लखनऊ, 16 जून : बाबा नीब करौरी के कैंचीधाम में स्थापना दिवस के अवसर पर आस्था व भक्ति का ज्वार उमड़ पड़ा। भक्तों की इतनी जबरदस्त भीड़ हाल के वर्षों में यहां पहली बार देखी गई। भगवान भास्कर के उदय होते ही हल्द्वानी-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित बाबा नीब करौरी महाराज के कैंचीधाम का मुख्य गेट सुबह पांच बजे खुला तो ऐसा लगा मानों आस्थावान इसी पल की बांट जोह रहे थे। हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। देर रात व तड़के से ही भक्त लंबी-लंबी लाइनों में लगकर, बाबा की एक झलक पाने को आतुर थे। बाबा के दर्शन को तकरीबन करीब दो से तीन किलोमीटर लंबी लाइन लगी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रशासन व पुलिस की ओर से इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा व व्यवस्था बनाने के लिए 500 से अधिक स्वयंसेवकों ने कमान संभाल रखी है।
कैंचीधाम में बाबा नीब करोरी महाराज के श्रद्धालुओं का रेला देखते हुए जिला प्रशासन ने भवाली से कैंचीधाम तक जीरो ट्रैफिक प्लान लागू कर दिया था। इस बार मेला का दिन रविवार होने के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ कुछ ज्यादा ही रही।
श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ को देखते हुए प्रबंध भी चाक चौबंद किए गए। भवाली और भीमताल क्षेत्र में ही वाहन पार्क कराए गए ताकि पैदल यात्रियों को दिक्कत न हो। पहाड़ को जाने व आने वाले वाहनों का रूट बदला गया।
ब्रजभूमि यानी आगरा और मथुरा से कैंचीधाम आये कारीगरों के दल द्वारा निर्मित सुस्वादु महाप्रसाद मालपुआ पाने के लिए श्रद्धालुओं को इस बार ज्यादा असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। देर शाम तक आज मालपुआ बनाने का काम चलता रहा। इस बार छह लाख से अधिक मालपुआ बनाये गए। मंदिर के प्रवेश द्वार पर प्रसाद के वितरण की व्यवस्था की गई। अनुमान है कि इस बार मेला में बाबा के लाखों भक्त कैंची धाम पहुंचे। विभिन्न सामाजिक एवं स्वैच्छिक संगठनों ने भक्तों से पहले ही अपील की थी कि वह धाम और इर्दगिर्द के इलाकों में प्लास्टिक और अन्य किसी भी प्रकार का कूड़ा कचरा न फैलाएं।
कैंचीधाम आश्रम में हनुमान जी और अन्य मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा अलग वर्ष में 15 जून को हुई थी। यही कारण है कि प्रतिवर्ष 15 जून को कैंचीधाम का स्थापना दिवस मनाया जाता है। बाबा नीब करोरी महाराज ने स्वयं कैंची धाम की प्रतिष्ठा के लिए 15 जून का दिन तय किया था। महाराज जी ने 10 सितंबर 1973 को महासमाधि ली और शरीर त्याग दिया। उनकी अस्थियां कैंची धाम में स्थापित हैं। 1974 में बाबाजी के मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया गया। यहां नीब करोरी महाराज जी को गुरु मूर्ति के रूप में स्थापित किया गया है।
दिल्ली से आए श्रद्धालु ने साझा किया अपना अनुभव। कहा कि “व्यवस्था बहुत अच्छी रही, बाबा जी के दर्शन शांति और सहजता से हुए।”







