके स्थान प्रकाश आता है। सूर्यास्त के समय इसकी विपरीत स्थिति होती है। भारतीय चिंतन में इस संधिकाल में उपासना करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त वर्ष में दो संधिकाल होते है। इसमें मौसम का बदलाव होता है। ऋतु के समय संयम से स्वास्थ भी ठीक रहता है। नवरात्र आराधना भी वर्ष में दो बार इन्हीं संधिकाल में आयोजित होती है।

    यह शक्ति आराधना का पर्व है। इसी के अनुरूप संयम नियम की भी आवश्यकता होती है। पूरे देश में इक्यावन शक्तिपीठ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते है। मां दुर्गा का प्रथम रूप है शैल पुत्री। पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म होने से इन्हें शैल पुत्री कहा जाता है। नवरात्रि की प्रथम तिथि को शैलपुत्री की पूजा की जाती है। ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। इनकी उपासना से तप,त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की भावना जागृत होती है।

    मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है। इनकी आराधना तृतीया को की जाती है। चतुर्थी के दिन मांं कुष्मांडा की आराधना की जाती है। नवरात्रि का पांचवां दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। मां का छठवां रूप कात्यायनी है। छठे दिन इनकी पूजा।अर्चना की जाती है। नवरात्रि की सप्तमी के दिन मांं काली रात्रि की आराधना का विधान है। देवी का आठवांं रूप मांं गौरी है। इनका अष्टमी के दिन पूजन का विधान है।

    मां सिद्धिदात्री की आराधना नवरात्रि की नवमी के दिन किया जाता है। माँ जगदम्बा जो स्वयं वाणीरूपा है। वही वाणी, बुद्धि, विद्या प्रदायिनी भी है। देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला है। देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। माता ब्रह्मचारिणी की पूजा और साधना करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है। ऐसा भक्त इसलिए करते हैं ताकि मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से उनका जीवन सफल हो सके और अपने सामने आने वाली किसी भी प्रकार की बाधा का सामना आसानी से कर सकें। आज नवरात्र का दूसरा दिन है। नवरात्र के दूसरे दिन माता के ब्रह्मचारिणी स्वरुप की पूजा की जाती है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी।

    ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है। यह देवी शांत और निमग्न होकर तप में लीन हैं। मुख पर कठोर तपस्या के कारण तेज और कांति का ऐसा अनूठा संगम है जो तीनों लोको को उजागर कर रहा है। यह स्वरूप श्वेत वस्त्र पहने दाहिने हाथ में जप की माला एवं बायें हाथ में कमंडल लिए हुए सुशोभित है। ब्रह्मचारिणी देवी के कई अन्य नाम हैं जैसे तपश्चारिणी,अपर्णा और उमा। कहा जाता है कि देवी ब्रह्मचारिणी अपने पूर्व जन्म में राजा हिमालय के घर पार्वती स्वरूप में थीं। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोप तपस्या की थी। कठोर तप के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। मां जगदम्बे की भक्ति के लिए मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र का नवरात्रि में द्वितीय दिन इसका जाप करना चाहिए-

    या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

    अर्थात- सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे,आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ।  मां दुर्गा की तीसरी शक्ति मां चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध हैं। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अद्र्धचंद्रमा सुशोभित है। स्वर्ण के समान इनका दमकता हुआ तेजोमय स्वरूप है। इनके दस हाथ हैं,जिनमें अस्त्र-शस्त्र लिए हुए मां सिंह पर आरूढ़ हैं। मां राक्षसों के विनाश के लिए युद्ध में प्रस्थान करने को उद्यत हैं। मान्यता है कि इनके घंटे की ध्वनि सुनकर दैत्य, राक्षस आदि भाग जाते हैं।.मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान आत्मिक रूप से सशक्त बनाता है। नकारात्मक ऊर्जा का निराकरण होता है। सकारात्मक भाव व सद्गुणों का विकास होता है-

    पिंडज प्रवरारूढ़ा चंडकोपास्त्रकैर्युता।
    प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता।। 
    ‘या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नसस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

    Shagun

    Keep Reading

    Relationships are nature's gifts

    रिश्ते उपहार हैं प्रकृति का, सब धर्मों में रिश्ते और उनके कर्तव्यों को रखा गया है सर्वोपरि

    दुःख आता है, लेकिन रुकना जरूरी नहीं

    The 'Big Bull's' Final Lesson: To truly understand life, one must visit three specific places?

    बिग बुल की अंतिम सीख : जीवन को सही से समझना हो तो तीन जगह जाना चाहिए ?

    Silence in the Face of Provocation Is the True Victory: Osho's Profound Message

    उकसावे पर चुप्पी ही असली जीत: ओशो का गहरा संदेश

    The Relevance of Lord Hanuman and His Character in the Contemporary Scenario

    वर्तमान परिदृश्य में हनुमान जी और उनके चरित की प्रासंगिकता

    गौतम बुद्ध की तीन अमर शिक्षाएं जो आपकी जिंदगी बदल सकती हैं

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Deputy Chief Minister Keshav Prasad Maurya holds 'Janata Darshan' in Prayagraj; issues directives for the swift resolution of public grievances.

    उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में किया जनता दर्शन, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के दिए निर्देश

    April 17, 2026
    Rumors of Failure Become a Fatal Trap: Student Consumes Poison Despite Scoring 78%

    फेल की अफवाह बनी मौत का जाल: 78% अंक पाकर भी छात्रा ने खा लिया जहर

    April 17, 2026
    Trump's Pakistan Plan! US Blockade on Iran; Tehran Threatens to 'Sink' the US

    ट्रंप का पाकिस्तान प्लान! ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी, तेहरान ने दी ‘डुबो देंगे’ की धमकी

    April 17, 2026
    Nepal has proven it: If the intent is pure, the system can change overnight!

    नेपाल ने साबित कर दिया: नीयत साफ़ हो तो सिस्टम रातोंरात बदल सकता है!

    April 17, 2026
    Relationships are nature's gifts

    रिश्ते उपहार हैं प्रकृति का, सब धर्मों में रिश्ते और उनके कर्तव्यों को रखा गया है सर्वोपरि

    April 17, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading