नई दिल्ली, 18 जून : ईरान और इजरायल के बीच छठे दिन भी संघर्ष जारी है, और अमेरिका की बढ़ती सैन्य भागीदारी ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने X पर दावा किया कि “ईरान के आसमान पर हमारा पूरा कब्जा है,” और चेतावनी दी कि अगर ईरान ने कोई आक्रामक कदम उठाया, तो अमेरिका “पहले कभी न देखे गए स्तर” पर जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा, “हम इतनी शक्ति से हमला करेंगे कि दस्ताने भी उतारने पड़ेंगे,” जिससे क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
इस मामले में ताजा अपडेट यह है कि अमेरिका ने ईरान के आसपास अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है, जिसमें विमानवाहक पोत और F-35 जेट्स की तैनाती शामिल है। पेंटागन ने पुष्टि की कि मध्य पूर्व में अतिरिक्त 2,000 सैनिक और मिसाइल डिफेंस सिस्टम भेजे गए हैं। ट्रम्प ने ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए सख्त रुख अपनाया है, और कहा कि अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ, तो उसके तेल निर्यात को “शून्य” कर दिया जाएगा।
ईरान का जवाब: ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने X पर इजरायल को “आतंकी यहूदी शासन” करार देते हुए जवाबी हमलों की चेतावनी दी। ईरान ने दावा किया कि उसने तेल अवीव में मोसाद हेडक्वार्टर और ग्लीलोट में अमान के लॉजिस्टिक सेंटर पर ‘हाज कासिम’ बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया, जो इजरायल के आयरन डोम को भेदने में सक्षम थीं। ईरान ने इन हमलों में कई इजरायली अधिकारियों के मारे जाने का दावा किया, हालांकि इजरायल ने इसे “सीमित नुकसान” बताया।

इजरायल की कार्रवाई: इजरायल ने जवाब में तेहरान और पश्चिमी ईरान में हवाई हमले किए, जिसमें नतांज परमाणु केंद्र को निशाना बनाया गया। इन हमलों में ईरान के डिप्टी कमांडर मेजर जनरल अली शादमानी और छह परमाणु वैज्ञानिकों की मौत की खबर है। इजरायल ने दावा किया कि उसने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया।
कितना हुआ नुकसान : ईरान में 244 और इजरायल में 24 लोगों के मारे जाने की खबरें हैं, लेकिन स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। तेहरान और तेल अवीव में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, और दोनों देशों में हवाई हमले के सायरन बार-बार बजे।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: भारत ने अपने नागरिकों के लिए मध्य पूर्व की यात्रा से बचने की एडवाइजरी जारी की है। G7 और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर आपातकालीन बैठक की चर्चा हो रही है। कनाडा और ब्रिटेन ने भी अपने नागरिकों को ईरान और इजरायल से निकलने की सलाह दी है।
ट्रम्प का रुख: ट्रम्प ने संकेत दिया कि वह शांति वार्ता के मूड में नहीं हैं, लेकिन वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों को ईरान के साथ बातचीत के लिए भेज सकते हैं। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि अगर परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं हुआ, तो “बमबारी” की जाएगी।
ऐसा प्रतीत होता है कि यह संघर्ष अब इजरायल-ईरान के बीच खुफिया और सैन्य ठिकानों पर केंद्रित युद्ध से बढ़कर क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसमें अमेरिका की प्रत्यक्ष भागीदारी ने तनाव को और गहरा दिया है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इजरायल की सुरक्षा चिंताओं के बीच कोई समाधान नहीं दिख रहा। X पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि ईरान ने इजरायल पर 200 से अधिक मिसाइलें दागीं, लेकिन ये आंकड़े सत्यापित नहीं हैं।







