Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 591 प्रेम कभी तपस्या कभी वैराग कभी मन का कोलाहल ख़ुद को हारना , किसी को पाने की जिद्द में … आसान नहीं राह ए वफ़ा पल पल मरना , उसके साथ जीने के लिए .. गीली लकड़ी की तरह ख़ुद में जलते रहना , फ़ना होने की चाह मे !! -अश्मिता सिंह
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terrific article