हल्द्वानी, 14 जून : उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में 15 जून 2025 को बाबा नीब करौरी महाराज के 61वें स्थापना दिवस (प्रतिष्ठा दिवस) पर भव्य मेले का आयोजन होने जा रहा है। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन ने मेले की तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी हैं।
मालपुए का प्रसाद बनना शुरू:
बाबा नीब करौरी महाराज को मालपुआ बेहद प्रिय था, इसलिए इस दिन प्रसाद के रूप में मालपुए वितरित किए जाते हैं। इस बार मथुरा के कारीगर 5 लाख मालपुओं का प्रसाद तैयार कर रहे हैं, जो 15 जून से 17 जून तक श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा। मंदिर समिति ने बताया कि सुबह 5 बजे बाबा को भोग लगाने के बाद प्रसाद वितरण शुरू होगा।
प्रशासन ने कसी कमर:
मेले में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने यातायात और सुरक्षा के लिए फुलप्रूफ प्लान बनाया है। हल्द्वानी से कैंची धाम तक शटल सेवा शुरू की जाएगी, जिसमें 100 वाहनों का इंतजाम किया गया है। दोपहिया वाहनों को धाम तक जाने की अनुमति नहीं होगी। गौलापार स्टेडियम में बाहरी राज्यों के वाहनों की पार्किंग व्यवस्था होगी, और भीमताल, भवाली, ज्योलिकोट में पार्किंग भरने पर वाहनों को ऊधम सिंह नगर सीमा से वापस भेजा जा सकता है। 1200 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
श्रद्धालुओं का उत्साह:
कैंची धाम में अखंड हनुमान चालीसा पाठ शुरू हो चुका है, जो 15 जून तक सुबह-शाम चलेगा। भक्तों में उत्साह है, और सोशल मीडिया पर लोग अपनी यात्रा की योजना साझा कर रहे हैं। एक पोस्ट में कहा गया, “कौन-कौन आ रहा है 15 जून को कैंची धाम?” मौसम को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं को छाता या रेनकोट साथ लाने की सलाह दी गई है।
आस्था का केंद्र कैंची धाम:
1964 में बाबा नीब करौरी महाराज द्वारा स्थापित कैंची धाम को हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त माना जाता है। मान्यता है कि यहां कोई खाली हाथ नहीं लौटता। स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग जैसी हस्तियां भी यहां दर्शन कर चुकी हैं। इस साल मेले में भजन-कीर्तन, भंडारा और पूजा-अर्चना के आयोजन होंगे।
कैसे पहुंचें:
कैंची धाम नैनीताल से 17 किमी और काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 38 किमी दूर है। दिल्ली से ट्रेन, सड़क, या हवाई मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। बता दें कि यह मेला बाबा नीब करौरी महाराज की भक्ति और चमत्कारों का प्रतीक है, जहां श्रद्धालु आस्था और शांति की अनुभूति के लिए उमड़ेंगे।







