लगभग एक पखवारे से लॉकडाउन में रह रहे देशवासियों में यह उत्सुकता स्वाभाविक ही है कि यह स्थिति अभी जारी रहेगी या खत्म होगी। वजह बहुत साफ है कि सभी तरह की गतिविधियां ठप पड़ी हैं। इनमें ऐसे कार्य भी हैं जो व्यक्ति और देश की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े हैं और जिनके अभाव में एक अजीबोगरीब परिस्थिति बनती जा रही है। वहीं दूसरी ओर, यह भी सही है कि भले ही बाकी दुनिया के मुकाबले हमारा देश कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित है लेकिन संक्रमित लोगों का मिलना अभी भी जारी है और यह संख्या बढ़ती भी जा रही है। इस दृष्टि से समस्या निश्चित रूप से गंभीर है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए कई राज्य सरकारों ने लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने के पक्ष में अपनी राय जाहिर की थी। कोई भी कल्याणकारी राज्य अपने नागरिकों को किसी बीमारी से दम तोड़ते नहीं देख सकता। कोरोना की जो इस स्थिति देश में है, उससे निश्चिंत तो नहीं ही रहा जा सकता। अमेरिका जैसे देश की स्थिति सभी लोग देख रहे हैं। ऐसे में निश्चित रूप से भारत ऐसे बिन्दु पर है जहां जरा सी लापरवाही पूरे किये-धरे पर पानी फेर सकती है।

यह सही है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और लोगों के रोजगार को फिर शुरू करने की जरूरत है लेकिन वह भी तभी अधिक उचित होगा जबकि बीमारी पर पूरी तरह से काबू पा लिया जाय। यही कारण है कि केन्द्र सरकार भी लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने के ही पक्ष में है।
दूसरी बात यह भी है कि कोराना वायरस के प्रभाव की वास्तविक स्थिति का पता लगाना भी जरूरी है कि इसका संक्रमण किस हद तक फैला है और उसके लिए क्या करना अभी भी जरूरी है। ये सारी चीजें ऐसी है जो वक्त मांगती हैं क्योंकि अभी तक जो भी कदम उठाये गये, वे फौरी तौर पर उठाए गए हैं। कोरोना के बारे में रणनीति बनाकर अभी कई कदम उठाए जाने बाकी हैं जिनके लिए इसी समय तैयारी की जानी ज्यादा उपयुक्त होगी क्योंकि तभी वह हकीकत के ज्यादा नजदीक भी होगी।







