चेन्नई । तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की मंगलवार को पहली पुण्यतिथि थी। इस दौरान तमिलनाडु में जगह-जगह अनेक कार्यक्रम हुए और आम जनता ने अपनी नेता को याद किया। अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता के. पलानीसामी और ओ. पनीरसेल्वम समेत कई नेताओं ने भी ‘अम्मा’ को श्रद्धांजलि दी। अन्नाद्रमुक के समन्वयक एवं उपमुख्यमंत्री पनीरसेल्वम और पार्टी के सह-समन्वयक एवं मुख्यमंत्री के. पलानीसामी ने पार्टी समर्थकों के साथ अन्ना सलाई से मरीन बीच स्थित जयललिता की समाधि तक मौन रैली निकाली। दोनों नेता, मंत्री और पार्टी के कार्यकर्ता काले परिधानों में थे। पार्टी के सैकड़ों समर्थक भी समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने भी पहुंचे। जयललिता को सितंबर 2016 में एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां 75 दिन तक भर्ती रहने के बाद उन्होंने पांच दिसंबर 2016 को आखिरी सांस ली थी। तमिलनाडु की राजनीति में अम्मा के नाम से मशहूर जयललिता राजनीति में आने से पहले फ़िल्मी दुनिया से सम्बन्ध रखती थीं। जयललिता की लोकप्रियता का आलम यह था कि उनके निधन की खबर से तमिलनाडु में लोग सड़कों पर आ गये। लोग उनके लिए जान छिड़कते थे। प्रशासन को इसका अंदाजा था, इसलिए जयललिता की मृत्यु की खबर का एलान देर रात किया गया था। वर्ष-2014 में जब मोदी की लहर अपने चरम पर थी, उस वक्त भी जयललिता ने तमिलनाडु में शानदार जीत दर्ज की थी। यूपीए सरकार के दोनों कार्यकाल में जयललिता का ही तमिलनाडु की राजनीति पर कब्जा रहा। उनके बारे में एक सच्चाई यह भी है कि फिल्मों और राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं था। वह पढ़ना चाहती थीं। जयललिता बचपन में पढ़ाई में काफी तेज थीं। वह बड़ी वकील बनना चाहती थीं। लेकिन हालात को कुछ और ही मंजूर था। ऐसे में उन्हें मजबूरीवश फिल्मों में काम करना पड़ा। जयललिता खूबसूरत थीं और उनके चेहरे पर गजब का तेज था। जल्द ही जयललिता दक्षिण के सिनेमा की पहली पसंद बन गईं। यहीं से उन्हें शोहरत व कामयाबी मिली। फिल्म में आने के बाद जयललिता की नजदीकी एमजी रामचंद्रन से बढ़ी। दोनों ने साथ में 28 हिट फिल्में दीं। एमजीआर बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और एआईएडीएमके की स्थापना की। जयललिता एमजीआर के साथ ऐसे रिश्ते में बंधी थीं, जिसमें वह पत्नी की तरह थीं। लेकिन इस रिश्ते को आधिकारिक दर्जा कभी नहीं मिला। एमजी रामचंद्रन की मृत्यु के बाद जयललिता ने पार्टी पर अपनी पकड़ बनायी। लेकिन इसके लिए उन्हें एमजी के परिवार का विरोध और यातना झेलनी पड़ी। एमजीआर की मृत्यु के वक्त जयलिलता उनके पार्थिव शरीर के पास लगातार खड़ी रहीं। उनके पार्थिव शरीर को ले जाते वक्त एमजीआर के परिवारी जनों ने जयललिता को गाड़ी से धक्का देकर उतार दिया। इस अपमान के बाद वह वहां से चली आयीं। बात 25 मार्च-1989 की है। तमिलनाडु विधानसभा में बजट पेश किया जा रहा था। इस दौरान कांग्रेस के सदस्य विपक्ष की नेता जयललिता के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताकर हंगामा करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को स्थगित कर दिया। इसके बाद जैसे ही जयललिता सदन से निकलने के लिए तैयार हुईं, डीएमके के एक सदस्य ने उन्हें रोकने की कोशिश की। उसने उनकी साड़ी इस तरह से खींची कि उनका पल्लू गिर गया। जयललिता भी ज़मीन पर गिर गईं। इस घटना के बाद अपमानित जयललिता ने प्रतिज्ञा ली की कि वे उस सदन में तभी कदम रखेंगी, जब वह महिलाओं के लिए सुरक्षित हो जाएगा। वह तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री बनकर वापस आएंगी। उन्होंने यह प्रतिज्ञा पूरी कर दिखाई।
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