निजी घरानों की फ्रेंचाइजी सीएजी से आडिट कराने का अनिवार्य रूप से हो प्राविधान: उपभोक्ता परिषद

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  • टैरिफ निर्धारण हेतु बनने वाले नये कानून पर उपभोक्ता परिषद ने आयोग की सुनवाई में रखा अपना मजबूत पक्ष। बिजली कंपनियों पर जवाबदेही हेतु कानून में बदलाव की उठायी मांग
  • बिजली कम्पनियों द्वारा आयोग द्वारा तय व्यवस्था पर खरा न उतरने पर उपभोक्ताओं की बिजली दरों में कमी करने हेतु बने नया कानून

लखनऊ, 25 अप्रैल 2019: आगामी 5 वर्षों के लिये टैरिफ निर्धारण हेतु बनने वाले कानून हेतु उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा आज प्रस्तावित मल्टीईयर डिस्ट्रीब्यूशन एवं ट्रांसमीशन टैरिफ रेग्यूलेशन 2020-24 पर सार्वजनिक सुनवाई आयोग के सभागार में आयोग अध्यक्ष श्री आर पी सिंह व सदस्यगण श्री एस के अग्रवाल व श्री के के शर्मा की उपस्थित में सम्पन्न हुयी। जिसमें पावर कारपोरेशन के अनेकों विद्युत अभियन्ताओं सहित उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयोग चेयरमैन श्री आर पी सिंह द्वारा सभी पक्षों को यह कहा गया है जिसको कुछ भी अतिरिक्त सुझाव व आपत्ति देना है वह 10 मई तक दे दे इसके बाद नये कानून को अंतिम रूप दे दिया जायेगा।

प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया हेतु बनने वाले नये कानून मल्टीईयर टैरिफ रेग्यूलेशन पर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा आयेाग को नये कानून बनाते समय इस बात पर भी गौर करना पडेगा कि अनेकों बार बिजली कम्पनियाॅं कानून में खामियों का फायदा उठाकर उपभोक्ताओं पर बडा बोझ डलवाने में कामयाब हो जाती है।

उदाहरण के तौर पर वर्ष 2018-19 के टैरिफ आदेश में ग्रामीण घरेलू अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरेां में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि इस आधार पर करायी कि अक्टूबर 2018 से ग्रामीण को 24 घण्टे बिजली मिलेगी जब कि ऐसा बिल्कुल नही हुआ और आज भी 16 से 18 घण्टे मात्र बिजली मिल रही है। ऐसे मे नया कानून यह बनाया जाये कि इसकी भरपाई करने के लिये बिजली कम्पनियों के रिटर्न आफ इक्यूटी यानि कि फायदे से काट कर विद्युत उपभोक्ताओं को पासआन किया जायेगा यानि कि उसकी दरों में कमी की जाये। इसी प्रकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 62 के तहत नये कानून में यह भी प्राविधान होना आवश्यक है कि किसी भी बिजली कम्पनी द्वारा यदि किसी भी उपभोक्ता से अधिक धनराशि किसी भी मद में वसूल की गयी तो उसे ब्याज सहित उपभोक्ता को वापस करना होगा साथ ही जिस प्रकार से सरकारी बिजली कम्पनियों की सीएजी आडिट होती है उसी प्रकार से निजी फे्रन्चाइजी जैसे कि आगरा में टोरेन्ट पावर का सीएजी से आडिट कराने का प्राविधान। उसके उपरान्त ही आयोग द्वारा भविष्य में उसके रोल आउट प्लान को अनुमोदित किया जाये।

उपभोक्ता परिषद ने अगले 5 वर्षों तक 15 प्रतिशत लाइन हानियों पर सुझाव देते हुये कहा कि जिस भी कम्पनी की उससे कम लाइन हानियाॅं हो उसे शामिल कर कानून बनाया जाये। उपभोक्ता परिषद ने बिजली कम्पनियों के अनाप शनाप फिजूल खर्ची जैसे आये दिन उपभोक्ताओं के परिसर का चलता मीटर बदलने पर सवाल खडा करते हुये कानून में सख्त प्राविधान की मांग उठायी।

उपभोक्ता परिषद ने आगे रेग्यूलेशन में यह भी व्यवस्था बनानें की मांग की कि यदि बिजली कम्पनियाॅं समय से टूª-अप फाइल नही करती तो उसे अस्वीकार कर दिया जाये और वह बिजली कम्पनियों के ऊपर डाला जाये। उपभोक्ता परिषद ने कानून में यह भी मांग उठायी कि स्टैण्डर्ड आफ परफारमेन्स का चार्ट भी एमवाईटी के साथ बिजली कम्पनियाॅं अनिवार्य रूप से आयोग को सम्मिट करें। पावर कारपोरेशन नोयडा पावर कम्पनी सहित अन्य उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी।

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