भारत, अमेरिका और जापान का साझा नौसैनिक अभ्यास शुरू, चीन की नीद उड़ी

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नई दिल्ली। सिक्किम में भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनातनी के दौरान दूसरा भारत, अमेरिका और जापान का संयुक्त मालाबार युद्ध अभ्यास शुरू हो गया। ये नौसैनिक अभ्यास बंगाल की खाड़ी में 10 जुलाई से 17 जुलाई, 2017 तक चलेगा। इस मौके पर तीनों नौसेना के टॉप कमांडर मौजूद रहे। अमेरिकी नौसेना के रियर एडमिरल विलियम बर्न ने साफ किया कि चीन के लिए भी साफ सन्देश है कि समंदर में किसी की दादागिरी नहीं चल सकती। बंगाल की खाड़ी में हो रहे इस सालाना अभ्यास में बड़ी संख्या में तीनों देशों के विमान, नौसेना की परमाणु पनडुब्बियां और जंगी जहाज हिस्सा ले रहे हैं।
नौसेना की पूर्वी कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल हरीश चंद्र बिष्ट ने इस युद्ध अभ्यास में शामिल युद्धपोतों की जानकारी दी। इस बार युद्धाभ्यास में अमेरिका के सात युद्धपोत, जिसमें एक विमान वाहक युद्धपोत यूएसएस निमिट्ज और एक सबमरीन शामिल है। जबकि जापान ने दो युद्धपोत भेजे हैं। भारत का विमान वाहक युद्धपोत विक्रमादित्य, दो शिवालिक क्लास के युद्धपोत, दो रणवीर, दो कामोर्टा, तीन कोरा, एक टैंकर ज्योति, एक सिन्धु ध्वज सबमरीन, पी 8 आई निगरानी हवाई जहाज इसमें शामिल है। कुल मिलाकर मालाबार युद्ध अभ्यास में जंगी जहाज, हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर समेत कुल मिलाकर 90 जहाज हिस्सा ले रहे हैं।
मालाबार में भारत, अमेरिका और जापान के संयुक्त युद्धाभ्यास से चीन घबराहट में है। चीन के एक अंग्रेजी अखबार ने मालाबार युद्धभ्यास पर एक रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए कहा है यह युद्धभ्यास चीन की सुरक्षा के लिए खतरा है। हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को भारत से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्हें इस युद्धभ्यास पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं है लेकिन उन्हें आशा है कि यह सब क्षेत्र की शांति के लिए होगा। लेकिन सोमवार को चीन के एक सरकारी अंग्रेजी अखबार ने जो खबर प्रकाशित की है उसमें चीन की घबराहट साफ तौर पर देखी जा रही है। अखबार ने लिखा है कि इतने बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास करने से चीन के साथ बने व्यापारिक संबंध को खतरे में डाल सकता है। इतना ही नहीं यह चीन की सुरक्षा के लिए भी खतरा साबित हो सकता है। चीन अखबार ने लिखा है कि चीन जब डोकलाम सड़क बनाना चाहता है तो भारत इसका यह कहकर विरोध करता है कि यह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। लेकिन अब चीन को खुद सोचना होगा कि भारत की ओर से आयोजित किए जा रहे बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास से उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है। चीनी मीडिया ने लिखा है कि तीन देशों की नेवी द्वारा किया जा रहा यह अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास है। बंगाल की खाड़ी आयोजित हो रहे 10 दिवसीय इस युद्धाभ्यास को चीनी मीडिया ने अपने देश के लिए बड़े खतरे का संकेत बताया है। चीनी अखबार में यह भी लिखा है कि अमेरिका ने भारत को युद्धक सामग्री ले जाने वाले लड़ाकू विमान देने की स्वीकृति दे दी है। भारत ये लड़ाकू विमान 365 अरब डॉलर में खरीद रहा है। इतना ही नहीं अमेरिका 2 अरब डॉलर में भारत को कई टोही ड्रोन भी देने जा रहा है। अब चीन को अपनी सुरक्षा की चिंता करने की जरूरत है। एजेंसी