ग्रामीण व किसानों की प्रस्तावित मंहगी बिजली के खिलाफ उपभोक्ता परिषद ने आयोग में दाखिल किया जनहित प्रत्यावेदन, पेश किये अनेकों विधिक साक्ष्य और वृद्धि प्रस्ताव को खारिज करने की उठायी मांग

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  • गाॅंव में ट्रांसफार्मर बदलने का मानक 72 घण्टे व शहर का 24 घण्टे, फिर दर समान क्यों?
  • बजाज एनर्जी का अनुबन्ध खत्म होने के बाद पावर कारपोरेशन उस मद की बिजली किससे कर रहा है खरीद अभी तक उस पर नही दिया जावाव फिर एआरआर स्वीकार क्यों?
  • उपभोक्ता परिषद ने उठाया सवाल कि उदय स्कीम में औसत वृद्धि 6.95 का किया अनुबन्ध फिर औसत वृद्धि 22.66 क्यों?
योगी सरकार के इशारे पर पावर कारपोरेशन द्वारा प्रदेश के ग्रामीण किसानो व शहरी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओ की दरों में अब तक की सबसे बडी वृद्धि प्रस्तावित करने के विरोध में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज नियामक आयोग अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा से मुलाकात कर एक जनहित प्रत्यावेदन सौंपा। उपभोक्ता परिषद द्वारा आयोग के सामने अनेकों विधिक साक्ष्य रखते हुए ग्रामीण घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 260 से 350 प्रतिशत वृद्धि व किसानों की दरों में 60 प्रतिशत वृद्धि को टैरिफ शाक बताते हुए अविलम्ब खारिज करने की मांग उठायी।
उपभोक्ता परिषद द्वारा अपने प्रत्यावेदन में यह मुददा उठाया गया कि बिजली कम्पनियों द्वारा वर्तमान लागू टैरिफ पर अभी कुल 50762 करोड राजस्व प्राप्त होना बताया गया है और टैरिफ बढोत्तरी के आधार पर कुल राजस्व रू0 62262 करोड बताया गया है अर्थात यदि पूरी टैरिफ बढोत्तरी मान ली गयी तो लगभग 11500 करोड का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। जिसमें केवल घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं से बढोत्तरी के पश्चात जो राजस्व प्राप्त होगा वह लगभग 8255 करोड है जिसमें ग्रामीण विद्युत उपभोक्ता से ही केवल 7100 करोड अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो रहा है जो यह दर्शाता है कि पावर कारपोरेशन द्वारा केवल एक श्रेणी के घरेलू ग्रामीण विद्युत उपभोक्ता को टैरिफ शाक दिया गया है। इसी प्रकार किसानों से केवल अतिरिक्त टैरिफ बढोत्तरी के बाद लगभग 871 करोड राजस्व अतिरिक्त प्राप्त होगा ।
कुल मिलाकर यह कहना गलत नही होगा कि पावर कारपोरेशन द्वारा जो टैरिफ बढोत्तरी के पश्चात रू0 11500 करोड का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होना बताया गया है उसमें घरेलू ग्रामीण व किसानों से ही कुल 9126 करोड वसूला जायेगा। जो पूरी तरह न्यायोचित नही है और खारिज करने योग्य है। उपभोक्ता परिषद ने मा0 सुप्रिम कोर्ट /अपटेल के अनेाकेंा पूर्व आदेश के आधार पर आयोग को बताया कि किसी श्रेणी के लिये टैरिफ शाक पूरी तरह गलत है।
आयोग अध्यक्ष ने कहा उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाये गये बिन्दुओं पर आयोग गम्भीर पूरे मामले पर गहन अध्ययन करने के बाद उपभोक्ता हित में लेगा उचित निर्णय।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आज जो प्रत्यावेदन दाखिल किया गया है उसमें यह भी मुददा उठाया गया है कि उदय स्कीम के तहत बिजली कम्पनियों द्वारा जो अनुबन्ध किया गया उसमें वर्ष 2017-18 के लिये औसत 6.95 प्रतिशत वृद्धि की बात कही गयी और अब आयोग में दाखिल प्रस्ताव में कुल औसत वृद्धि 22.66 प्रतिशत बतायी गयी है जो पूरी तरह विरोधाभाषी है। उपभोक्ता परिषद ने अपने प्रत्यावेदन में यह भी सवाल किया कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में रू0 3 प्रति यूनिट में गरीबों को बिजली देने की बात की गयी और अब उनकी दरों में कई गुना वृद्धि यह साबित करती है कि पावर कारपोरेशन को आम जनता व सरकार से कोई डर नही ।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने अपने प्रत्यावेदन में कहा कि पावर कारपोरेशन कहता है कि गाॅंव की जनता 24 घण्टे बिजली लेगी तो शहरी दर पर भुगतान करना पडेगा। क्या केवल बिजली सप्लाई से ही गाॅंव शहर बन जायेगा। आज भी आयोग द्वारा बनाये गये कानून में गाॅंव व शहर के लिए विद्युत सेवा के मानक अलग अलग हैं। ऐसे में पावर कारपोरेशन बिना ज्ञान की बात कर रहा है।
शहर में 24 घण्टे में खराब ट्रांसफार्मर बदलने का कानून है वहीं गाॅंव में 72 घण्टे में। शहर में भूमिगत केवल 24 घण्टे में ठीक करने का प्राविधान है तो गाॅंव में 96 घण्टे। इसी प्रकार सभी सेवा मानकों में भिन्नता है। आज भी गाॅंव का आदमी 35 से 40 किमी चलकर बिजली दप्तर अपने कार्य व बिल जमा करने जाता है लेकिन शहर में गली गली में दप्तर है। गाॅंव में ब्रेक डाउन, ट्रांसफार्मर जलने, खम्भा टूटने पर हप्तों विद्युत आपूर्ति बन्द रहती है। ऐसे में पावर कारपोरेशन 24 घण्टे बिजली देकर गाॅंव को शहर नही बना सकता और इस प्रकार उसकी बातें बेबुनियाद है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा अपने प्रत्यावेदन में यह भी मुददा उठाया गया कि वार्षिक राजस्व आवश्यकता में पावर कारपोरेशन द्वारा बजाज से 1773 करोड की बिजली रू0 7.22 प्रति यूनिट में खरीदना प्र्र्रस्तावित किया था अब जब उसके अनुबन्ध का समाप्त कर दिया गया है तो इसके बदले पावर कार्पोरेशन किससे सस्ती बिजली खरीद रहा है उसके बारे में अभी तक जानकारी नही दी गयी जो स्वतः सिद्ध करता है कि सब घालमेल है।

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