उदय स्कीम त्रिपक्षीय समझौते के विपरीत UPPCL ने दिया व्यापक बढोत्तरी का प्रस्ताव: उपभोक्ता परिषद

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  • व्यापक विद्युत वृद्धि प्रस्ताव पर उपभोक्ता परिषद ने मा. मुख्यमंत्री जी से हस्तक्षेप की उठायी मांग
  • उप्र सरकार, पावर कारपोरेशन व भारत सरकार ने उदय स्कीम के तहत किया त्रिपक्षीय समझौता उसके विपरीत अब सरकार की छवि धूमिल करने पर पावर कारपोरेशन उतारू क्यों?
  • उदय स्कीम के तहत त्रिपक्षीय समझौते के विपरीत पावर कारपोरेशन ने की व्यापक बढोत्तरी का दिया प्रस्ताव जो प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के साथ बडा धोखा
  • उदय स्कीम के तहत वर्षवार 2019-20 तक बिजली दर में प्रस्तावित बढोत्तरी व एटीसी हानियों को किया गया था प्रस्तावित उसके विपरीत पावर कारपोरेशन ने क्यों उठाया जन विरोधी कदम
  • टैरिफ प्रस्ताव में पावर कारपोरेशन ने माना कि दरों में वृद्धि उदय स्कीम के तहत उसके विपरीत 3 गुना औसत वृद्धि का दिया प्रस्ताव

लखनऊ, प्रदेश के ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 260 से 350 प्रतिशत वृद्धि पर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आज एक बडा खुलासा करते हुए पावर कारपोरेशन द्वारा उपभोक्ताओं को धोखा दिये जाने का आरोप लगाते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से हस्तक्षेप की मांग उठायी गयी है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि विगत वर्ष उप्र सरकार, भारत सरकार व पावर कारपोरेशन के बीच उदय स्कीम के तहत त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। जिसमें बिजली कम्पनियों की सेहत में सुधार हेतु अनेकों वित्तीय मानक तय किये गये थे। जिसमें आगामी वर्षों में बिजली दर वृद्धि भी अनुमानित थी। परन्तु बडे दुर्भाग्य के साथ कहना पड रहा है कि अब पावर कारपोरेशन इस त्रिपक्षीय समझौते से पीछे हटते हुए उपभोक्ताओं को बडा धोखा देते हुए उप्र सरकार की छवि धुमिल करायी जा रही है और उसी आधार पर बिजली दरों में कई गुना बढोत्तरी कर दी है। जो पूरी तरह असंवैधानिक है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इस त्रिपक्षीय उदय के समझौते के तहत वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 तक बिजली दरों में बढोत्तरी व एटीसी हानियों को अनुमानित कर उस पर लाने का लक्ष्य रखा गया था जो निम्नवत हैः-

वित्तीय वर्ष                  एटीसी हानियाॅं प्रस्तावित विद्युत वृद्धि
2017-18                    23.63 प्रतिशत 6.95 प्रतिशत
2018-19                    19.36 प्रतिशत 6.80 प्रतिशत
2019-20                     14.86 प्रतिशत 6.60 प्रतिशत

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली कम्पनियों द्वारा 2 दिन पूर्व पावर कारपोरेशन में जो बिजली बढोत्तरी का प्रस्ताव सौंपा गया उसमें अध्यक्ष पावर कारपोरेशन की तरफ से जो शपथ पत्र दिया गया उसमें सबसे ऊपर यह लिखा गया है कि उदय स्कीम के तहत अलग अलग वर्षों में जो बिजली दर बढोत्तरी प्रस्तावित थी को संज्ञान में लिया गया है सवाल यह उठता है कि यदि वर्ष 2017-18 उदय स्कीम के तहत औसत वृद्धि को आधार माना गया तो वह 6.95 प्रतिशत से अधिक नही होनी चाहिये थी? फिर बिजली कम्पनियों द्वारा 22.66 प्रतिशत की औसत वृद्धि क्यों प्रस्तावित की गयी? इसी प्रकार पूरे प्रदेश में एटीसी हानियों का हाल यह है कि आज भी अनेकों ऐसे क्षेत्र हैं जहाॅं पर एटीसी हानियाॅं 50 प्रतिशत से भी ऊपर हैं जो पावर कारपोरेशन की अक्षमता को दर्शाता है। आज भी एटीसी हानियाॅं 30 से 35 प्रतिशत के बीच कम्पनियों में आम बात हैं। ऐसे में इसका खामियाजा प्रदेश के उपभोक्ता क्यों भुगतेंगे?
उपभोक्ता परिषद प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय से यह मांग करता है कि मुख्यमंत्री जी उदय स्कीम के तहत त्रिपक्षीय समझौते के वित्तीय पहलुओं को लागू कराया जाये और त्रिपक्षीय समझौते के विपरीत बिजली कम्पनियों द्वारा जो उपभोक्ता विरोधी कार्यवाही कराकर उप्र सरकार की छवि धूमिल की जा रही है उसे बचाया जाये। अन्यथा की स्थिति में प्रदेश का गरीब किसान लालटेन युग में जाने के लिये विवश होगा।