- टोरेन्ट पावर के अध्ययन के आधार पर 5 शहरों के निजीकरण पर उपभोक्ता परिषद ने पावर कार्पोरेशन को दिखाया आइना कहा सीएजी की रिर्पोट व नियामक आयोग में उपभोक्ता उत्पीड़न पर टोरेन्ट के खिलाफ जांच रिर्पोट सरकार पढ़ ले तो उसे स्वतः पता चल जायेगा कि कितना गम्भीर है मामला।
- टोरेन्ट पावर पर सीएजी की रिर्पोट स्वतः कर रही है बयां बिड में अनियमितता के चलते 31 मार्च 2012 तक हुआ है 421 करोड़ का घाटा जो अगले 18 वर्षो में बढ़कर हो जायेगा 4601 करोड़।
- टेरी की रिर्पोट पर यदि इतना है भरोसा तो पावर कार्पोरेशन जो 100 करोड़ से ज्यादा के रख छोड़े हैं कन्सल्टेन्ट उनकी रिर्पोट देख लें तो स्वतः उड़ जायेंगे होश।
लखनऊ, 20 मार्च। उप्र सरकार की कैबिनेट द्वारा लखनऊ सहित गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ व मुरादाबाद का निजी करण करने को जो फैसला लिया गया है और उसमें यह प्रचारित किया जा रहा है कि टोरेन्ट पावर आगरा की फ्रेन्चाइजी के परिणामें पर ‘‘दि इनर्जी रिसर्च इन्स्टीट्यूट‘‘ (टेरी) दिल्ली से एक अध्ययन कराया गया है। जिसमें 5 वर्षों में आगरा शहर के विद्युत वितरण को सुदृढ करने हेतु लगभग रू0 827 करोड़ का निवेश दिखाया गया है और अगले 3 वर्षों में लगभग रू0 220 करोड़ का व्यय अनुमानित है, भी दर्शाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि आगरा में उपभोक्ताओं की कुल संख्या जो 2.87 लाख थी वह 4.25 लाख पहुंच गयी है। पावर कार्पोरेशन यह प्रचारित कर क्या कहना चाहता है। क्या वह टोरेन्ट पावर का अनुबन्ध देश का सबसे अधिक उपभोक्ताओं के हित में है? जबकि सच्चाई कुछ और है।

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि टेरी जिसको विश्व की ख्याति प्राप्त संस्था कहा जा रहा है, ऐसी जो भी कन्सल्टेन्ट रूपी संस्थायें हैं। उन्हें समय-समय पर करोड़ों रू. का अध्ययन करने का जिम्मा मिलता है और वह मनचाही रिर्पोट दे देते हैं। आज उप्र के पावर कार्पोरेशन में 100 करोड़ से ज्यादा कन्सल्टेन्ट उदय, पावर फार आल, दीनदयाल उपाध्याय योजना, सौभाग्या व अन्य योजनाओं के लिये रखे गये हैं। वह किस प्रकार रिर्पोट तैयार करते है किसी से छिपा नहीं है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि शायद उप्र पावर कार्पोरेशन यह भूल गया है कि विगत वर्ष में टोरेन्ट पावर आगरा में उपभोक्ताओं की शिकायत पर उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा जांच करायी गयी थी, जिसमें टोरेन्ट पावर उपभोक्ता उत्पीड़न के लिये दोषी पाया गया था और उसके खिलाफ नियामक आयोग द्वारा कार्यवाही के निर्देश दिये गये थे, जो आज तक विचाराधीन है। और सबसे बड़ा खुलासा तो वर्ष 2012 में सीएजी आडिट की रिर्पोट जो विधानसभा के पटल पर रखी गयी थी, उसमें इस बात का उल्लेख किया गया था कि टोरेन्ट पावर बिड प्रक्रिया में अनियमितता के चलते 31 मार्च 2012 तक 421 करोड़ का घाटा हो चुका है, जो अगले 18 वर्षो में वह घाटा लगभग 4601 करोड़ तक पहुंच जायेगा।
क्या सीएजी की रिर्पोट उप्र सरकार व पावर कार्पोरेशन के पास नहीं है? सब कुछ जानते हुए भी अन्जान बनना प्रदेश के उपभोक्ताओं के साथ बड़ा धोखा है। पावर कार्पोरेशन उपभोक्ताओं की संख्या में बढ़ोत्तरी की बात कर रहा है, यह कोई नई बात नहीं है। पूरे प्रदेश में जब टोरेन्ट पावर का अनुबन्ध हुआ था तब लगभग 1 करोड़ उपभोक्ता हुआ करते थे। आज 2 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता हो गये हैं। यह पैमाना कोई नया नहीं है।







