चले आइए, बादलों के शहर ‘शिलांग’ में

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गर्मी के मौसम में अगर बादलों से घिरे खूबसूरत झरनों, सुंदर वादियों, मंत्रमुग्ध कर देने वाली चोटियों के नजारे लेने हैं तो शिलांग चले आइए। मेघालय की राजधानी शिलांग देश के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक है। यहां आकर जिंदगी की हर चिंता पीछे छूट जाती है।

शिलांग मेघालय राज्य में स्थित छोटा लेकिन प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। पूर्व का स्कॉटलैंड (स्कॉटलैंड ऑफ द ईस्ट) कहलाया जाने वाला यह शहर खुद में अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता को समेटे है। मेघालय का तो मतलब ही है बादलों का घर। हरे घने जंगल, अनुपम प्राकृतिक छटा, बादलों से ढंके पहाड़, फूलों से आती मीठी खुशबू, मिलनसार लोग और औपनिवेशिक दौर की निशानियां शिलांग पर्यटन की खासियत है। एक ओर जहां शिलांग हरियाली से अटा पड़ा है, वहीं दूसरी ओर शहर की भागमभाग वाली जिंदगी यहां टूरिज्म को बहुआयामी बना देती है।

मेघालय राज्य की राजधानी होने से पहले शिलांग असम की राजधानी हुआ करता था। वर्ष 1972 में असम राज्य के विभाजन के बाद मेघालय की स्थापना हुई और शिलांग को मेघालय की राजधानी घोषित किया गया। अंग्रेजों के शासन काल में ये शहर उनका महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र हुआ करता था। शिलांग में मुख्य रूप रूप से तीन जातियां पायी जाती हैं खासी, जयंतिया और गारो। लेकिन ज्यादातर आबादी खासी जनजाति की ही है जो कि भारत की सबसे पुरानी जनजातियों में से एक मानी जाती है। इस जाति में सबसे खास बात है कि यहां घर की महिला घर की मुखिया होती है तथा घर और सम्पत्ति से जुड़े सारे फैसले वे ही लेती है तथा दूसरी खास बात यहां शादी के बाद दूल्हा दुल्हन के घर जाकर रहता है और वंश भी महिला के नाम से ही चलता है, इन जनजातियों में ईसाई धर्म का खासा प्रभाव देखने को मिलता है।
प्रकृति शिलांग पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान मालूम पड़ती है। शिलांग में पर्यटन के लिए कई प्रसिद्ध और आकर्षक स्थल हैं जहां स्पोटर्स एक्टिविटीज, फिशिंग और हाईकिंग की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

वाडर्स लेक

वाडर्स लेक
शिलांग में एक खूबसूरत सी झील है जिसे वाडर्स लेक के नाम से जाना जाता है। यह शहर के बीचोंबीच है। इस झील का पानी इतना साफ है कि अंदर से तैरती मछलियां नजर आती हैं। यहां बोटिंग की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही जुड़ा बॉटनिकल गार्डन भी अवश्य देखें। यहां पर रंगबिरंगी चिडिय़ां मन को मोह लेती हैं।

लेडी हैदरी पार्क

लेडी हैदरी पार्क व मिनी जू
यह पार्क भी शिलांग शहर में ही है। बच्चों के लिए यहां पर एक मिनी जू भी है साथ ही एक खूबसूरत झरना और स्वीमिंग पूल भी। यहां एक रेस्तरां भी है जहां पर्यटकों के लिए शाम को कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

चेरापूंजी और एलीफेंटा फॉल
शिलांग जाकर अगर चेरापूंजी नहीं गए तो आपने कुछ नहीं देखा। दुनिया में सबसे अधिक बारिश यही पर होती है। यह शिलांग से 56 किलोमीटर दूर पर है। यहां जाने के लिए शिलांग से सवेरे निकलकर शाम तक घूमकर लौटा जा सकता है।
चेरापूंजी जाने वाले रास्ते में ही एलीफेंटा फॉल पड़ता है। इस तरह एक दिन में यह दोनों जगह देखी जा सकती हैं। एलीफेंटा फॉल शिलांग से १२ किलोमीटर दूर है। इस झरने को पास से देखने के लिए एक लकड़ी के पुल से होकर सीढिय़ों से नीचे तक जाना होता है। चेरापूंजी में जब आप पहुंचेंगे तो आपको वहां झरनों का शोर सुनाई देगा। इस झरने को ‘सेवन सिस्टर फॉल’ के नाम से जाना जाता है। भारत का सबसे ऊंचा झरना नोहकलिकाई चेरापूंजी में ही है जिसकी ऊंचाई 335 मीटर है। इस झरने का स्रोत चेरापूंजी में होने वाली बारिश है। झरने के नीचे एक तालाब बना हुआ है जिसमें गिरता हुआ पानी हरे रंग का दिखाई देता है। चेरापूंजी में ही एक व्यू प्वाइंट है जहां से खुले मौसम में बांग्लादेश का हरा-भरा मैदानी इलाका दूर-दूर तक साफ दिखाई देता है। एक तरफ मेघालय राज्य की पहाड़ी इलाका और दूसरी तरफ बांग्लादेश का मैदानी भाग दोनों मिलकर एक मनोरम दृश्य उत्पन्न करते हैं। हालांकि यह दृश्य बेहद दुर्लभ है क्योंकि ज्यादातर यह बादलों से इतना घिरा रहता है कि आप अपने पास खड़े व्यक्ति को भी नहीं देख पाएंगें। यहां पर संतरे के बाग हैं और शुद्ध शहद भी मिलता है। यहां कुछ गुफाएं भी बनी हुई हैं। आप चाहे तो वहां भी जा सकते हैं।

