जमीनी मुद्दों को भुला कर सिर्फ़ राफेल की हवाई यात्रा राहुल की भूल तो नहीं ! 

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नवेद शिकोह
सत्ता की ऊंचाइयों पर पहुंचने वाली जनता की अति अपेक्षायें भाजपा को अर्श से फर्श पर ला सकती हैं। केंद्र से लेकर देश के ज्यादातर राज्यों में भाजपा की हुकूमतों की जड़ों में एंटीइंकम्बेंसी का मट्ठा खतरनाक साबित हो सकता है। राम से लेकर काम और विकास से लेकर आर्थिक विनाश फैक्टर आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा सरकार को रिपीट होने से रोक सकता है। बेरोजगारी, मंहगाई, असुरक्षा, व्यापारियों की समस्याएं, आर्थिक मंदी से चौपट विकास की उम्मीदों का चक्का जाम पड़ा है। राम मंदिर निर्माण के लिए भाजपा सरकार ने उंगली भी नहीं हिलायी। नौजवान-किसान परेशान हैं। व्यापारी गुस्से मे हैं। सवर्ण भी मुतमईन नहीं हैं। दलित-पिछड़े भी सरकार से संतुष्ट नहीं नजर आ रहा है।
ये सब तमाम टूल भाजपा की विशाल सत्ता के जहाज को भी खोलने के लिए काफी हैं, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल के हथौड़े से राफेल पीटने के सिवा अन्य तमाम जमीनी मुद्दों पर खामोश हैं।
ये बात ठीक है कि राफेल मुद्दे पर डटे रहकर अपने आक्रमण तेवरों ने राहुल की ब्रांडिंग कर दी है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मोदी सरकार की तमाम जमीनी नाकामियों को राहुल भूल जायें। भारत का अस्सी प्रतिशत से अधिक तबका आम और कम पढ़ा-लिखा है। भारतीय समाज का ये बहुसंख्यक वर्ग बेरोजगारी, मंहगाई, सुरक्षा और जिन्दगी की प्राथमिक आवश्यकताओं के कष्टों को शिद्दत से महसूस करता है। इन्हें राफेल मुद्दों की पेचीदगी का जरा भी इल्म नहीं।
 बेरोजगारी, मंहगाई, किसानों की समस्याओं, नोटबंदी और आर्थिक गिरावट जैसे मुद्दों पर कांग्रेस बतौर विपक्षी दल आक्रामक तेवरों में रफ्ता-रफ्ता आगे बढ़ रही थी। इस दौरान राहुल गांधी ने विरोध के सारे स्वरों को छोड़कर राफेल मुद्दे का एकल स्वर ही आलापना शुरू कर दिया। जिसके देखा देखी कांग्रेस परिवार सड़क से लेकर संसद तक भाजपा विरोध के लिए राफेल तक सीमित हो गया।

1 COMMENT

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    and now eac time a comment is added I get three e-mails with tthe same comment.
    Is there anny way you can remove me from that service? Thank you!

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