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    रणसी की भूत बावड़ी: जहां रात में परछाइयां चढ़ती हैं सीढ़ियाँ, नीचे नहीं उतरतीं!

    ShagunBy ShagunJanuary 19, 2026 मानो या न मानो No Comments5 Mins Read
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    Ransi's Haunted Stepwell: Where shadows climb the stairs at night, but never descend!
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    एक लोक कथा : लेकिन किस्सा रोचक है – राजस्थान की सबसे रहस्यमयी लोककथा जो आज भी जिंदा है!

    बहुत पुरानी बात है… संवत् 1600 के आसपास की।
    राजस्थान के थार के किनारे, जोधपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर, रणसी नाम का एक छोटा-सा गांव। वहां के ठाकुर थे जयसिंह चिरढाणी – बहादुर, तेज-तर्रार, और घोड़े पर सवार होकर रात-दिन जोधपुर की सैर करते।

    एक शाम की बात है। ठाकुर जयसिंह जोधपुर से लौट रहे थे। साथ में कुछ सेवक थे, लेकिन रास्ते में उनका घोड़ा थक गया। चिरढाणी के पास लटियाली नाड़ी (एक छोटी-सी बरसाती नदी) आई। रात गहरा रही थी। सेवक आगे निकल चुके थे। ठाकुर अकेले रुके, घोड़े को पानी पिलाने।

    जैसे ही वे पानी की ओर झुके, अचानक हवा ठंडी हो गई। पानी में एक काली परछाईं उभरी। एक भयानक आवाज गूंजी

    “पहले मुझे पानी पिला, ठाकुर… फिर तू पीना!”

    Ransi's Haunted Stepwell: Where shadows climb the stairs at night, but never descend!
    भूत ने कहा- ‘मुझे छोड़ो, बावड़ी बनवा दूंगा’… और एक रात में खड़ी हो गई 16 पोलों वाली इमारत!

    ठाकुर ने चारों तरफ देखा। कोई नहीं। फिर वही आवाज –
    “मैं भूखा-प्यासा भटक रहा हूं सदियों से। तू पहले मुझे संतुष्ट कर!”

    ठाकुर जयसिंह हंसे। “भूत हो या प्रेत, मैं किसी से नहीं डरता!”
    उन्होंने घोड़े की लगाम पकड़ी और कहा, “जा, पानी पी ले… लेकिन मेरे आगे मत आ!”

    तभी अंधेरे से दर्जनों भूतियां निकलीं। वे ठाकुर को घेरने लगे। “पानी पिला… पानी पिला!” उनकी ठंडी सांसें ठाकुर के चेहरे पर पड़ रही थीं।

    ठाकुर ने तलवार निकाली, लेकिन भूतियां हंसने लगीं। “तलवार से क्या होगा? आ, कुश्ती लड़!”

    और फिर शुरू हुई वो महाकाव्य वाली मल्लयुद्ध!
    ठाकुर जयसिंह ने एक भूत की चोटी (जूड़ा) पकड़ ली। भूत चीखा। बाकी भूतियां डर गईं। धीरे-धीरे वे गायब होने लगे। आखिरी बचा वो भूत, जिसकी चोटी ठाकुर के हाथ में थी।भूत रोने लगा—”छोड़ दे मुझे, ठाकुर! मैं हार गया। तूने मुझे हरा दिया।”

    ठाकुर ने पूछा, “क्या मांगता है बदले में?”

    भूत ने कहा, “मुझे छोड़ दे… मैं तेरे गांव में एक ऐसी बावड़ी और महल बनवा दूंगा, जो एक रात में तैयार हो जाएगा।

    लेकिन एक शर्त है—
    तू इस रहस्य को किसी को भी नहीं बताएगा। न किसी इंसान को, न परिवार को। और निर्माण के दौरान किसी को भी वहाँ देखने या आने नहीं देगा। अगर तूने ये वादा तोड़ा, तो काम अधूरा रह जाएगा और मैं फिर कभी नहीं लौटूँगा!”