शिलांग पीक
ये पीक शिलांग से 10 किलोमीटर की दूरी पर पड़ती है। इसकी ऊंचाई 1965 मीटर है जिस पर पहुंच कर आप पूरा शहर देख सकते हैं। शाम के समय शहर की रोशनी यहां से देखने पर ऐसा लगता है मानो जमीन पर ही ‘तारा मंडल’ आ गया हो। हर साल बसंत के समय यहाँ के निवासी शिलांग के देवता की पूजा करते हैं।

स्वीट फॉल
अगर आपको दिनभर आउटिंग करनी है और किसी अच्छी जगह पिकनिक मनानी है तो शिलांग से आठ किलोमीटर दूर स्वीट फॉल जा सकते हैं। यहां झरनों से तकरीबन 200 फीट नीचे पानी गिरता है। इसको देखकर ऐसा आभास होता है कि पेंसिल के आकार के एक मोटे वाटर पाइप से 200 फुट नीचे पानी गिर रहा है।

मेघालय स्टेट म्यूजियम
शिलांग जाने पर स्टेट म्यूजियम अवश्य देखना चाहिए क्योंकि यहां पर मेघालय राज्य के लोगों के सांस्कृतिक जीवन और मानवजातीय अध्ययन से जुड़ी वस्तुएं रखी हुई है। इस संग्रहालय के ठीक सामने सबसे पुराना सेंट कैथोलिक चर्च भी है।

पोलो ग्राउंड और गोल्फ कोर्स
शिलांग में पोलो ग्राउंड अपनी एक अलग ही विशिष्टता के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर तीर का खेल खेला जाता है। इस खेल के जरिये खासी जनजाति के लोग आज भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े प्रतीत होते हैं। शिलांग गोल्फ कोर्स
देश का तीसरा सबसे बड़ा और सबसे पुराना 18 होल का गोल्फ कोर्स है। इसको पूर्व का ‘ग्लैनईगल’ कहा जाता है।
शिलांग शहर में आप पुलिस बाजार, बड़ा बाजार आदि घूम सकते हैं और यहीं खरीदारी करना भी उपयुक्त होगा। बड़ा बाजार में आपको शुद्ध शहद, हाथ के बुने शाल, तीर कमान, कुछ स्थानीय मसाले, बांस से बनी वस्तुएं आदि मिल जाएंगी।

घूमने का सबसे अच्छा समय
शिलांग का मौसम पूरे साल सुहाना रहता है फिर भी ठंड और बरसात के ठीक बाद शिलांग घूमना सबसे अच्छा माना जाता है। यानी आप मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर में यहां घूमने का अपना ही मजा है।

कैसे पहुंचें
शिलांग का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन गुवाहाटी है। गुवाहाटी से शिलांग की दूरी 104 किलोमीटर है। नेशनल हाईवे 40 शिलांग को गुवाहाटी से जोड़ता है। मुख्य शहर से 30 किलोमीटर दूर उमरोई में एयरपोर्ट भी है। हालांकि जनवरी 2013 से यह एयरपोर्ट बंद पड़ा है। उत्तर पूर्व में कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण इस क्षेत्र में रेल का विस्तार कम होने से, परिवहन तंत्र सडक़ पर ही निर्भर करता है। इसलिए यहां का हर राजमार्ग वाहनों के दबाव से जूझता रहता है।

शिलांग के आसपास दर्शनीय स्थान
रानीकोर: यदि आप मछली पकडऩे की इच्छा रखते हैं तो रानीकोर जाएं। यह दर्शनीय स्थल शिलांग से 140 किलोमीटर दूर है।
डावकी: बोटिंग का शौक हो और प्रकृति को बिल्कुल नए अंदाज में देखना चाहते हैं तो शिलांग से 56 किलोमीटर दूर डावकी पहुंचें। यह उमगोट नदी के पास स्थित है। यहां पर एक झूले वाला पुल है। जिसके नीचे से डावकी नदी बहती है। यहां पर हर साल बोटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है।
गर्म पानी के सोते: शिलांग से 64 किलोमीटर दूर जाकरेम एक ऐसी जगह है जो ‘हेल्थ रिसार्ट’ के तौर पर भी लोकप्रिय है। यहां पर गंधक के पानी का सोता है, जो कई बीमारियों को दूर करने वाला माना जाता है। यह चट्टानों से घिरा एक सुंदर स्थान है।
उनियाम (बारापानी): शिलांग से 17 किमी. दूर बहुत विशाल पानी का भंडार हैं जो एक वाटर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स व पर्यटक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां पर सुंदर लेक और नेहरू पार्क है। बोटिंग की भी सुविधा है। यहां पर तैरता हुआ एक रेस्तरां भी है। यहां पर वाटर स्पोर्टस जैसे रोइंग बोट, पैडल बोट, पानी का स्कूटर, स्पीड बोट जैसी विशेष सुविधाएं पर्यटकों का मन लुभाती हैं। (Re post)