आॅपरेशन स्माइल के तहत 70,000 से ज्यादा बच्चे बचाए गए: राजनाथ

0
493

नयी दिल्ली, 26 सितंबर : केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि गृह मंत्रालय की विशेष पहल के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में 70,000 से ज्यादा लापता बच्चों को बचाया गया है ।
बाल एवं वयस्क श्रम पर यहां एक सेमिनार को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने यह भी कहा कि देश 2022 तक बाल श्रम से निजात पाने की कोशिश करेगा ।
उन्होंने कहा, गृह मंत्रालय ने लापता बच्चों का पता लगाने के लिए आॅपरेशन स्माइल शुरू किया है । अब तक 70,000 से ज्यादा लापता बच्चों को बचाया गया है ।
गृह मंत्रालय ने जनवरी 2015 में आॅपरेशन स्माइल शुरू किया था ताकि लापता बच्चों को ढूंढ कर या बचाकर उनका पुनर्वास किया जा सके । इसके बाद से राज्य सरकारों की सक्रिय मदद के जरिए यह कार्यक्रम चल रहा है ।
राजनाथ ने कहा कि बचपन ईश्वर का सबसे बडा उपहार है, लेकिन बाल श्रम में फंस जाने वाले बच्चे इस खूबसूरत तोहफे से महरूम रह जाते हैं ।
उन्होंने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा, हम बाल श्रम मुक्त भारत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं । अगले पांच साल में हम बाल श्रम से निजात पाने की कोशिश करेंगे । साथ मिलकर भारत को 2022 तक बाल श्रम मुक्त बनाने की प्रतिज्ञा करें ।
इस सेमिनार में पेंसिल नाम के एक वेब पोर्टल की भी शुरूआत हुई । इस पोर्टल के जरिए बाल श्रम पर लगाम लगाने के लिए काम कर रहे सभी हितधारकों को जोडा जा सकेगा ।
पेंसिल (प्लैटफॉर्म फॉर इफेक्टिव एनफोर्समेंट फॉर नो चाइल्ड लेबर) वेब पोर्टल से राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एनसीएलपी) के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी । इसे श्रम मंत्रालय की ओर से विकसित किया गया है ।
इस पोर्टल को तब तैयार किया गया जब बाल श्रम से जुडे कानूनी प्रावधानों और एनसीएलपी के प्रभावी क्रियान्वयन एवं निगरानी के लिए एक ठोस तंत्र बनाने की जरूरत महसूस हुई । श्रम का विषय समवर्ती सूची में है और इससे जुडे प्रावधानों को लागू करना मोटे तौर पर राज्य सरकारों पर निर्भर करता है ।
श्रम मंत्रालय ने कहा कि ऐसा महसूस किया गया कि केंद्र को राज्य सरकारों, जिलों एवं सभी परियोजना समितियों से जोडने वाला आॅनलाइन पोर्टल क्रियान्वयन का तंत्र मुहैया कराएगा । इसी पृष्ठभूमि में आॅनलाइन पोर्टल पेंसिल का विचार सामने आया ।
पेंसिल पोर्टल में पांच पहलू – बच्चों का पता लगाने की प्रणाली, शिकायत करने की व्यवस्था, राज्य सरकार, राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना एवं सबका मेल – शामिल हैं ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here