जी के चक्रवर्ती
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मनरेगा केंद्रीय सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। देश की बहुसंख्यक ग्रामीणों को आजीविका से जोड़ने एवं देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में मनरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण मौजूदा समय कृषि क्षेत्र में उत्पन्न संकट एवं आर्थिक मंदी के दौर में मनरेगा ने गावों में रोजगार की गारंटी देकर किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों को एक ‘सुरक्षा कवच’ प्रदान करने की जरूरत को समझा है। देश के गांवों में मनरेगा की महत्व एवं आवश्यकता को समझते हुये केंद्रीय सरकार ने उसे और भी अधिक कारगर रूप से लागू करने के लिये विशेष कदम उठाते हुये अभी कुछ ही वर्ष पहले मनरेगा जैसे भारत सरकार की इस योजना के वजूद को खतरे पैदा होने जैसी बातों को दरकिनार करते हुये इसे एक नई गति एवं ऊर्जा से संवारने का काम किया है।मौजूदा वित्तीय वर्ष 2020-2021 के लिए बजट में देश के वित्त मंत्री ने मनरेगा के लिए साढ़े 61 हजार करोड़ रुपये निर्गत किये हैं वहीं पर यदि हम वित्तीय वर्ष 2016-17 की बात करें तो उसमें मनरेगा के लिए 38,500 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था और इससे पहले वर्ष 2015-16 में 34,699 करोड़ रुपये आवंटित किया गया। मौजूदा समय मे इस योजना के अंतर्गत विगत वर्षों के दौरान आवंटित किये गये धनराशि की तुलना में वर्तमान वित्तीय वर्ष में आवंटित की गई धनराशि बड़ी है। लेकिन आज भी ग्राममीण स्तर में इस योजना के भ्रष्टाचारियों के भेंट न चढ़ जयें इस बात पर विशेष नजर रखने की आवश्यकता है।
केंद्र सरकार की मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजनायें ग्रामीण समाज एवं देश की अर्थव्यवस्था के साथ जुड़े होने के कारण यह ग्रामीण लोगों के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही साथ गांवों में गरीबी उन्मूलन एवं वेरोजगारी को कम करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। रोजमर्रे की अपने दैनिक जीवन में मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार के भरण-,पोषण करने वाले लोगों के मध्य केंद्र सरकार की इस योजना से एक उम्मीद की किरण दिखाई दी है। भारतीय ग्रामीण लोगों के मध्य परंपरागत रूप से व्याप्त ग़रीबी, भूख , कुपोषण एवं वेरोजगरी जैसी समस्यों में कमी लाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के अंतर्गत गावों के लाखों शोषितों एवं वंचित लोगों के घरों में दो जून की रोटीयों की जिम्मेदारी उठाने में सक्षम है।

केंद्र सरकार की इस महत्वकांक्षी मनरेगा योजना के अंतर्गत गाँवों मे बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होने से गावों के मजदूरों को कम से कम सौ दिनों के रोजगार की गारंटी मिलती है इसके साथ ही साथ इस दौरान रोजगार न दिये जाने के बदले में उन्हें बेरोजगारी भत्ता मिलने का भरोसा देता है। इस योजना के गांवों-गांवों में चलाये जाने से पहले की अपेक्षा रोजगार, काम की तलाश में देश के विभिन्न प्रदेशों में पहुंचने वाले प्रवासी मजदूरों एवं कामगारों की संख्या में बहुत बड़ी कमी आई है। अब काम करने के इच्छुक व्यक्तियों को उन्ही के गांव या आस -पास के गांवों में मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर रोजगार हासिल कर सकते है। हाँ यह जरूर है कि बड़े शहरों की तुलना में मनरेगा के अंतर्गत कम धन राशि मिलता है।
एक आर्थिक अनुसंधान संस्थान द्वारा जारी की गयी एक रिपोर्ट के अनुसार मजदूरों, आदिवासीयों, दलितों, छोटे सीमांत कृषकों एवं गरीब या कमजोर वर्गो के लोगों की गरीबी कम करने की दृष्टि से मनरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका है।
हमारा देश आदिकाल से एक पुरुष प्रधान देश होने के कारण सामान्यत: पुरुषों को ही घर के बाहर काम करने निकलना पड़ता है वहीं पर घर की महिलाएं दिनभर घर के अंदर का सारा काम-,काज निपटाती रहती हैं। हमारे समाज में महिलाओं के पिछड़ेपन के लिए उन कारणों में से यह भी एक बहुत बड़ा कारण है।
हमारे समाज मे कई ऐसे कार्य हैं, जो स्वमं महिलाएं सहजता से कर सकती हैं, लेकिन घर के पुरुषों ने उन्हें कभी भी अपने घर की दहलीज लांघने की इजाजत कभी नहीं दी। हालांकि यह जरूर है कि हमारे देश मे व्यप्त इस तरह की संकीर्ण विचार धाराओं में दिनों-दिन बहुत तेजी के साथ बदलाव आने लगा है।







