बच्चे के बाल कटाने
जब भी जाता हूँ
मिल जाते हैं मेरे पिता
मुझमें ही कहीं खड़े
वही वज़नदार आवाज़
सुनो,
इसके बाल थोड़े और हल्के करो,
मैं जान गया हूँ
पिता नहीं देखना चाहते
कोई भी बोझ बच्चे के सिर पर,
मैं जान गया हूँ
अब कि बच्चे के सिर से
बोझ उतरने और उम्र के
साथ पिता की भारी होती
थोड़ी कांपती सी आवाज़
में कोई संबंध है,
बच्चे के बाल कटाने
मैं जाता तो हूँ
बच्चे के साथ पर
लौटता है पिता के साथ,
– राज कुमार सिंह की वॉल से साभार
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