नई दिल्ली, 18 जून : ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसमें अमेरिका की भूमिका और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं।
इस मामले में क्या हैं ताजा अपडेट, आइये समझते हैं :
ट्रम्प का G7 छोड़ने पर बयान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका G7 शिखर सम्मेलन (कनाडा) छोड़कर वाशिंगटन लौटने का इजरायल-ईरान युद्धविराम से कोई संबंध नहीं है। ट्रम्प ने इसे “कहीं बड़ा मुद्दा” बताया, जिससे अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सैन्य कार्रवाई की योजना बना सकता है। ट्रम्प ने पहले X पर दावा किया था कि “ईरान के आसमान पर हमारा कब्जा है,” और चेतावनी दी थी कि ईरान के खिलाफ “पहले कभी न देखा गया” हमला हो सकता है।
अमेरिकी सैन्य तैयारियां: पेंटागन ने पुष्टि की कि मध्य पूर्व में अतिरिक्त 2,000 सैनिक, विमानवाहक पोत, और F-35 जेट्स तैनात किए गए हैं। ट्रम्प ने ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए कड़ा रुख अपनाया और कहा कि अगर तेहरान ने समझौता नहीं किया, तो उसका तेल निर्यात “शून्य” कर दिया जाएगा। X पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की योजना बना रहे हैं, लेकिन यह सत्यापित नहीं है।
ईरान में फंसे भारतीय छात्रों की निकासी: भारत ने ईरान में फंसे अपने नागरिकों, खासकर छात्रों, की निकासी शुरू कर दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के कई एमबीबीएस छात्रों को ईरान के उर्मिया शहर से आर्मेनिया सीमा के जरिए निकाला गया है। लगभग 1,500 भारतीय छात्र, जिनमें से अधिकांश उर्मिया और तेहरान में पढ़ाई कर रहे हैं, अभी भी ईरान में हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान के हवाई अड्डे बंद हैं, लेकिन लैंड बॉर्डर खुले हैं। निकासी के लिए छात्रों को पासपोर्ट, वाहन विवरण, और बॉर्डर जानकारी ईरानी जनरल प्रोटोकॉल विभाग को देनी होगी। भारत ने ईरान और इजरायल में अपने नागरिकों के लिए यात्रा एडवाइजरी को और सख्त कर दिया है।
क्या है युद्ध की स्थिति: ईरान ने तेल अवीव में मोसाद हेडक्वार्टर और ग्लीलोट में अमान के लॉजिस्टिक सेंटर पर ‘हाज कासिम’ बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया, जिसमें कई इजरायली अधिकारियों के मारे जाने का दावा किया गया। इजरायल ने जवाब में तेहरान और नतांज परमाणु केंद्र पर हवाई हमले किए, जिसमें ईरानी डिप्टी कमांडर मेजर जनरल अली शादमानी और छह परमाणु वैज्ञानिकों की मौत की खबर है। दोनों पक्षों ने भारी नुकसान का दावा किया है, जिसमें ईरान में 244 और इजरायल में 24 लोगों के मारे जाने की असत्यापित खबरें हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: G7 और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर आपातकालीन बैठक की चर्चा हो रही है। कनाडा, ब्रिटेन, और अन्य देशों ने अपने नागरिकों को ईरान और इजरायल छोड़ने की सलाह दी है। ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने X पर इजरायल को “आतंकी यहूदी शासन” करार दिया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
उधर ट्रम्प के बयानों और अमेरिकी सैन्य तैनाती से संकेत मिलता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर है। भारत की निकासी प्रक्रिया से पता चलता है कि क्षेत्र में स्थिति गंभीर बनी हुई है। यह संघर्ष अब केवल इजरायल-ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका की भागीदारी और क्षेत्रीय शक्तियों के हस्तक्षेप से वैश्विक युद्ध का खतरा बढ़ रहा है। X पर कुछ दावे, जैसे 200 से अधिक मिसाइलों के हमले, अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं।







