सही तिथि और मुहूर्त: इस वर्ष 14 अगस्त को शाम 7.45 बजे अष्टमी तिथि शुरू होगी और 15 अगस्त को शाम 5.39 तक रहेगी
कृष्ण जन्माष्टमी इस बार दो दिन मनाई जाएगी, चूकि भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्रि को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इस तिथि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार 15 अगस्त को जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाएगा। हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाले इस त्यौहार को लेकर लोगों के दिलों में काफी उत्साह होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं की ये त्यौहार क्यों मनाया जाता हैं।
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पौराणिक ग्रथों के मुताबिक़ भगवान विष्णु इस धरती को पापियों से मुक्त करने के लिए भगवान कृष्ण के रूप में अवतरित हुए थे। माता देवकी की कोख से भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी मामा कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में अवतार लिया लेकिन उनका पालन पोषण माता यशोदा ने किया। श्रीकृष्ण बचपन से ही बहुत नटखट थे और उनकी कई सखियां थी। श्री कृष्ण की गोपियों संग रासलीलाएँ बड़े चाव से सुनी और सुनाई जाती हैं।
इस वर्ष 14 अगस्त को शाम 7.45 बजे अष्टमी तिथि शुरू होगी और 15 अगस्त को शाम 5.39 तक रहेगी। इसलिए दोनों ही दिन जन्माष्टमी त्योहार मनाया जा सकता है। व्रत वाले दिन पूरे दिन उपवास रखकर अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि समाप्त होने के पश्चात व्रत पारण का संकल्प लेना चाहिए। हिंदू धर्म में व्रत हमारे आत्मसंयम को ही लक्षित किए गए हैं। हिंदू ग्रंथ धर्मसिंधु के अनुसार जोश्रद्धालु लगातार दो दिनों तक उपवास करने में समर्थ नहीं हैं वे जन्माष्टमी के अगले दिन ही सूर्योदय के पश्चात व्रत तोड़ सकते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन हमें भगवान कृष्ण के जीवन से धैर्य और विपरीत परिस्थितियों में सहज होने का गुण सीखना चाहिए।







