नदी, पोखरों या झीलों में उन्मुक्त और पानी में छपाक-छपाक करते हुए नहाने तैरने का मजा कुछ ही है। इसी मजे को ऊंचे दामों पर बेचने के लिए तमाम उपकरणों से सुसज्जित वाटर पार्क का कारोबार भी खूब चल निकला है। धनाढ्य और उच्च मध्य वर्ग के लिए यह स्टेटस सिंबल भी बन गया है। किंतु ऐसा आनंद उठाने का चलन सदियों से चल रहा है। नदियों – नहरों, तालाबों-पोखरों में लोग पहले भी स्नान और तैराकी का आनंद लेते थे और आज भी इस शौक में कोई कमी नहीं आई है।
गांवों-कस्बों से लेकर बड़े-बड़े शहरों रमणीक पर्यटक स्थलों की नदियों में उतर जाना कई बच्चों-किशोरों- अधेड़ पुरुषों के मनोरंजन का प्रमुख पक्ष है। वे वहां नहाते हैं और तैराकी में रोमांच भी महसूस करते हैं। अब जैसा कि नई पीढ़ी के बीच किसी काम को लेकर खतरों के जोखिम की ज्यादा फिक्र न करने की आदत बढ़ती जा रही है तो वहीं लापरवाही वह तैराकी के दौरान करते हैं क्योंकि ‘रोमांच के कामों में जोखिम की परवाह’ वे नहीं करते।
नतीजा यह है कि उत्साह व शेखी से भरकर गहरे पानी में जानबूझकर या अनजाने में उतर जाने के बाद उनमें से ज्यादातर का पता नहीं चलता। पता लगता भी है तो यह कि फलां का शव मिल गया है। बच्चों या किशोरों की नादानी तो समझी जा सकती है पर बड़े भी इसका शिकार हों तो आश्चर्य होता है, तरस आता है।
जानकारी के अनुसार नैनीताल के मूसाताल में दो पर्यटकों की मौत हो गयी। बताया जाता है कि पठानकोट से कुल आठ लोग भीमताल से मूसाताल के लिए निकले थे जिनमे चार युति और चार युवक थे, सी ग्रुप से साहिल और प्रिन्स यादव ताल में नहाने उतरे थे जो गहरे पानी में डूब गए। सूचना पाकर पुलिस ने दो दोनों शवों को काफी मशक्कत से बाहर निकाला।
ऐसे हादसे मन को झकझोर देते हैं:
यह हादसा बेहद दुखद है। नौजवानों का उत्साह में बहकर जोखिम उठाना और फिर ऐसे हादसों का शिकार होना मन को झकझोर देता है। खासकर सेना के जवानों, जो खतरों से वाकिफ होते हैं, उनके साथ ऐसा होना और भी पीड़ादायक है। मूसाताल की इस घटना काफी दुखद है। शगुन न्यूज़ इंडिया डॉट कॉम मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करती है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए समाज में जागरूकता और सावधानी बेहद जरूरी है।
ऐसे ही हादसों की कड़ी में नैनीताल के भीमताल में अपनी महिला मित्रों के साथ सैर सपाटे को गए वायुसेना यूनिट में तैनात दो जवानों की मूसाताल में डूबने से मौत हो गई। सेनाओं के जवान वैसे तो खतरों से खेलने के आदी होते हैं लेकिन जोखिमों पर बराबर नजर भी रखते हैं। भीमताल में ऐसा अभी तक नहीं हुआ।
यह शौक और शेखी की ऐसी विडंबना है जो कई युवकों की असमय ही जान ले रही है। ऐसे में सवाल यही है कि इस समस्या से कैसे निपटा जाए। स्वाभाविक तो यही है कि एक ओर युवकों को ऐसे खतरों के बारे में पहले से ही लगातार सतर्क किया जाए और वे अपनी तरफ से भी अपने शौक को पूरा करने के बारे में जागरूक रहें।






