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    Home»खबर कोर्ट से

    मेडिकल घोटाले को लेकर चीफ जस्टिस पर आरोप लगाए प्रशांत भूषण ने

    ShagunBy ShagunJanuary 17, 2018 खबर कोर्ट से No Comments3 Mins Read
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    प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस घोटाले में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की भूमिका की जांच होनी चाहिए

    नई दिल्ली, 17 जनवरी। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने एक बार फिर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर मेडिकल घोटाले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशांत भूषण ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस घोटाले में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

    जजों के कोलेजियम को सीजेआई के खिलाफ मिली शिकायतों पर गौर करना चाहिए. भूषण ने कहा, प्रधान न्यायाधीश ने हाइकोर्ट के जज पर मामला दर्ज करने की इजाज़त नहीं दी. जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किसी हाईकोर्ट जज के खिलाफ एफआईआर के लिए प्रधान न्यायाधीश की इजाज़त चाहिए।

    इसके आगे उन्होंने कहा कि विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि सीबीआई के अफसर 16 दिसंबर 2017 को प्रधान न्यायाधीश से मिले थे. अफसरों के पास कुछ पुख्ता सबूत थे. जिनके चलते जस्टिस शुक्ला के खिलाफ एक कम से कम करोड़ रिश्वत का मामला बनता है।

    ऐसा पहली बार नहीं है, जब प्रशांत भूषण ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ निशाना साधा हो। इससे पहले भी प्रशांत भूषण और सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश के बीच कोर्ट में तब तीखी बहस हो गई थी, जब दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच जजों की एक बेंच ने दो जजों (जिसमें सीजेआई पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले जस्टिस चेलमेश्वर शामिल थे) वाली सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच के फैसले को बदल दिया था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम पर रिश्वतखोरी से जुड़ा हुआ था।

    दरअसल यह मामला उड़ीसा हाई कोर्ट के रिटायर जज आई एम कुद्देशी से जुड़ा हुआ है. कुद्देशी के ऊपर आरोप है उन्होंने अपने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए घूस ली थी. सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है. इस मामले में यह भी आरोप है कि कई सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम पर भी घूस ली गई है। प्रशांत भूषण इस मामले में एनजीओ ‘कैंपेन फॉर जूडिशियल एकाउंटैबिलिटी’ और याचिकाकर्ता कामिनी जायसवाल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

    प्रशांत भूषण और एनजीओ ने मांग की थी कि इस मामले की जांच सीबीआई की जगह कोई अन्य एसआईटी बनाकर कराई जाए. भूषण ने कहा था कि सीबीआई पर उन्हें भरोसा नहीं है. इसी याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस चेलमेश्वर की बेंच ने कहा था कि इस मामले की सुनवाई संविधान पीठ या पांच जजों की बेंच करे. यह मामला दो जजों के सामने सुनवाई के लिए आने वाला था।

    इसके बाद सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुआई वाली 5 जजों की गठित बेंच ने जस्टिस चेलमेश्वर की बेंच को रद्द कर दिया था. इस बेंच ने कहा- ‘सीजेआई सुप्रीम कोर्ट के मुखिया हैं. उनके आवंटन के बिना कोई बेंच केस नहीं सुन सकती।’

    प्रशांत भूषण पांच जजों के बेंच के फैसले से संतुष्ट नहीं थे. मामले पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सहित अन्य जजों और याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बीच गर्मा-गर्म बहस हुई.
    भूषण ने अपनी आवाज तेज करते हुए चीफ जस्टिस से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने को कहा, क्योंकि सीबीआई की एफआईआर में कथित तौर पर उनका भी नाम है।

    सीजेआई ने बदले में भूषण से प्राथमिकी की सामग्री को पढ़ने को कहा और उन्हें अपना आपा खोने के खिलाफ चेतावनी दी. भूषण के साथ याचिकाकर्ताओं में से एक अधिवक्ता कामिनी जायसवाल भी थीं.

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