महाराष्ट्र हिंसा का असर ट्रेनें रोकीं, बस सेवा पर बुरा असर, सड़कों पर सन्नाटा

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धारा 144 लागू, इंटरनेट सेवा बंद, संसद में गूंजा मामला

मुंबई,03 जनवरी। मंगलवार को हुई हिंसा के बाद जल रहा महाराष्ट्र आज भी जलाता रहा। मंगलवार को पुणे के कोरेगांव भीमा इलाके में भड़की जातीय हिंसा के विरोध में बुधवार को बुलाए गए महाराष्ट्र बंद का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। ठाणे में धारा 144 लागू की गई है,जबकि औरंगाबाद में इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। बंद की चलते ट्रेन से लेकर सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। भागती-दौड़ती मुंबई की रफ्तार पर भी खासा असर पड़ा है। यहां के प्रसिद्ध डब्बावाला एसोसिएशन ने बंद के चलते अपनी सेवा बुधवार को रद्द कर दी है।

उधर संसद में भी इस मुददा गूंजा कांग्रेस ने इसे लेकर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। बंद की वजह से पूरे प्रदेश में बस सेवा पर सबसे बुरा असर पड़ा है। पुणे से बारामती और सतारा तक बस सेवा भी अगले आदेश तक के लिए रोक दी गई है। कई अन्य जगहों से भी बसों को रोके जाने की खबरें मिल रही हैं। प्रदर्शनकारी बसों को रोककर उनके पहियों की हवा निकाल रहे हैं। सड़कों पर वाहन कम होने से लोगों को काम पर जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों के आक्रामक रुख को देखते हुए मुंबई के घाटकोपर के रमाबाई कॉलोनी और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे में सुरक्षा बल तैनात किया गया है। ऐहतियात के तौर पर कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच बस सेवा को भी रोक दिया गया है।

वहीं ठाणे रेलवे स्टेशन में आंदोलनकारियों ने ट्रेन रोककर प्रदर्शन किया। जिसके चलते आवाजाही कुछ देर के लिए बाधित हुई। उधर नालासोपारा रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में प्रदर्शकारी रेलवे ट्रैक पर बैठ गए हैं। इसकी वजह से मुंबई की लोकल ट्रेन सेवा प्रभावित हुई है। फिलहाल प्रशासन प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिशों में जुटा हुआ है। हालांकि पुणे में प्रशासन ने दावा किया है कि सभी ट्रेनें सामान्य तरीके से चल रही हैं। आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।

बवाल को देखते हुए मुंबई के ज्यादातर स्कूल भी बुधवार को भी बंद रहे। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी,लेकिन बच्चे काफी कम संख्या में स्कूल पहुंचे। ऐसे में स्कूल प्रशासन उन्हें वापस उनके घर भिजवा रहा है। टीचर भी स्कूल से घर लौट रहे हैं। मुंबई के इतिहास में कम बार ही होता होगा अब डब्बावाले अपना काम बंद रखते हो,लेकिन मंगलवार को हुइ हिंसा के बाद रोजाना 2 लाख लोगों तक खाने का टिफिन पहुंचाने वाले डब्बावाला एसोसिएशन ने बुधवार को अपनी सर्विस बंद रखने का ऐलान किया है। मुंबई में डब्बावाला एसोसिएशन के प्रमुख सुभाष तालेकर का कहना है कि परिवहन के साधन कम होने की वजह से समय पर टिफिन पहुंचाना मुश्किल होगा, ऐसे में उन्हें अपनी सेवा रोकनी पड़ी है।

Posted by श्यामसुंदर बी. मौर्या on Monday, January 1, 2018

पुणे हिंसा का मामला बुधवार को संसद में भी गूंजा है। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने नियम 56 जबकि कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने नियम 267 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। जनअधिकार पार्टी के नेता और बिहार के मधेपुरा से सांसद पप्पू यादव ने भी लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उधर राज्यसभा में सीपीआई नेता डी. राजा ने ‘दलितों के खिलाफ बढ़ते अत्याचार’ के मुद्दे पर शून्य काल नोटिस दिया है।

बता दें भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश आंबेडकर ने महाराष्ट्र बंद की घोषणा की थी जिसका समर्थन महाराष्ट्र लोकतांत्रिक गठबंधन, वामपंथी लोकतांत्रिक गठबंधन, जातिमुक्त आंदोलन परिषद और एल्गार परिषद में शामिल 250 संगठनों के मोर्चे और संभाजी ब्रिगेड ने किया है।

Posted by श्यामसुंदर बी. मौर्या on Monday, January 1, 2018

गौरतलब है कि नए साल के मौके पर सोमवार को पुणे कोरेगांव भीमा इलाके में मराठा और दलितों के बीच एक कार्यक्रम के दौरान हिंसक झड़प हो गई थी। भीमा-कोरेगांव युद्ध के शौर्य दिवस के आयोजन को लेकर हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई। जातीय हिंसा की यह आग मंगलवार को मुंबई सहित महाराष्ट्र के 18 जिलों में फैल गई। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, अहमदनगर, हड़पसर और फुरसुंगी में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। मुंबई में पथराव और रेल रोको, रास्ता रोको के कारण जहां सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। मुलुंड, कुर्ला, चेंबूर और मानखुर्द में दलित बस्तियों वाले इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।

*_भिमा कोरेगाव – २*_ साठी कोण कोण तयार आहे

Posted by Àẞhìjœt Shíñdé on Tuesday, January 2, 2018

 

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