50 की उम्र पार कर चुके कार्मिकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, आरक्षण समर्थक बोले दलित कार्मिक होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित

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  • 50 साल की उम्र पार कर चुके कार्मिकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति करने के आदेश पर आरक्षण समर्थक भड़के कहा इस आदेश से दलित कार्मिक होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित, क्योंकि उनकी रिर्पोट जानबूझकर की जाती है खराब।
  • पूर्व सरकारों में इस प्रकार के जारी आदेश से 75 प्रतिशत दलित कार्मिकों को ही भुगतना पड़ा था खामियाजा।
  • दलित कार्मिकों को जानबूझकर महत्वहीन व परफार्मेन्स विहीन पदों पर किया जाता है तैनात फिर दी जाती है उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि।
  • सपा सरकार की भांति भाजपा सरकार में भी दलित कार्मिक विभागों में हाशिये पर।
  • कल आरक्षण बचाओ महासम्मेलन में इस मुद्दे पर भी होगी गहन चर्चा। 
50 साल की उम्र पार कर चुके सरकारी कर्मचारियों हेतु जारी अनिवार्य सेवानिवृत्ति सम्बन्धी उप्र सरकार के शासनादेश पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति उप्र ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उप्र सरकार से उसे वापस लेने की मांग उठायी है। संघर्ष समिति की कार्यसमिति की बैठक में आज इस मुद्दे पर गम्भीर विचार विमर्श किया गया। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति हेतु गठित स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा कार्मिकों की 10 वर्ष की वार्षिक गोपनीय रिर्पोट को आधार बनाकर इस प्रकार की कार्यवाही शुरू की जाती है।
सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि सबसे ज्यादा वार्षिक गोपनीय रिर्पोट अनुसूचित जाति/जनजाति के कार्मिकों की जानबूझ कर खराब की जाती है और उन्हें समय-समय पर निन्दा प्रविष्टि व प्रतिकूल प्रविष्टि भी प्रदान की जाती है। उसका एक मुख्य कारण यह भी है कि सभी विभागों में ऐसे पदों पर 90 प्रतिशत दलित कार्मिकों को पोस्ट किया जाता है, जहां की परफार्मेन्स निम्न स्तर की हो और वहां कोई अधिकारी जाने को तैयार नहीं होते हैं और अब इसी को आधार मानकर जब कार्यवाही की जायेगी तो निश्चित तौर पर 75 प्रतिशत दलित कार्मिक ही चिन्हित होंगे। वर्तमान सरकार में सपा सरकार की भांति ही दलित कार्मिकों को महत्वहीन व परफार्मेन्स विहीन पदों पर तैनात किया जा रहा है और उनके खिलाफ येन केन प्रकारेण कार्यवाहियां हो रही हैं, जो संवैधानिक नहीं हैं।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, श्यामलाल, अन्जनी कुमार, बनी सिंह, अशोक सोनकर, चमन लाल, श्री निवास राव, बाबू लाल ने कहा कि पिछली सपा सरकार के 5 वर्ष के कार्यकाल में सबसे ज्यादा दलित कार्मिकों का उत्पीड़न हुआ है और उनके खिलाफ मनमाने तरीके से अनुशासनात्मक कार्यवाही की गयी है लाखों कार्मिकों को रिवर्ट किया गया है और उन्हें महत्वहीन एवं परफार्मेन्स विहीन पदों पर तैनात किया गया था और उसकी तुलना परफार्मेन्स देने वाले पदों से करके उन्हें निन्दा व प्रतिकूल प्रविष्टि प्रदान की गयी है। अब निश्चित तौर पर इस आदेश के चलते वर्तमान सरकार में उन्हीं का उत्पीड़न होगा। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र द्वारा कल 9 जुलाई को अम्बेडकर नगर में आयोजित हो रहे आरक्षण बचाओ महासम्मेलन जिसमें हजारों की संख्या में दलित कार्मिक भाग ले रहे हैं, उसमें इस मुद्दे पर भी गहन चर्चा होगी।
संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि पूर्व की सरकारों में जब-जब अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश लागू कर कार्यवाही की गयी तो उसमें सबसे ज्यादा अनिवार्य सेवानिवृत्ति दलित कार्मिकों को दी गयी। प्रदेश के पावर सेक्टर में विगत में इस प्रकार की कार्यवाही पर अनेकों अभियन्ताओं द्वारा अनिवार्य सेवानिवृत्त किये जाने के विरोध में विधिक वाद भी दाखिल किये गये थे जिसमें एक मामले में मा0 सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के बाद पावर कार्पोरेशन के एक दलित अभियन्ता को विभाग को पुनः सेवा में रखना पड़ा था और उसे पूरा भुगतान भी करना पड़ा था, जो इस प्रकार की विद्धेष पूर्ण कार्यवाही का खुलासा कर रहा है।

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