पाकिस्तान बोला : हमारा सब्र खत्म हो गया है, पाकिस्तान का आरोप : अफगान तालिबान सरकार भारत के प्रभाव में काम कर रही है
नई दिल्ली, 1 मार्च 2026 : पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव अब खुले युद्ध में बदल चुका है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने शुक्रवार (27 फरवरी) को सोशल मीडिया पर बयान दिया कि “हमारा सब्र खत्म हो गया है। अब यह हमारे और अफगानिस्तान के बीच ओपन वॉर है।” इस घोषणा के साथ पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल, कंधार, पक्तिया और अन्य प्रांतों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसमें तालिबान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
पाकिस्तान का मुख्य आरोप है कि अफगान तालिबान सरकार भारत के प्रभाव में काम कर रही है और पाकिस्तान में सक्रिय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे आतंकी समूहों को शरण दे रही है, जिससे पाकिस्तान में आतंकी हमले बढ़े हैं। हालांकि, तालिबान ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वे हमेशा बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाना चाहते हैं।
हालिया घटनाक्रम के अनुसार –
पाकिस्तान के हमले: 21-22 फरवरी से शुरू हुए हवाई हमलों में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई प्रांतों (नंगरहार, पक्तिका, खोस्त) में टीटीपी के कैंपों को निशाना बनाया। 27 फरवरी को काबुल और कंधार पर हमले किए गए, जो तालिबान के राजनीतिक केंद्र हैं।
पाकिस्तानी सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने दावा किया कि अब तक 46 ठिकानों पर हमले हो चुके हैं, जिसमें 350+ तालिबान लड़ाके मारे गए और 500+ घायल हुए।
अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई: तालिबान ने पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर हमले किए और दावा किया कि उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों को नुकसान पहुंचाया। रविवार (1 मार्च) को काबुल के ऊपर पाकिस्तानी जेट्स पर फायरिंग की गई। अफगानिस्तान ने बगराम एयर बेस पर पाकिस्तानी हमले को नाकाम बताया।
घोषणा का बैकग्राउंड: यह संघर्ष पिछले महीनों से बढ़ रहा था, जिसमें टीटीपी के हमलों के जवाब में पाकिस्तान ने पहले भी सीमित हवाई कार्रवाई की थी। लेकिन अब पहली बार पाकिस्तान ने तालिबान सरकार को सीधे निशाना बनाया और “ओपन वॉर” का ऐलान किया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं : दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील
संयुक्त राष्ट्र और कई देशों (ईरान, कतर, सऊदी अरब) ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत की अपील की है।
भारत ने पाकिस्तानी हमलों की निंदा की है और अफगानिस्तान की संप्रभुता का समर्थन किया है, खासकर रमजान के महीने में हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
अमेरिका ने पाकिस्तान का पक्ष लिया है, जबकि क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष सीमित रहेगा, लेकिन लंबा खिंच सकता है।
यह संघर्ष दुर्गम दुर्गम लाइन (Durand Line) पर पुराने विवादों, टीटीपी की गतिविधियों और क्षेत्रीय प्रभाव की लड़ाई से जुड़ा है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल है, और स्थिति तेजी से बदल रही है।






