मेंहदी रचाए हुए,
गजरा सजाए हुए।
धानी परिधान धारे,
गोरियाँ आय रहीं।
पूजन के थाल लिए,
फूलन की माल लिए,
अखंड सौभाग्य हित,
गौरा मनाय रहीं।।1।।
बिंदिया सजाए हुए,
कजरा लगाए हुए,
झूला झूलें बागन में,
कजरी गाय रहीं।
गीत गाएँ सावन के,
तीज मनभावन के।
सोलह शृंगार किये,
मन हर्षाय रहीं।।2।।
- पुष्पा जोशी ‘प्राकाम्य’ शक्तिफार्म, सितारगंज, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड







