कौशाम्बी में रामलीला मंचन: श्रीराम का मारीच वध, वैदेही वाटिका में प्रथम मिलन, और लक्ष्मण-परशुराम संवाद की मनमोहक प्रस्तुति
कौशाम्बी। मंझनपुर मुख्यालय स्थित हिन्दु धर्म सभा श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन ने क्षेत्रवासियों को आध्यात्मिक और भावनात्मक अनुभवों से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान ताड़का वध के बाद भगवान श्रीराम द्वारा मारीच और सुबाहु के साथ युद्ध का मंचन किया गया। श्रीराम के बाण से मारीच सौ योजन दूर जा गिरा, जबकि सुबाहु मृत्यु को प्राप्त हुआ। इसके बाद ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण यज्ञ की रक्षा कर मिथिला की ओर सीता स्वयंवर के लिए प्रस्थान करते हैं। रास्ते में अहिल्या का उद्धार और गंगा तट पर विश्राम के दौरान विश्वामित्र द्वारा गंगा के अवतरण और राजा भगीरथ की तपस्या की कथा सुनाई गई।

जनकपुर की वैदेही वाटिका में श्रीराम और सीता का प्रथम मिलन हुआ, जहां सीता मां पार्वती से श्रीराम को पति रूप में पाने की प्रार्थना करती हैं। इस दृश्य की सुंदर झांकियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। शुक्रवार को मिथिला सभा में शिवधनुष टूटने की घटना और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मनमोहक मंचन हुआ। धनुष टूटने की गरज सुनकर क्रोधित परशुराम मिथिला पहुंचे, जहां लक्ष्मण के तीखे वचनों ने उनके क्रोध को और भड़काया।
लक्ष्मण ने कहा, “बचपन में हमने कई धनुष तोड़े, पर ऐसा क्रोध कभी नहीं किया।” श्रीराम ने शांत स्वर में परशुराम को समझाया, जिससे अंततः परशुराम को उनके विष्णु अवतार होने का विश्वास हुआ और वे वन को प्रस्थान कर गए। रामलीला मैदान में सैकड़ों दर्शक इस आध्यात्मिक अनुभव का हिस्सा बने। मंचन के दौरान जय श्रीराम के उद्घोष गूंजते रहे।
कमेटी के पदाधिकारी आशीष केसरवानी, पंकज शर्मा, ज्ञानचन्द्र गुप्ता, रोहित गुप्ता, सुनील नामदेव, अजय वर्मा, सोना लाल केशरवानी सहित नगरवासी उपस्थित रहे। रोहित गुप्ता ने बताया कि गुरुवार को लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मंचन और आकर्षक नृत्य-नाटिकाओं ने दर्शकों को खूब आनंदित किया। यह आयोजन क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का केंद्र बना हुआ है।







