एलएसी पर चीन की बढ़ती खतरनाक घुसपैठ और भारत के अहम फैसले

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करेंट इशू : जीके चक्रवर्ती

हमारे भारत वर्ष के लिये दुनियां के किसी भी देश के साथ मित्रता करने और संस्कृति मेल जोल बढ़ाना एक महत्वपूर्ण उद्देश्य हमेशा से रहा हैं और भारत हमेशा इस तरह की उद्देश्यों को लेकर आगे बढ़ाता रहा और इन्ही उद्देश्यों को लेकर हमारे देश के राजनैयिक लोगों ने चीन के कारगुजरियों के मद्देनज़र भारत लगातर यह कहे जा रहा है कि भारत-चीन सीमा विवाद का समाधान कूटनीतिक दायरे में निकाला जाना चाहिये लेकिन यदि हम स्पष्ट शब्दों में कहें तो चीन की तरफ से हमेशा इसके उलट ही कार्य किया जाता रहा हैं। हां यहां एक बात ध्यान देने योग्य है कि मौजूदा समय मे दोनो देश इस समस्या का हल युद्ध के माध्यम कतई नही चाहेंगे लेकिन शायद चीन को इस बात से कोई लेना देना नही हैं क्योकिं युद्ध की परिस्थिति में भी उसे ही फायदा होगा क्योकिं उसके देश पर जनसंख्या का दवाव होने से यदि कुछ लोग कम भी हो जाये तो उसे कोई फर्क नही पड़ने वाला नही है।

शायद बड़ी व जह वर्ष 1962 में भारत-चीन के मध्य हुये युद्ध है, जो लगभग एक महीने चला और इसका क्षेत्र लद्दाख़ से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ था। फिर वर्ष 1967 में नाथुला में चीन और भारत के कई सैनिक मारे गए थे। मारे गये लोगों की संख्या के विषय मे दोनों देशों के अलग-अलग दावे हैं। उसके बाद वर्ष 1975 – में भारतीय सेना के गश्ती दल पर अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर चीनी सैनिकों ने हमला किया गया था।

इसी बात के मद्देनज़र ऐसा नहीं है कि दोनों देशों के मध्य सीमा पर तनाव कोई नई बात हो, लेकिन दोनों देशों ने आपसी सहमति से सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिशों के बीच राजनीतिक रिश्ते बनाए रखते हुए व्यापार और निवेश जैसे व्यपारिक रिश्ते एक लंम्बे समय तक दोनो के मध्य कायम रहे है।

हमारे देश के राजनयिक ने इस बात को स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोनों देशों के मध्य सीमा विवाद का मामला किसी एक नतीजे पर पहुंचना केवल दोनों देशों के लिये ही महत्वपूर्ण नही है बल्कि दुनिया के लिए भी यह मायने रखता है।

वैसे भी भारत-चीन के आपसी संबंधों के लिए मौजूदा समय सामान्य नहीं है। पिछले 15 जून 2020 को गलवान घाटी में दोनो पक्षों के मध्य हुई झड़पों में 20 भारतीय सैन्यकर्मी शहीद हो गये थे। उसी वख्त से सीमा पर सामान्य स्थिति तो कही नही जा सकती है।

वैसे दुनिया के अन्य देश जैसे ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स) देशों के विदेश मंत्रियों की ऑनलाइन बैठक, शंघाई सहयोग संगठन की बैठक और क्वाड समूह की बैठक पर चर्चा अवश्य चल रही है लेकिन अभी इस पर निर्णय नहीं लिया गया है।

चीन की लगातार इस तरह की हरकतों से यह बात तो स्पष्ट है कि वह इस मसले को स्वमं ही सुलझाना नही चाहता है क्योकिं इस तरह से वह सीमा विवाद को न सुलझाकर धीरे-धीरे वह औऱ अन्दर तक पहुंचना चाहता है और जहां तक वह पहुंच सकता हैं वह पहुंचेगा और वह तब तक सीमा पर अपनी स्थिति को स्पष्ट नही करेगा जब तक की वह बाध्य नही हो जाता है तब तक वह इस सीमा विवाद को लटकाये रहने की भरपूर कोशिशें करता रहेगा।

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