- कल से चलने वाली विधान सभा के मद्देनजर उपभोक्ता परिषद ने सभी राजनैतिक पार्टियों के माननीय जनप्रतिनिधियों से ग्रामीण व किसानों की अब तक की सबसे बड़ी बिजली दर वृद्धि को वापस दिलाने हेतु विधान सभा में आवाज उठाने की, की मांग
- उपभोक्ता परिषद का बड़ा हमला कहा यह सरकार की कैसी नीति कि घर-घर बिजली का सपना लालटेन युग की ओर
- घर-घर बिजली महंगी बिजली पर केन्द्र व उप्र सरकार दोनों करे विचार क्या इससे किसानों व ग्रामीणों का होगा भला
लखनऊ 13 दिसम्बर। प्रदेश के ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 67 से 150 प्रतिशत किसानों की दरों में लगभग 50 प्रतिशत व आम घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि जिसको लेकर पूरे प्रदेश के किसान लगातार आन्दोलित है और आय दिन धरना प्रदर्शन कर रहें हैं। ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में किसानों व ग्रामणों की अब तक की सबसे बड़ी बिजली दर वृद्धि पर सरकार की चुप्पी काफी चिन्तनीय है। उपभोक्ता परिषद ने जनहित में प्रदेश की सभी राजनैतिक पार्टियों से मांग की है कि वह कल से चलने वाली विधान सभा में ग्रामीण किसानों व आम जनता की बढ़ी बिजली दर को वापस कराने हेतु सरकार पर दबाव बनाये उपभोक्ता परिषद ने सत्ता पक्ष सहित विपक्षी पार्टियों के सभी माननीय जनप्रतिनिधियों से यह मांग उठाई है कि वर्तमान में ग्रामीण व किसान संकट के दौर से गुजर रहा है ऐसे में सभी का नैतिक दायित्व है कि वह विधान सभा में इस मुद्दे को जोर शोर से उठाये।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विगत वर्षों में जब किसानों व ग्रामीणों की दरों में विद्युत नियामक आयोग द्वारा मनमाने तरीके से वृद्धि की गयी थी तो उपभोक्ता परिषद के अनुरोध पर दो बार भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष श्री लक्ष्मी कांत बाजपेई अपनी पूरी टीम लेकर आयोग में धरने पर बैठ गये थे। बिजली दर वृद्धि का मुद्दा उस समय भी विधान सभा में खुब छाया रहा अब जब अब तक की सबसे बड़ी इतिहासिक वृद्धि के चलते प्रदेश का ग्रामीण व किसान बेहाल है तो सत्ता पक्ष की चुप्पी अपने आपमें बड़ा सवाल है यह देश की विडम्बना है जब राजनैतिक पार्टियां विपक्ष में रहती हैं तब उन्हें आम जनमानस के हितों पर बहुत चिन्ता होती है सत्ता में पहुंचते ही वह यह भूल जाती हैं कि आम जनमानस की समस्या उनके लिये कोई मायने नहीं रखती।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि यह कैसी निति है कि एक तरफ सरकार हर घर को बिजली देने का अभियान चला रही है और दूसरी तरफ यह कहना गलत नहीं होगा कि घर-घर बिजली महंगी बिजली का अभियान भी चालू है जिसके चलते आने वाले में समय में गरीब आम जनमानस व किसानों को लालटेन युग में ले जाने से कोई नहीं रोक पायेगा सबको 24 घंटे बिजली देने के नाम पर उद्योगपतियों के बन्द पड़े पावर हाउस तो स्वतः चल जायेंगे लेकिन ग्रामीण व किसान तबाही के रास्ते पर पहूंच जायेगा अभी समय है देश व राज्य की दोनो सरकारों को इस मुद्दे पर गम्भीरता से विचार कर बिजली दर वृद्धि को वापस लेना चाहिए।







