- उपभोक्ता परिषद ने उप्र सरकार से उठायी मांग सोलर पावर के अनुबन्धों की हो पूरी छानबीन।
- सोलर पावर की दरों पर उपभोक्ता परिषद ने किया बड़ा खुलासा, कहा जब देश में वर्ष 2017 में सोलर की न्यूनतम दर रू0 2.44 प्रति यूनिट सामने आयी तो उप्र की अधिक दरों पर पुनर्समीक्षा जरूरी।
- अबू धाबी, दुबई, चिली, मैक्सिको जैसे सोलर की अधिकता वाले देशों में भी सोलर की दरों में भी आयी काफी कमी, ऐसे में उप्र में सोलर की अधिक दरों पर सवाल उठना लाजिमी।
- देश के दूसरे राज्यों व विश्व के अनेकों देशों में जब सोलर पावर की दरें कम हुईं तो उप्र में सोलर पावर की दरें किस आधार पर अधिक निकलीं, इसकी हो पूरी समीक्षा।
पूरे देश व विश्व में सोलर पावर की दरों में बेतहाशा कमी के बावजूद भी उप्र में सोलर पावर की दरें क्यों अधिक रहीं? यह निश्चित ही उपभोक्ता हित में समीक्षा किया जाना चाहिए। वर्ष 2010 में जहां सोलर पावर की भारित औसत दर रू0 12.16 प्रति यूनिट थी, वह 2012 में घटकर रू0 8.05 प्रति यूनिट हो गयी। वर्ष 2013 में उ0प्र0 के प्रथम चरण में जहां भारित औसत दर रू0 8.90 प्रति यूनिट थी।
अन्ततः वर्ष 2015 में जहां अन्य राज्यों में न्यूनतम दर रू0 4.63 प्रति यूनिट आयीं उस दौरान भी उप्र के द्वितीय चरण में भारित औसत दर रू0 8.04 प्रति यूनिट रहीं। वर्ष 2016 में जहां दूसरे राज्यों में सोलर की दरें औसत रू0 4.85 प्रति यूनिट रहीं, वहीं वर्ष 2017 आते-आते देश के अन्य राज्य राजस्थान में भारित औसत दर रू0 2.44 प्रति यूनिट पहुंच गयीं जो इस बात को सिद्ध करता है कि जब देश के दूसरे राज्यों में सोलर की दरें कम हो रही थीं, तो उप्र में इतनी अधिक दरें कैसे? इसी प्रकार यदि सोलर पावर की अधिकता वाले विश्व के दूसरे देशों पर नजर डालें तो अबू धाबी, दुबई, चिली, मैक्सिको में भी यह दरें 1.99 यू0एस0 प्रति यूनिट से लेकर 2.99 यू0एस0 प्रति यूनिट वर्ष 2016 में सामने आयीं। ऐसे में उ0प्र0 के सोलर पावर की दरों पर उप्र सरकार को सभी के अनुबन्धों पुनर्विचार कर उपभोक्ता हितों में निर्णय लेना चाहिए। निश्चित तौर पर विगत दिनों चाहे वह थर्मल पावर का मामला रहा हो या फिर सोलर पावर का मामला रहा हो। सभी पर उप्र सरकार के निर्देश पर पावर कार्पोरेशन द्वारा अनुबन्ध को निरस्त करने हेतु साहसी कदम उठाया गया, निश्चितरूप से यह उपभोक्ताओं के लिये हितकारी साबित होगा।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिडिंग रूट के तहत सोलर पावर की दरें पूरे विश्व में कम होती गयीं। उसके बावजूद भी उ0प्र0 में सोलर पावर की दरें अधिक होना अपने आप में एक बड़ा सवाल सोलर के क्षेत्र में उठा रहा है। उ0प्र0 में सोलर की दरें दो चरणों में बिडिंग रूट के तहत सामने आयीं, पहले चरण में अगस्त 2013 में सबसे उच्चतम बोली रू0 9.33 प्रति यूनिट न्यूनतम रू0 8.01 प्रति यूनिट थीं, वहीं जून 2015 में द्वितीय चरण में उच्चतम बोली रू0 8.60 प्रति यूनिट व न्यूनतम रू0 7.02 प्रति यूनिट थी। उप्र देश का ऐसा राज्य है, जहां पर सोलर की दरें आसमान छू रही हैं और निश्चित तौर पर इसका खामियाजा प्रदेश की जनता को किसी न किसी रूप में भुगतना पड़ेगा। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि एमओयू रूट के तहत उप्र में महंगे करार किये गये और सोलर में भी महंगे करार किये गये। ऐसे में आने वाले समय में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को कैसे सस्ती बिजली मिल पायेगी। अभी भी समय है उप्र सरकार को ऐसे सभी परियोजनाओं के अनुबन्धों की समीक्षा करनी चाहिए और जो अनुबन्ध उपभोक्ता हित में न हों उन्हें अविलम्ब समाप्त किया जाना चाहिए।