    ठाकुर राजी हो गए। भूत गायब हुआ।

    अगली सुबह… गांव वालों ने देखा तो आंखें फटी रह गईं!
    जहां कल तक सिर्फ रेगिस्तान था, वहां 16 पोलों वाली विशाल बावड़ी खड़ी थी ! 1700 सीढ़ियां, जटिल नक्काशी, पानी का ठंडा झरना। और उसके पास ठाकुर का नया महल – एक रात में!

    Ransi's Haunted Stepwell: Where shadows climb the stairs at night, but never descend!
    रात में पानी पिलाने गए ठाकुर… भूतों ने घेर लिया और बनवा दी दुनिया की सबसे अजीब बावड़ी!

    लेकिन… कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
    कुछ दिनों बाद ठाकुर ने गर्व में किसी को बता दिया कि “भूत ने बनवाया है!”
    वादा टूट गया। भूत क्रोधित हो गया। उसने निर्माण अधूरा छोड़ दिया। बावड़ी की कुछ सीढ़ियां टूटीं, कुछ हिस्से रहस्यमय ढंग से अधूरे रह गए।

    आज भी रणसी गांव में वो भूतों की बावड़ी (या भूत बावड़ी) खड़ी है।

    रात में लोग कहते हैं—परछाइयों में अजीब आकृतियां नजर आती हैं। पानी की सतह पर कभी-कभी चोटी वाले भूत की झलक दिख जाती है। पैरों के निशान मिलते हैं, जो सीढ़ियों पर चढ़ते हैं… लेकिन कभी नीचे नहीं आते।

    Ransi's Haunted Stepwell: Where shadows climb the stairs at night, but never descend!
    जोधपुर से 90 किमी दूर: भूतिया बावड़ी जहां पानी मीठा है, लेकिन रात में छाया डरावनी

    और ठाकुर जयसिंह? उनकी बहादुरी आज भी लोककथाओं में जिंदा है।
    कहते हैं—साहस से भूत भी झुक जाता है, लेकिन वादा निभाना भूल जाए तो अधूरा ही रह जाता है सब कुछ।

    बंटी, अयूब और चनणी की बात सही है—
    ऐसी कहानियां सिर्फ डर नहीं, राजस्थान की जीवंत संस्कृति, साहस और रहस्यों को सदियों तक जिंदा रखती हैं। क्या आपने कभी रणसी जाकर वो बावड़ी देखी है? रात में वहां जाने की हिम्मत कौन करेगा?

    तालिब शेख ने कहा : रात में परछाइयाँ देखकर तो रोंगटे खड़े हो जाते होंगे रणसी गाँव अब लिस्ट में ऐड कर लिया।

    बता दें कि यह कहानी पूरी तरह “सच्ची” नहीं है यह राजस्थान की एक प्रचलित लोककथा (folklore) है, जो मौखिक परंपरा से चली आ रही है। रणसी गांव (जोधपुर जिले में, जोधपुर शहर से करीब 90 किमी दूर) की भूतों की बावड़ी (या भूत बावड़ी) वास्तव में बयान करती है, और यह एक प्राचीन, प्रभावशाली स्थापत्य कृति है। 16 पोलों वाली, लगभग 1700 सीढ़ियों वाली, और लगभग 145 वर्ग मीटर में फैली हुई।
    जानकारों के अनुसार यह बावड़ी महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय के समय (1895 के आसपास) में बनी थी, लेकिन इसका निर्माण भूतों द्वारा एक रात में होने की बात सिर्फ एक किंवदंती है।

    भूतिया होने के दावे: लोग आज भी कहते हैं कि रात में बावड़ी से निर्माण की आवाजें आती हैं, परछाइयां दिखती हैं, या paranormal activities होती हैं।
    लेकिन ये सिर्फ व्यक्तिगत अनुभव या अफवाहें हैं, कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं। कई पर्यटक और यूट्यूबर (जैसे “Exploring Rajasthan” या “Hemendra Singh Champawat”) वहां जाकर वीडियो बनाते हैं, लेकिन वे भी इसे “haunted” बताते हुए लोककथा ही दोहराते हैं। – प्रस्तुति : सुशील कुमार

    #Ransi's Haunted Stepwell: Where shadows climb the stairs at night but never descend!
    Shagun

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