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    वन्यजीव पर्यटन के साथ खिलवाड़ और जोखिम भरी सेल्फी

    ShagunBy ShagunJune 17, 2025 ब्लॉग No Comments4 Mins Read
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    सुशील कुमार

    थाईलैंड के फुकेत में टाइगर किंगडम में हाल ही में हुई एक घटना ने एक बार फिर वन्यजीव पर्यटन के खतरों और नैतिकता पर सवाल उठाए हैं। एक भारतीय पर्यटक, जो बाघ के साथ सेल्फी लेने की कोशिश कर रहा था, उस पर बाघ ने हमला कर दिया। यह घटना न केवल व्यक्तिगत लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि उस गहरी समस्या को भी उजागर करती है, जो वन्यजीवों को पर्यटन के लिए शोषण करने की प्रथा से जुड़ी है।

    25 सेकेंड के एक वायरल वीडियो में, पर्यटक को बाघ के साथ चलते और फिर सेल्फी के लिए रुकते देखा जा सकता है। ट्रेनर छड़ी से बाघ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अचानक बाघ ने पर्यटक की गर्दन पर हमला कर दिया। पर्यटक को मामूली चोटें आईं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं बटोरीं, जहां लोग न केवल पर्यटक की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं, बल्कि टाइगर किंगडम जैसे स्थानों की प्रथाओं की भी आलोचना कर रहे हैं।

    थाईलैंड में टाइगर किंगडम जैसे पार्क पर्यटकों को बाघों के साथ करीब से बातचीत करने का मौका देते हैं—उन्हें खिलाने, टहलाने, और तस्वीरें लेने की सुविधा प्रदान की जाती है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक क्रूर सच्चाई छिपी है। इन बाघों को अक्सर नशे के इंजेक्शन देकर सुस्त किया जाता है, ताकि वे पर्यटकों के लिए “सुरक्षित” लगें। गले में पट्टा और छड़ी के सहारे इन जंगली जीवों को पालतू जानवरों की तरह पेश किया जाता है, लेकिन जैसा कि फुकेत की घटना से स्पष्ट है, जंगल का राजा अपनी वास्तविक प्रकृति को लंबे समय तक दबा नहीं सकता। नशा उतरते ही, या तनाव बढ़ने पर, ये जीव अपने शिकारी स्वभाव को दिखा देते हैं।

    यह पहली बार नहीं है जब टाइगर किंगडम विवादों में आया है। 2014 में भी एक ऑस्ट्रेलियाई पर्यटक पर बाघ के हमले के बाद इसकी एक शाखा को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था। इसके बावजूद, ऐसे पार्क आज भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं, खासकर उन भारतीय पर्यटकों को, जो सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं। एक यूजर ने टिप्पणी की, “यह वीडियो एक खतरनाक प्रवृत्ति को उजागर करता है: कई भारतीय पर्यटक थाईलैंड में बाघों के साथ जोखिम भरी तस्वीरें लेने के लिए प्रलोभित होते हैं, अक्सर सामाजिक दबाव के कारण।”

    हालांकि, इस घटना में दोष केवल पर्यटक का नहीं है। टाइगर किंगडम और ऐसे अन्य पार्क, जो वन्यजीवों को पर्यटन के लिए इस्तेमाल करते हैं, इस समस्या की जड़ में हैं। बाघ जैसे शक्तिशाली और स्वाभाविक रूप से जंगली जीव को कैद में रखना, उन्हें नशे में डुबोना, और पर्यटकों के साथ जबरन बातचीत करवाना न केवल क्रूरता है, बल्कि खतरनाक भी है। PETA जैसी संस्थाओं ने लंबे समय से इन प्रथाओं की निंदा की है, और फुकेत की घटना के बाद उन्होंने फिर से टाइगर किंगडम में बाघों के साथ बातचीत पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

    दूसरी ओर, टाइगर किंगडम और फुकेत के टाइगर पार्क ने दावा किया है कि यह घटना उनकी सुविधाओं पर नहीं हुई, बल्कि चोनबुरी के सिराचा में हुई। यह दावा सही हो या नहीं, यह तथ्य नहीं बदलता कि वन्यजीव पर्यटन की ऐसी प्रथाएं विश्व स्तर पर विवादास्पद हैं। ये पार्क न केवल जानवरों के कल्याण को नजरअंदाज करते हैं, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा को भी खतरे में डालते हैं।

    यह घटना हमें कई सबक देती है। पहला, पर्यटकों को अपनी सुरक्षा और जंगली जीवों की प्रकृति के प्रति अधिक जागरूक होना चाहिए। सेल्फी की चाह में जान जोखिम में डालना नासमझी है। दूसरा, हमें वन्यजीव पर्यटन के नैतिक पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना होगा। क्या हमें ऐसे पार्कों का समर्थन करना चाहिए, जहां जानवरों को उनके स्वाभाविक व्यवहार से वंचित किया जाता है? और तीसरा, सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को ऐसी प्रथाओं पर सख्त नियम लागू करने की आवश्यकता है, ताकि न तो जानवरों का शोषण हो, न ही इंसानों की जान खतरे में पड़े।

    फुकेत की यह घटना एक चेतावनी है जो न केवल पर्यटकों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए जो वन्यजीवों को मनोरंजन का साधन मानते हैं। बाघ जंगल का राजा है, और उसकी गरिमा का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है। आइए, हम ऐसी पर्यटन प्रथाओं का बहिष्कार करें और प्रकृति के साथ संतुलित और सम्मानजनक रिश्ता बनाएं।

    Shagun

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