हाल ही में यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर खबरें वायरल हुई हैं कि लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद ने भारत से अपनी जान की भीख मांगी है। इन दावों में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की कूटनीतिक रणनीति विफल हो चुकी है और पाकिस्तान को भारत और इजरायल से खतरा है। ये सनसनीखेज दावे भले ही ध्यान खींचते हों, लेकिन इनकी सत्यता, संदर्भ और प्रभाव को तटस्थ नजरिए से जांचना जरूरी है।
क्या है दावों का सच: तथ्य या प्रचार?
यह दावा कि तल्हा सईद ने भारत से अपनी जान की भीख मांगी, एक वायरल वीडियो या उनके कथित बयान से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तल्हा ने पाकिस्तान के कसूर में एक सभा में भाषण दिया, जहां उन्होंने अपने पिता हाफिज सईद को पाकिस्तान की “सुरक्षा” में होने की बात कही और भारत के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी की। उनकी ओर से जान की भीख मांगने की बात सच से कोसों दूर दिखती है; बल्कि यह भारत में कुछ मीडिया या सोशल प्लेटफॉर्म्स द्वारा पाकिस्तान के आतंकी तंत्र को कमजोर दिखाने की कोशिश हो सकती है।
इसके साथ ही, शाहबाज शरीफ की “नाकाम रणनीति” और भारत-इजरायल से खतरे की बात भी जुड़ी है। शरीफ ने हाल ही में ईरान और अन्य देशों की यात्राओं के दौरान भारत से बातचीत की पेशकश की थी, जो पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के बीच तनाव कम करने की कोशिश मानी जा सकती है। लेकिन भारत का स्पष्ट रुख ”आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई के बिना कोई बातचीत नहीं ” ने पाकिस्तान के प्रयासों को ठप कर दिया है। इजरायल को खतरे के रूप में जोड़ना इस संदर्भ में कम प्रासंगिक लगता है; यह संभवतः पाकिस्तान के घरेलू दर्शकों में डर और इजरायल-विरोधी भावनाएं भड़काने की कोशिश है। इजरायल का पाकिस्तान के आतंकी तंत्र के खिलाफ सीधा खतरा होने का कोई ठोस सबूत नहीं है।
पाकिस्तान की स्थिति
पाकिस्तान का हाफिज सईद जैसे आतंकियों को पनाह देने का इतिहास जगजाहिर है। संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बावजूद, हाफिज सईद को “नजरबंदी” के नाम पर संरक्षण मिलता रहा है, न कि वास्तविक सजा। उनके बेटे तल्हा के सार्वजनिक कार्यक्रम, जिनमें पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सुरक्षा होती है, इस दोहरेपन को और उजागर करते हैं। हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने से तनाव और बढ़ा है, और पाकिस्तान के सैन्य तंत्र और हाफिज जैसे प्रॉक्सी जवाबी धमकियां दे रहे हैं। यह दिखाता है कि पाकिस्तान अपनी पुरानी रणनीति पर कायम है: आतंकवाद को हथियार बनाना और साथ ही पीड़ित का चेहरा दिखाकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना से बचना।
शाहबाज शरीफ की शांति की पेशकश को संदेह की नजर से देखना होगा। पाकिस्तान का इतिहास बताता है कि वह बातचीत की आड़ में सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है, जैसा कि पहले की “शांति पहल” के बाद हमलों में देखा गया। भारत का जवाब ‘आतंकवाद का अंत और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की वापसी की मांग’ स्पष्ट करता है कि बिना आतंकी ढांचे को खत्म किए बातचीत की गुंजाइश नहीं है।
भारत-इजरायल गठजोड़: पाकिस्तान का डर या हकीकत?
इजरायल और भारत को एकसाथ खतरे के रूप में पेश करना पाकिस्तान की पुरानी रणनीति का हिस्सा है। भारत और इजरायल के बीच बढ़ते रक्षा और आतंकवाद-विरोधी सहयोग ने पाकिस्तान को असहज किया है, क्योंकि उसे अपने आतंकी प्रॉक्सी के खात्मे का डर है। हालांकि, तल्हा सईद या पाकिस्तानी नेतृत्व द्वारा इजरायल से डर का कोई स्पष्ट सबूत इस संदर्भ में नहीं मिलता। यह बल्कि एक रणनीतिक बयानबाजी हो सकती है, जिसका मकसद घरेलू जनता में डर और इजरायल-विरोधी भावनाएं भड़काना है।
क्या इन सनसनीखेज दावों में कोई सच्चाई है?
तल्हा सईद द्वारा भारत से जान की भीख मांगने का दावा अतिशयोक्ति या जानबूझकर गलत बयानी लगता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तल्हा ने भारत-विरोधी रुख अपनाया और पाकिस्तान की सुरक्षा में अपनी गतिविधियां जारी रखीं। शाहबाज शरीफ की रणनीति पूरी तरह “नाकाम” नहीं हुई, लेकिन भारत की आतंकवाद-विरोधी मांगों को नजरअंदाज करने से वह प्रभावहीन जरूर हो रही है। इजरायल का जिक्र अधिकतर प्रचारात्मक लगता है, न कि तथ्यपरक।
वासतव में यह पूरा प्रकरण भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव और प्रचार के पुराने खेल का हिस्सा प्रतीत होता है। भारत को चाहिए कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त नीति जारी रखे और बिना ठोस कार्रवाई के पाकिस्तान की बातचीत की पेशकश को नजरअंदाज करे। साथ ही, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली ऐसी खबरों की सत्यता को जांचे बिना स्वीकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये अक्सर प्रचार का हिस्सा होती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी पाकिस्तान पर आतंकी तंत्र को खत्म करने का दबाव बढ़ाना होगा, ताकि इस क्षेत्र में शांति की वास्तविक संभावना बन सके। – सुशील कुमार







