निजी हास्पिटलों की वैधता पर विभाग ने साधी चुप्पी

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जिले के अधिकांश हास्पिटलों के भवन नही नेशनल विल्डिंग कोड के अनुसार निर्मित
हास्पिटलों के पास नही मुख्य अग्नि समन अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी एनओसी

मऊ, 25 अप्रैल। जिले में अवैध हास्पिटलों की भरमार के बावजूद प्रशासन कान में तेल डाले चैन की नींद सो रहा है। निजी हास्पिटलों में अधिकांश के भवन नेशनल विल्डिंग कोड के खिलाफ है तो कुछ नान-जेड-ए की जमीन की खरीदारी कर इलाज के नाम पर मरीजों की पाकेट ढीली कर रहे हैं। सीएमओं दफ्तर हास्पिटलों की इस स्थिति को लेकर मौन साधे नौकरी कर रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी से जब एजेंसी ने जिले में कौन से हास्पिटल की विल्डिंग नेशनल विल्डिंग कोड के तहत है और उसे मुख्य अग्निसमन अधिकारी ने एनओसी जारी की है? के सवाल पर सीएमओं ने चुप्पी साध ली।

विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में चल रहे निजी हास्पिटलों की वैधता को लेकर विभाग मौन साध कर नौकरी करने में अपनी भलाई समझता है। क्योकि यहां पर अधिकांश निजी हास्पिटल के भवन एनबीसी 2005 के खिलाफ है तो वहीं पर अधिकांश हास्पिटलों के भवन के नक्शें भी नियत प्राधिकारी कार्यालय से या तो स्वीकृत नही है और यदि स्वीकृत है तो उस पर भी विवाद है। नाम नही छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि जिले में नान-जेड-ए की जमीन पर जिले के मुख्य सड़क पर संचालित एक हास्पिटल के भवन का नक्शा नेशनल बिल्डिंग कोड कें अनुसार नही बना है और नही अग्निसमन अधिकारी के द्वारा उसे एनओसी जारी की गई बावजूद इसके उसके खिलाफ न तो विभाग कार्यवाही कर रहा है और न ही जिला प्रशासन ऐसे हास्पिटलों के खिलाफ कार्यवाही करने की हिम्मत जुटा पा रहा है।

कौन करेगा मरीजों के हक की चिंता?

कर्मचारी ने कहा कि आज भी यदि विभाग जिले में संचालित हास्पिटलों को लेकर नेशनल विल्डिंग कोड और सीएफओं की एनओसी को लेकर गंभीर हो जाएं तो निजी हास्पिटलों के अधिकांश संचालक जालसाजी में सलाखों के पीछे होंगे। लेकिन सवाल उठता है कि ऐसी जहमत कौन उठाएगा? सभी कही न कही से लाभ की स्थिति में है। कौन करेगा मरीजों के हक की चिंता? मुख्य चिकित्साधिकारी से जब एजेंसी ने इस संबंध में सवाल किया तो वे इस मामले में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। उन्होने कहा कि ये हास्पिटल आज से ही तो नही संचालित हो रहे हैं, आखिर उनसे पहले के अधिकारियों ने क्यो नही कार्यवाही की?

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