international yoga day: 21 june
हमारे भारत भूमि को सदैव से पूज्य साधु- संतो ऋषियों योगियों की तपस्या स्थली के रूप में जाना पहचाना जाता रहा है। वास्तव में योग भारत के योगियों की ही देन हैं। हमारे देश मे हमेशा से गुरु-शिष्य परिपाटी में योग का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
योगियों के ऋषिकुल में विद्यार्थी योग साधना के रूप में इसे सीखते और कुछ विद्यार्थी तो इसमें इतना तल्लीन हो जाया करते थे कि ऐसे विद्यार्थियों ने इसे अपना जीवन यापन के साधन के रूप में अपना लिया।
वैसे योग का शाब्दिक अर्थ जोड़ना होता है, किसमें क्या जोड़ा जाये अर्थात हमारे शरीर मे क्या जोड़ा जाये कि जिससे हमारा शरीर पहले से और अधिक शक्तिशाली और निरोग हो जाये। इस रूप में हमारे देश मे योग साधना में अनेको तरह की आसान, भंगिमाएं और अवस्थाओं के माध्यम से शारीरिक वलिष्ठता प्राप्त करने के अलावा शरीर के अनेको तरह की व्याधियों में उपयोगी होता तो है ही इसके साथ ही साथ शरीर के अनेकों असाध्य रोगों को भी योग के माध्यम से ठीक क्या जा सकता है।
योगियों ने सर्वप्रथम अपने शिष्यों को योग में पारंगत किया उसके बाद उनके शिष्यों ने इसका सम्पूर्ण दुनिया मे प्रचार प्रसार किया वास्तव में योग जिसे पूरी दुनिया ने इस वख्त अपनाया हुआ है उसका भारत ही जन्मदाता और विश्व गुरु भी है।
- प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती







