जब चिड़ियाँ बांज के साथ लड़ सकती है तो हम तो इंसान हैं

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यादें विजय दिवस की: 16 दिसंबर 1971

दोस्तो, आपने अपने जीवन में ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह जी का नाम तो सुना ही होगा। अगर नहीं सुना तो बॉर्डर फिल्म में अभिनेता सनी देओल को ज़रूर देखा होगा। आपको बता दूं कि सनी देओल ने जिस महान फौजी का किरदार निभाया था वे ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चाँदीपुरी जी ही थे।

इनके साहस और शौर्य के बारे में जितना बखान किया जाए, कम है। भारतीय फौज के इस सिख शूरवीर ने देश की लोंगेवाला सरहद की हिफाज़त उस समय की, जब फौज ने इन्हे ‘कम बैक’ (एक रात के लिए पीछे ठहरना) का हुक्म दिया था। लेकिन इस बहादुर ने उस रात पीछे ना हटते हुए दुश्मन की एक पूरी बटालियन के आगे इस सिंह ने अपने 120 जवानों के साथ ऐसी दीवार खड़ी कर दी कि दुश्मन सरहद पार ना कर सका। युद्ध भूमि में उस रात इस सिंह ने मौत को महज़ 120 जवानों के साथ घेरा भी और उसे खदेड़ा भी।

दरअसल भारतीय सीक्रेट एजेंसी ने इन्हे बताया था कि आज की रात दुश्मन यहां से अपनी बटालियन और टैंको की भारी तादात के साथ आएगा, इसलिए आज रात आप पीछे हट जाए। भारतीय हवाई फौज कल सारा हिसाब चुकता कर लेगी। लेकिन ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चाँदीपुरी तो पीछे हटना जानते ही नहीं थे।

लड़ाई जीती जाती है दुश्मन को खत्म करके:

जहां उस समय दुश्मन अपनी पूरी तैयारी के साथ मैदान पर उतरा था तो वहीं इनके पास हथियारों के नाम पर कुछ एंटी टैंक माइन्स और एलएमजी, एचएमजी राइफल्स थी। लेकिन दुश्मन की भारी तादात देखकर ये डरे नहीं और अपने तेज दिमाग से ऐसा उपाय निकाला कि दुश्मन उस रात भारतीय सरहद के अंदर आ ही नही सका।

चिड़ियों से मैं बाज तुड़ाऊ,
तबे गोबिंद सिंह नाम कहाऊं।।

ब्रिगेडियर सिंह जानते थे कि अगर आज की रात दुश्मन भारत में घुस गया तो मुश्किल बढ़ जाएगी, इसलिए इन्होने पाक टैंको के रास्ते में 3 से 4 एंटी टैंक माइन्स को लगा दिया और माइन्स के साथ ही कई कंटीले तार बिछा दिए। ये इसलिए ताकि दुश्मन इतनी सारी माइंस के डर से सोच मे डूबा रहे।

मुक़ाबले की रात जैसे ही पाकिस्तानी टैंक भारतीय सरहद में घुसे तो असली माइन्स से उनके दो टैंक तबाह हो गए। पाकिस्तानी भारतीय फौजियों के निशाने पे थे इसलिए धमाकों के साथ ही मेजर सिंह के जवानों ने डीजल टैंक को निशाना बनाया और दुश्मन के 12 से 13 टैंक राख कर दिए। जब दुश्मन ने सरहद की ज़मीन देखी तो वे कंटीले तारों को देख सोच मे पड़ गए। उन्हे लगा कि शायद यहां कोई बारूदी सुरंग है। इसलिए उन्होंने अपने बाकी टैंक को ही रोक दिया। भारतीय हवाई अड्डे को तबाह करने आए दुश्मनों के टैंको को ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह जी के तेज दिमाग ने रोक लिया।

इधर पाकिस्तानियों ने बारूदी सुरंगों का पता करने के लिए अपने इंटेलिजेंस ब्यूरो से एक दस्ता मंगवाया जो कि रात 2 से ढाई बजे तक सिर्फ कुलदीप सिंह के प्लान में ही उलझा रहा।

इसके बाद क्या था, जैसे ही ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह के बिछे जाल में पाकिस्तानी फंसे, उन्होंने अपनी बंदूकों के मुंह खोल दिए। उस रात लोंगेवाला की धरती मे ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह अपने 120 जवानों के साथ ऐसा दहाड़ा कि दुश्मन भागने पर मजबूर हो गए।

आंकड़ों के मुताबिक लोंगेवाला की इस जंग में भारत की जानिब से सिर्फ 2 फौजी शहीद हुए जबकि पाकिस्तान ने अपने 200 फौजियों के साथ 36 से ज़्यादा टैंक गवाए। 7 दिसंबर को भारतीय हवाई फौज के हमले ने बचे हुए दुश्मनों को वापस खदेड़ा और जंग को खत्म किया।

इस जंग के हीरो रहे पंजाब रेजिमेन्ट की 23वीं बटालियन के सिख शेर ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह, जिनको भारतीय सरकार ने बाद में सम्मानित करते हुए महावीर चक्र से भी नवाजा।

1971 में लोंगेवाला की लड़ाई के हीरो महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी ने शनिवार 17 नवम्बर 2018 की सुबह नौ बजे माेहाली के फोर्टिस हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। 78 साल के ब्रिगेडियर चांदपुरी ब्लड कैंसर से पीड़ित थे।
बता दें कि ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह का जन्म 22 नवंबर, 1940 को एक गुर्जर सिख परिवार में हुआ था।

इस सिख शेर की हिम्मत, साहस और कौशल से बॉलीवुड निर्देशक जे.पी. दत्ता इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने भारत पाक के लोंगेवाला योद्धा को लेकर ‘बॉर्डर’ नाम की फिल्म भी बनाई, जिसमे सनी देयोल ने मुख्य भूमिका निभाकर उनके दमदार कैरेक्टर को जीवित कर दिया था। आज ये योद्धा भले ही हमारे बीच नहीं है लेकिन इनका साहस आज भी युवाओं को प्रेरणा देता है। प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

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