नई दिल्ली, 17 जून : भारत के ओडिशा राज्य में इस समय प्रकृति का एक अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जहां लाखों की संख्या में ओलिव रिडले कछुए अपने वार्षिक प्रजनन के लिए गहिरमाथा और रशिकुल्या समुद्री तटों पर पहुंच रहे हैं। इस घटना को ‘अरिबाड़ा’ के नाम से जाना जाता है, जो विश्व में कछुओं के सामूहिक घोंसला निर्माण की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है।
2025 में रिकॉर्ड तोड़ प्रजनन गतिविधि
हाल की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल जनवरी-फरवरी में रशिकुल्या और गहिरमाथा तटों पर ओलिव रिडले कछुओं की संख्या सामान्य से अधिक देखी गई। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रशिकुल्या तट पर अब तक 5.55 लाख से अधिक अंडे दिए जा चुके हैं। एक मादा कछुआ औसतन 120 से 150 अंडे देती है, जिनसे 45-50 दिनों में बच्चे निकलते हैं। गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य को विश्व का सबसे बड़ा कछुआ प्रजनन स्थल माना जाता है।
सरकारी संरक्षण प्रयास
ओडिशा सरकार और भारतीय तटरक्षक बल (ICG) कछुओं की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम कर रहे हैं। ‘ऑपरेशन ओलिविया’ के तहत, 1991 से हर साल तटरक्षक बल इन लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा के लिए केंद्रीय और राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम करता है। इसके अलावा, ओडिशा वन विभाग ने कछुओं के प्रवास मार्ग को समझने के लिए कुछ कछुओं को टैग कर सैटेलाइट ट्रैकिंग शुरू की है।
कछुओं की सुरक्षा के लिए विशेष कदम
कछुओं को परेशानी से बचाने के लिए डीआरडीओ ने व्हीलर द्वीप पर मिसाइल टेस्टिंग को तीन महीने के लिए स्थगित कर दिया है। साथ ही, हजारों कर्मचारियों को तटों पर तैनात किया गया है ताकि प्रजनन स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते
ओलिव रिडले कछुए समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी वापसी स्वस्थ समुद्री पर्यावरण का संकेत है। तमिलनाडु सरकार की पर्यावरण सचिव सुप्रिया साहू ने इसे “प्रकृति का तमाशा” करार देते हुए कहा कि यह घटना ओडिशा के प्राचीन तटों की जैव विविधता को दर्शाती है।
कछुओं की आबादी में सुधार
हालांकि, तटीय क्षेत्रों में नारियल और कासुआराना के पेड़ों के बागान प्रजनन के दौरान कछुओं की मृत्यु का कारण बन रहे हैं। इसके बावजूद, 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और जागरूकता अभियानों के चलते कछुओं की आबादी में सुधार देखा जा रहा है।
बता दें कि यह प्राकृतिक घटना न केवल पर्यावरणविदों बल्कि स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए भी एक अनूठा अनुभव है। ओडिशा सरकार पर्यटकों से अपील कर रही है कि वे कछुओं को सुरक्षित देखने के लिए सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करें।







