20 नवम्बर: आज अन्तर्राष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस
लखनऊ, 20 नवम्बर 2017, लखनऊ!’ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी’ ने आज बंथरा बाजार सिकंदरपुर, सरोजिनी नगर, लखनऊ मे अन्तर्राष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस के अवसर पर ‘बच्चों के मानव अधिकार’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा की शुरुआत जागरूकता मार्च से हुई जिसमे बच्चों ने हाथ में तख्तियों के साथ मार्च कर बालको के साथ हो रहें भेदभाव और हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए कार्यक्रम शुरु किया।
परिचर्चा में श्री अंशुमान सिंह राज्य समन्वयक वीडियों वालेंटियर ने कहा बच्चों के अधिकार से जुड़ें अनगिनत क़ानून बने होने के बाद भी आज सबसे ज्यादा बच्चों के साथ ही हिंसा हो रही हैं “बच्चे आज ना तो घर में सुरक्षित हैं ना ही बाहर” हम बच्चों के भावनाओं को समझने के बजाय उनकी आवाज और उनके अधिकार को दबाने का काम किया जा रहा हैं।

बच्चों के साथ हो रहें भेदभाव, उत्पीडन,हिंसा,लैंगिक हिंसा, शोषण,बाल तस्करी,बाल मजदूरी,बाल विवाह जैसे गंभीर अपराध से उनके ऊपर बहुत बुरा असर पड़ रहा हैं जिसके कारण बच्चों के भविष्य के साथ साथ पूरे समाज पर इसका बुरा असर हो रहा हैं जो काफी चिंता का विषय है।
की बाल अधिकार क़ानून का सही पालन हो ताकि बच्चों के जीवन जीने के अधिकार,शिक्षा का अधिकार, संरक्षण का अधिकार,स्वतंत्रता का अधिकार,सहभागिता का अधिकार को सुनिश्चित कर बच्चों के भविष्य के साथ-साथ स्वच्छ समाज और बेहतर भारत का निर्माण हो।
माधुरी चौहान ने कहा की बच्चों के बहुत सारे आधिकार है आज बहुत घरों में बच्चों के अधिकारो का दमन हो रहा है वहीं बड़े अक्सर अपने अधिकारों के बारे में बहुत जागरूक रहते हैं।
उन्हें अपने सामाजिक,आर्थिक,व्यावसायिक सभी अधिकारों की जानकारी होती है और वे अपने अधिकारों का उपयोग करते भी हैं। अधिकारों का जरा-सा हनन होने पर आवाज भी उठाते हैं। जबकि जाने-अनजाने में बच्चों के कई अधिकारों का हनन करते हैं। हर बच्चे को भोजन और सेहत के अधिकार के साथ ही खुशनुमा माहौल में रहने का और पूर्ण सुरक्षा पाने का भी अधिकार है। कई बार बच्चों के इन अधिकारों का हनन होता है और वे सब कुछ समझते हुए भी मन की बात कह नहीं पाते हम उन अभिभावकों से अपील करता हू कि वह बच्चों के अधिकारों का संरक्षण करें।
शिक्षा से वंचित बच्चों के बीच शिक्षा की रोशनी जगाने वाली ह्यूमन राईट मानिटरिंग कमेटी की विनीता थारू ने कहा की यूं तो सभी माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर परवरिश देने का दावा करते हैं और प्रायः माता-पिता जिस तरीके से बच्चों का पालन करते हैं, उन्हें लगता है की वह बच्चों को सभी अधिकार दे रहे है लेकिन ज्यादातर घरों में ऐसा होता नहीं हैं! संविधान में दिए गए अधिकारों की जानकारी बहुत कम बच्चों की होती है। बाल अधिकार देश के हर बच्चे को प्राप्त अधिकार हैं जिसमें उन्हें शिक्षा बच्चों को घर-परिवार के साथ समाज में रहने और स्वस्थ विकास के लिए दिए गए अधिकारों की जानकारी सभी बच्चों को मिले उसका ठोस उपाय सरकार को करनी चाहिए। आज के दिन पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस मनाया जाता है और पालकों को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास करता है।
नागरिक अधिकार संगठन के हरिशंकर गुप्ता ने कहा की बच्चों के लिए शिक्षा विकास की पहली सीढ़ी है। शिक्षा पाना हर बच्चे का अधिकार है। हर बच्चे को प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने का अधिकार है। उसके पहले स्कूल छुड़वाना गलत है। सरकारी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा के साथ मध्यान्ह भोजन, यूनिफार्म और पुस्तकें भी प्रदान की जाती हैं। देश का हर बच्चा शिक्षा पाने का अधिकारी हैं.
उन्होंने ये भी कहा की स्वस्थ रहने का हर बच्चे का अधिकार है। अगर किसी कारण से उसका स्वास्थ्य खराब होता है तो उसे तुरंत और उचित उपचार पाने का अधिकार है। कई पालक बीमारी में उपचार के बजाए अन्य उपायों जैसे झाड़ फूंक या अंधविश्वासों पर ध्यान देते हैं जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। उपचार के लिए लड़के-लड़की में किसी प्रकार का भेद करना भी गलत हैं। सभी को समय पर उपचार पाने का अधिकार है।
हयूमन राइट मानिटरिंग कमेटी के अमित ने कहा की बच्चों के विकास में सीखना बहुत अहम है। बच्चों के करके सीखने की प्रक्रिया में कई बार उनसे गलती हो जाती है, जो कि स्वाभाविक है। ऐसे में प्रायः माता-पिता उन्हें सजा देते है। जो कि गलत है। बच्चों से गलती अनजाने में होती है। उन्हें आगे गलती न करने और कार्य बेहतर तरीके से करने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए। बच्चों को मारना या हिंसा करना भी बच्चों के अधिकार के खिलाफ है। हर बच्चे को सुरक्षा पाने का अधिकार है। उसके साथ किसी प्रकार की हिंसा न हो। कोई उसका यौन शोषण न करे। बच्चे का अधिकार है कि वह स्वस्थ सामाजिक वातावरण में विकास करे। साथ ही घर का वातावरण सुरक्षित और खुशनुमा हो यह भी पालकों की जिम्मेदारी है
परिचर्चा के बाद लगभग 100 बच्चे और उनके अभिभावकों ने बाल हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने और अपने बच्चों को रिगुलर स्कूल जाने की शपथ लिए






