पप्पू कुमार यादव की पहल से 40-45 गांवों के हजारों लोगों को मिली राहत, कहा 40 किमी की दूरी घटी
सहरसा, 2 जुलाई: बिहार के सहरसा जिले में एक अनोखी मिसाल पेश की गई है, जहां स्थानीय निवासी पप्पू कुमार यादव ने सरकार की अनदेखी के बाद खुद ही नदी पर बांस का पुल बनाकर लोगों की जिंदगी आसान कर दी। इस पहल से न केवल 40-45 गांवों के हजारों लोगों को आवागमन में सुविधा मिली, बल्कि शहर तक की 40 किलोमीटर की दूरी भी कम हो गई।
पप्पू और स्थानीय लोगों ने मिलकर निकाला समस्या का हल
सहरसा के बलुआहा क्षेत्र में कोसी नदी की सहायक धारा पर कोई स्थायी पुल न होने के कारण स्थानीय लोग दशकों से परेशान थे। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर नाव ही एकमात्र सहारा थी, लेकिन कम पानी में नावें भी ठीक से नहीं चल पाती थीं। सरकार से बार-बार मांग के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं मिला। ऐसे में, पप्पू कुमार यादव ने स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर खुद ही इस समस्या का हल निकालने का फैसला किया। 12 लाख की लागत, 3800 बांस से बना पुल पप्पू कुमार यादव ने अपनी जमा-पूंजी और स्थानीय लोगों के सहयोग से 12 लाख रुपये खर्च कर 3800 बांस खरीदे और मात्र एक महीने में कोसी नदी की सहायक धारा पर एक चचरी (बांस) पुल का निर्माण कर डाला।
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यह पुल क्षेत्र के 40-45 गांवों को शहर से जोड़ता है, जिससे लोगों को अब 100 किलोमीटर की जगह केवल 60 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। इस पुल ने न केवल समय और पैसे की बचत की, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच को भी आसान बनाया।
बिहार के लाल पप्पू यादव की उपलब्धि
- नाम – पप्पू कुमार यादव ने कर दिखाया माउंटेन मैन का कारनामा
- क्या काम किया – 3800 बाँस की मदद से नदी पर पुल तैयार कर करना
- क्या लाभ मिला – 40 KM. दूरी कम हो गई, 40 रुपये लगते हैं पुल क्रॉस करने में ( एक वीडियो में स्थानीय बाइक से जाते हुए युवक ने कहा)
- कितना खर्च आया- लगभग 12 लाख रुपये
रखरखाव और मरम्मत के लिए 10 रुपये शुल्क लिया जाता है
स्थानीय निवासी सनोज कुमार यादव ने बताया कि इस पुल से आवागमन के लिए पैदल यात्रियों से रखरखाव के लिए 10 रुपये शुल्क लिया जाता है। यह राशि पुल के रखरखाव और मरम्मत में खर्च की जाती है। लोगों का कहना है कि यह पुल उनके लिए वरदान साबित हुआ है, क्योंकि बरसात में नाव का खर्च और जोखिम अब कम हो गया है। हालांकि, यह बांस का पुल अस्थायी है और बाढ़ के दौरान टूटने का खतरा बना रहता है।
सोशल मीडिया पर तारीफ: X पर इस खबर ने खूब सुर्खियां बटोरीं
यूजर्स ने पप्पू कुमार यादव को “धरती का जाग्रत देवता” तक कहकर उनकी सराहना की। @AnilYadavmedia1 ने लिखा, “यादव सत्ता के भरोसे नहीं रहता, खुद ही बांस कर देता है।”
@TweetByLokesh ने उनकी पहल को सरकार की नाकामी के सामने एक मिसाल बताया। कई यूजर्स ने इसे सामुदायिक एकजुटता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक करार दिया।
बाढ़ के मौसम में बांस के पुल बहने का खतरा
हालांकि यह पुल स्थानीय लोगों के लिए राहत लेकर आया है, लेकिन यह अस्थायी समाधान है। बाढ़ के मौसम में बांस के पुल बहने का खतरा रहता है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस घाट पर एक स्थायी पीपा पुल या कंक्रीट पुल की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोसी नदी की प्रकृति के कारण स्थायी निर्माण चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
पप्पू कुमार यादव की यह पहल न केवल उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सामुदायिक सहयोग से बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए राहत का रास्ता खोला, बल्कि सरकार को भी यह सोचने पर मजबूर किया कि बुनियादी सुविधाओं के लिए जनता को कब तक इंतजार करना पड़ेगा। पप्पू यादव की यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो बदलाव लाने का जज्बा रखता है।






